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सप्ताह में दूसरी बार टूटी बहादुरगढ़ वाटर चैनल, लाखों लीटर पानी बर्बाद
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाली बहादुरगढ़ वाटर चैनल की हालत खस्ता हो गई है। बुधवार की सुबह एक बार फिर देवीलाल पार्क के पास नहर टूट गई। इससे लाखों लीटर पानी बह गया। पानी भरने से देवीलाल पार्क ने झील का रूप ले लिया। नहर टूटने से जलघरों की सप्लाई भी प्रभावित हो गई। सप्ताहभर में यह नहर दो बार टूट चुकी है। इससे जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा प्रशासन ने भी चिंता जताई है।
बुधवार सुबह शहरवासी पार्क में सैर करने के लिए पहुंचे तो नहर टूटने का पता लगा। लोगों ने देखा कि पार्क में चारों तरफ पानी ही पानी भरा हुआ है। जिसकी सूचना नहरी विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना के आधार पर विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और टूटी माइनर को ठीक करने के प्रयास शुरू किए। दोपहर तक मरम्मत का कार्य चला। नहर टूटने से देवीलाल पार्क में एक से डेढ़ फुट तक पानी भर गया। मरम्मत कार्य के चलते नहर में पानी की सप्लाई रोकी गई थी। इससे शहरवासियों को भी पानी के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
सप्ताह में दूसरी बार टूटी नहर
दरअसल, माइनर में अनेकों जगह दरार आई हुई है। कमजोर होने के कारण इस नहर में पानी कम छोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादा पानी आने से यह टूट जाती है। इस सप्ताह में यह नहर दूसरी बार टूटी है। इसे पहले 11 अक्तूबर, 25 अप्रैल और 8 मई को भी यह नहर टूटी थी। लोगों का आरोप है कि विभाग द्वारा हर बार मरम्मत के नाम पर लीपापोती की गई है। इसी लापरवाही के कारण नहर बार-बार टूट जाती है। बार-बार माइनर टूटने से लाखों लीटर पानी फिजूल बह जाता है।
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गहरा जाएगा पेयजल संकट
इस नहर के जरिये हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग के जलघरों में पानी सप्लाई होती है। इन दिनों हुडा जलघर के एक मात्र टैंक की सफाई चल रही है। जिससे सेक्टरों के हजारों परिवारों की पेयजल सप्लाई पहले से ही प्रभावित है। नहर से जितना पानी मिलता है, वह सप्लाई कर दिया जाता है। चूंकि अब नहर भी टूट गई है तो हुडा की पेयजल सप्लाई प्रभावित हो गई। यदि जल्द ही नहर नहीं ठीक होती है तो सेक्टरों में पेयजल किल्लत बढ़ सकती हैं। उधर, जनस्वास्थ्य विभाग के भी वाटर स्टोरेज टैंकों में ज्यादा पानी नहीं है।
22 साल पहले बनी थी नहर के पुनर्निर्माण की जरूरत
वर्ष-1995 में इस नहर का निर्माण हुआ था। 22 साल पुरानी हो जाने के कारण अब इसकी हालत खराब हो गई है। अब यह शहर को जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रही। इसकी हालत को सुधारने के लिए नहरी विभाग ने योजना तो बनाई है, मगर पैसे के कारण यह कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहा। नहर विभाग ने हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग को 40 करोड़ रुपये के एस्टिमेट बनाकर भेजे हैं। यदि यह राशि विभाग को मिल जाए तो इस नहर का पुनर्निर्माण शुरू हो जाए। बता दें कि फिलहाल शहर को 43 क्यूसेक पानी की जरूरत है। मगर फिल्हाल नहर में 25 क्यूसेक पान ही छोड़ा जा रहा है। इससे ज्यादा पानी छोड़े जाने पर नहर टूटने की आशंका बन जाती है।
अधिकारी बोले
सूचना मिलते ही कर्मचारियों को मरम्मत के लिए भेज दिया गया था। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा। नहर के नए सिरे से निर्माण की जरूरत है। जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा को एस्टिमेट बनाकर भेजा गया हैं, मगर दोनों विभाग दिलचस्पी नहीं ले रहें।
- परमजीत सिहाग, एसई, नहरी विभाग बहादुरगढ़।
