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मापदंडों पर खरी नहीं उतरी

Mon, 18 Feb 2019 12:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2019 12:48 AM IST
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मापदंडों पर खरी नहीं उतरी
अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर। सरकार से मान्यता प्राप्त जिले की 16 खेल नर्सरियों में से आठ के बंद होने से अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के लिए परेशानी बढ़ गई है। मानक के मुताबिक अभ्यास के लिए कम से कम 12 खिलाड़ी होने चाहिए, लेकिन इतनी संख्या में खिलाड़ियों के नहीं आने पर विभाग ने आठ खेल नर्सरियों को बंद कर दिया है। डेढ़ साल पहले शुरू हुई इन नर्सरियों को 25-25 खिलाड़ी दिए गए थे।
इस संबंध में नर्सरी संचालकों को विभाग ने गत आठ फरवरी को पत्र भी जारी कर दिया है। पत्र के मुताबिक इन नर्सरियों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह फैसला नर्सरियों में खेल सुविधाओं व खिलाड़ियों की कम संख्या को देखते हुए लिया गया है। अब जिले में महज आठ सरकारी खेल नर्सरियां ही वर्किंग में हैं। ऐसे में जिले की होनहार प्रतिभाओं को अब निजी खेल अकादमी में जाकर महंगा प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। यह खेल नर्सरियां सरकारी व प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में चल रही थी। जिला खेल विभाग ने इन सभी शिक्षण संस्थाओं के मुखिया को पत्र खिलकर नर्सरी बंद करने संबंधी निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे पहले सरकार के आदेशों पर खेल विभाग ने करीब डेढ़ साल पहले जिले मेें 16 खेल नर्सरियां शुरू की थी। इन खेल नर्सरियों का समय- समय पर खेल विभाग के अधिकारियों की ओर से निरीक्षण किया गया था ताकि इनमेें मिलने वाली सुविधाओं व खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आंकलन किया जा सके। निरीक्षण के दौरान इन नर्सरियों में गुणवत्ता व खिलाड़ियों की संख्या के नाम पर खानापूर्ति मिली। निरीक्षण के दौरान नियमानुसार खिलाड़ियों की संख्या भी सही नहीं पाई गई।
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इन खेलों के लिए अलॉट हुई थी नर्सरी
खेल नर्सरियों में कबड्डी, तीरंदाजी, वॉलीबाल, खो-खो, फुटबाल, एथलीट, हॉकी आदि खेलों का प्रशिक्षण देना शुरू किया गया था ताकि यहां के खिलाड़ी अपने खेल कौशल को निखारकर आगे बढ़ सके। इन नर्सरियों में खिलाड़ियों व कोच को सरकार की ओर से सुविधाएं दी जा रही थी। सभी प्रकार के सरकारी लाभ सरकार की ओर से मिलते रहे हैं। यह खेल नर्सरियां शहर व गांवों में स्थित सरकारी व प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में खोली गई थी।
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मजबूरी में लिया नर्सरी बंद करने का निर्णय
खेल विभाग को इन खेल नर्सरियों से पॉजिटिव फीडबैक न मिलने पर इनको बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जिला खेल विभाग की ओर से सभी खेल नर्सरियों में संस्था मुखिया को पत्र जारी कर नर्सरी बंद करने के निर्देश दे दिए गए हैं। अब केवल आठ खेल नर्सरियां भी बची हैं, जिनमें खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं।


इन खेल नर्सरियों को किया बंद
विभाग ने जीएवी स्कूल पाटोदा में एथलेटिक्स, ज्यूपिटर स्कूल रोहद में एथलेटिक्स, संत कबीर इंटरनेशनल स्कूल लडरावण में कबड्डी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खाचरौली में कुश्ती, मॉर्डन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बहादुरगढ़ में हॉकी, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुल्हेड़ा में हॉकी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डाबोदा कलां में फुटबाल, मून लाइट हाई स्कूल सिलाना में आर्चरी की खेल नर्सरी को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। खेल विभाग के पत्र में कहा गया है कि इन खेल नर्सरियों के संचालकों को समय- समय पर खामियों व खिलाड़ियों की संख्या के बारे में अवगत भी कराया गया था। इन खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों का चयन ट्रायल के आधार पर किया गया था। बाद में यहां कोच भी तैनात किए गए थे ताकि खिलाड़ियों को खेल अभ्यास करवाते रहे लेकिन यह नर्सरियां सरकारी मापदंडों के अनुरूप खरी नहीं उतर पाई।

सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों पर खरा न उतरने के चलते आठ खेल नर्सरियों को बंद किया गया है। इस संबंध में संचालकों को पत्र जारी कर दिया गया है।
सत्यदेव मलिक, डीएसओ, झज्जर।
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