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एनएच 152-डी के लिए अधिग्रहित भूमि का दो करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार: विधायक राजदीप

Tue, 25 Dec 2018 01:43 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 25 Dec 2018 01:43 AM IST
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एनएच 152-डी के लिए अधिग्रहित भूमि का दो करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार: विधायक राजदीप
अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। राष्ट्रीय राजमार्ग 152-डी के लिए दादरी में किसानों की अधिगृहीत जमीन का उचित मुआवजा और अन्य मांगों के लिए विधायक राजदीप फौगाट प्रभावित किसानों के साथ बुधवार को सुबह 11 बजे जिला उपायुक्त से मुलाकात करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

विधायक राजदीप फौगाट ने बताया कि भारत सरकार द्वारा गंगखेड़ी से लेकर नारनौल के बीच नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जा रहा है। यह राजमार्ग दादरी की सीमा से भी होकर गुजरेगा। इस राजमार्ग के बनने से दादरी जिला के गांव दतौली, मकड़ाना, रामनगर, मौडी, ढाणी फौगाट, टिकान कलां, खातीवास, समसपुर, झिंझर, रानीला, बौंद कलां के किसान प्रभावित होंगे और उनकी हजारों एकड़ जमीन अधिगृहीत हो जाएगी। सरकार द्वारा जो मुआवजा किसानों के लिए निश्चित किया गया है वह बहुत ही कम है। इसी सिलसिले में सोमवार को गांव खातीवास में ग्रामीणों की एक बैठक हुई। बैठक में विधायक राजदीप फौगाट भी उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने विधायक राजदीप फौगाट से उनकी अधिगृहीत की गई जमीन का दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिलाने की मांग की। इसके साथ साथ ग्रामीणों ने बताया कि सरकार अधिग्रहण को लेकर बहुत संशय बनाए हुए हैं। उन्हें बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के बारे में कुछ भी खुलकर नहीं बताया जा रहा जिससे किसानों के अंदर अपनी जमीन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। किसानों ने बताया कि समाचार पत्रों में किसान की जमीन का जो मुआवजा सरकार द्वारा दी जाने की बात कही जा रही है वह बहुत ही कम है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र का कोई भी किसान विकास विरोधी नहीं है परंतु इस क्षेत्र के किसानों के पास पहले से ही जमीन बहुत कम है। जिस पर कठिन परिश्रम कर वह किसी तरह अपना व अपने आश्रितों का जीवन यापन करता है। राष्ट्रीय राजमार्ग बनने के बाद उनके पास न बराबर जमीन ही बच जाएगी। इसलिए उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा किसान को उसकी बची हुई जमीनों व खेतों में आने जाने के लिए कच्चे रास्तों के सामने अंडर पास बनाए जाए। ग्रामीणों ने मांग की कि किसानों को राष्ट्रीय राजमार्ग की चपेट में आने वाले ट्यूबवेल, भवन आदि का भी अलग से मुआवजा मिलना चाहिए।
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