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हिसार जा रहे 43 जाट नेता हिरासत में, रात सवा
Updated Sun, 02 Sep 2018 02:00 AM IST
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हिसार जा रहे 43 जाट नेता हिरासत में, रात सवा 8 बजे रिहा
झज्जर। हिसार के उमरा गांव में आयोजित कैप्टन अभिमन्यु की जनसभा का विरोध करने जा रहे जाट संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया। दिन भर हिरासत में रखने के बाद शनिवार को रात करीब साढे़ 8 बजे निवारक कार्रवाई करते हुए पदाधिकारियों को रिहा कर दिया गया।
कैप्टन अभिमन्यु की जनसभा में काले झंडे दिखाने के लिए झज्जर जिले से शनिवार को सुबह जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी रवाना हुए थे। जिन्हें हिसार पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया। समिति के जिलाध्यक्ष व अन्य 18 लोगों को गुढ़ा गांव के पास से हिरासत में लिया गया। हिरासत में लेने के बाद इन्हें सीआईए थाने में लाया गया। वहीं बेरी से 24 लोगों को कलानौर के रास्ते जाते हुए हिरासत में लिया गया। जिन्हें पुलिस लाईन में ले जाया गया। इन लोगों को प्रशासन ने करीब साढे छह बजे छोड़ दिया। वहीं समिति के जिलाप्रधान जितेंद्र रईया व इनके साथियों को रात करीब साढे 8 बजे सीआईए थाने से छोड़ा गया।
लोकतंत्र की हत्या है इस तरह उठाना: बबला
पुलिस ने उन्हें बदमाशों की तरह गुढ़ा बाईपास से गाड़ी के आगे गाड़ियां लगाकर हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस की बस भी मौजूद रही। पुलिस ने जिस प्रकार से शांतिपूर्वक काले झंडे दिखाकर विरोध करने जा रहे लोगों को पकड़ा, वह सरेआम लोकतंत्र की हत्या है। वे रविवार को सीएम के कार्यक्रम में भी काले झंडे दिखाने की रणनीति को बदलेंगे नहीं। उसके लिए भी उनके द्वारा पूरे प्रबंध किए जाएंगे। उन्हें सुबह सवा आठ बजे से रात साढे़ आठ बजे तक हिरासत में रखा गया, जो कि सरासर गलत है।
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- जितेंद्र उर्फ बबला, जिला प्रधान, जाट आरक्षण संघर्ष समिति झज्जर।
वर्जन
कानून व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा होने पर कुछ लोगों को हाईवे पर रोका गया था। जिन्हें पूछताछ के बाद निवारक कार्रवाई करते हुए रिहा कर दिया गया। - पंकज नैन, एसपी, झज्जर।
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झज्जर। हिसार के उमरा गांव में आयोजित कैप्टन अभिमन्यु की जनसभा का विरोध करने जा रहे जाट संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया। दिन भर हिरासत में रखने के बाद शनिवार को रात करीब साढे़ 8 बजे निवारक कार्रवाई करते हुए पदाधिकारियों को रिहा कर दिया गया।
कैप्टन अभिमन्यु की जनसभा में काले झंडे दिखाने के लिए झज्जर जिले से शनिवार को सुबह जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी रवाना हुए थे। जिन्हें हिसार पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया। समिति के जिलाध्यक्ष व अन्य 18 लोगों को गुढ़ा गांव के पास से हिरासत में लिया गया। हिरासत में लेने के बाद इन्हें सीआईए थाने में लाया गया। वहीं बेरी से 24 लोगों को कलानौर के रास्ते जाते हुए हिरासत में लिया गया। जिन्हें पुलिस लाईन में ले जाया गया। इन लोगों को प्रशासन ने करीब साढे छह बजे छोड़ दिया। वहीं समिति के जिलाप्रधान जितेंद्र रईया व इनके साथियों को रात करीब साढे 8 बजे सीआईए थाने से छोड़ा गया।
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लोकतंत्र की हत्या है इस तरह उठाना: बबला
पुलिस ने उन्हें बदमाशों की तरह गुढ़ा बाईपास से गाड़ी के आगे गाड़ियां लगाकर हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस की बस भी मौजूद रही। पुलिस ने जिस प्रकार से शांतिपूर्वक काले झंडे दिखाकर विरोध करने जा रहे लोगों को पकड़ा, वह सरेआम लोकतंत्र की हत्या है। वे रविवार को सीएम के कार्यक्रम में भी काले झंडे दिखाने की रणनीति को बदलेंगे नहीं। उसके लिए भी उनके द्वारा पूरे प्रबंध किए जाएंगे। उन्हें सुबह सवा आठ बजे से रात साढे़ आठ बजे तक हिरासत में रखा गया, जो कि सरासर गलत है।
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- जितेंद्र उर्फ बबला, जिला प्रधान, जाट आरक्षण संघर्ष समिति झज्जर।
वर्जन
कानून व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा होने पर कुछ लोगों को हाईवे पर रोका गया था। जिन्हें पूछताछ के बाद निवारक कार्रवाई करते हुए रिहा कर दिया गया। - पंकज नैन, एसपी, झज्जर।