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बहादुरगढ़।
शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाली बहादुरगढ़ वाटर चैनल की हालत खस्ता हो गई है। बुधवार की सुबह एक बार फिर देवीलाल पार्क के पास नहर टूट गई। इससे लाखों लीटर पानी बह गया। पानी भरने से देवीलाल पार्क ने झील का रूप ले लिया। नहर टूटने से जलघरों की सप्लाई भी प्रभावित हो गई। सप्ताहभर में यह नहर दो बार टूट चुकी है। इससे जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा प्रशासन ने भी चिंता जताई है।
बुधवार सुबह शहरवासी पार्क में सैर करने के लिए पहुंचे तो नहर टूटने का पता लगा। लोगों ने देखा कि पार्क में चारों तरफ पानी ही पानी भरा हुआ है। जिसकी सूचना नहरी विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना के आधार पर विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और टूटी माइनर को ठीक करने के प्रयास शुरू किए। दोपहर तक मरम्मत का कार्य चला। नहर टूटने से देवीलाल पार्क में एक से डेढ़ फुट तक पानी भर गया। मरम्मत कार्य के चलते नहर में पानी की सप्लाई रोकी गई थी। इससे शहरवासियों को भी पानी के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
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सप्ताह में दूसरी बार टूटी नहर
दरअसल, माइनर में अनेकों जगह दरार आई हुई है। कमजोर होने के कारण इस नहर में पानी कम छोड़ा जाता है। लेकिन ज्यादा पानी आने से यह टूट जाती है। इस सप्ताह में यह नहर दूसरी बार टूटी है। इसे पहले 11 अक्तूबर, 25 अप्रैल और 8 मई को भी यह नहर टूटी थी। लोगों का आरोप है कि विभाग द्वारा हर बार मरम्मत के नाम पर लीपापोती की गई है। इसी लापरवाही के कारण नहर बार-बार टूट जाती है। बार-बार माइनर टूटने से लाखों लीटर पानी फिजूल बह जाता है।
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गहरा जाएगा पेयजल संकट
इस नहर के जरिये हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग के जलघरों में पानी सप्लाई होती है। इन दिनों हुडा जलघर के एक मात्र टैंक की सफाई चल रही है। जिससे सेक्टरों के हजारों परिवारों की पेयजल सप्लाई पहले से ही प्रभावित है। नहर से जितना पानी मिलता है, वह सप्लाई कर दिया जाता है। चूंकि अब नहर भी टूट गई है तो हुडा की पेयजल सप्लाई प्रभावित हो गई। यदि जल्द ही नहर नहीं ठीक होती है तो सेक्टरों में पेयजल किल्लत बढ़ सकती हैं। उधर, जनस्वास्थ्य विभाग के भी वाटर स्टोरेज टैंकों में ज्यादा पानी नहीं है।
22 साल पहले बनी थी नहर के पुनर्निर्माण की जरूरत
वर्ष-1995 में इस नहर का निर्माण हुआ था। 22 साल पुरानी हो जाने के कारण अब इसकी हालत खराब हो गई है। अब यह शहर को जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रही। इसकी हालत को सुधारने के लिए नहरी विभाग ने योजना तो बनाई है, मगर पैसे के कारण यह कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहा। नहर विभाग ने हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग को 40 करोड़ रुपये के एस्टिमेट बनाकर भेजे हैं। यदि यह राशि विभाग को मिल जाए तो इस नहर का पुनर्निर्माण शुरू हो जाए। बता दें कि फिलहाल शहर को 43 क्यूसेक पानी की जरूरत है। मगर फिल्हाल नहर में 25 क्यूसेक पान ही छोड़ा जा रहा है। इससे ज्यादा पानी छोड़े जाने पर नहर टूटने की आशंका बन जाती है।
अधिकारी बोले
सूचना मिलते ही कर्मचारियों को मरम्मत के लिए भेज दिया गया था। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा। नहर के नए सिरे से निर्माण की जरूरत है। जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा को एस्टिमेट बनाकर भेजा गया हैं, मगर दोनों विभाग दिलचस्पी नहीं ले रहें।
- परमजीत सिहाग, एसई, नहरी विभाग बहादुरगढ़।