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ठप पड़ी हैं ट्रैफिक लाइट, कैसे कंट्रोल होगा ट्रैफिक
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
शहर की ठप ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए इस समय पुलिस विभाग और नगर पालिका के पास कोई प्लान नहीं है। इसका उदाहरण है कि शहर की ठप पड़ी ट्रैफिक लाइटों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। बिना ट्रैफिक लाइटों के शहर में ट्रैफिक बेतरतीब सा रहता है। जिसे कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवानों को काफी जूझना पड़ता है। इसके बावजूद भी ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई रहती है। ट्रैफिक लाइटों के हालात कुछ ऐसे हैं कि कहीं तो ट्रैफिक लाइट खराब पड़ी हैं तो कहीं लाइट टूटी पड़ी हैं। वहीं कुछ जगह तो हालात ऐसे हैं कि इन पर नेताओं के ट्रैफिक लाइट होर्डिंग लग रहते हैं।
मेकेनिकों ने साढे़ तीन लाख खर्च बताया तो नपा ने पीछे खींचे कदम
शहर के ट्रैफिक को संभालने के लिए पिछले दिनों जब डीसी ने मीटिंग ली तो नपा अधिकारियों ने ट्रैफिक लाइटों को ठीक करवाने के लिए प्लानिंग बनाई थी। अधिकारियों ने मेकेनिक बुलाकर जब एस्टिमेट बनवाया तो इन पर करीब साढे़ तीन लाख रुपये की अनुमानित लागत बताई गई। इतनी लागत की सुनते ही नपा अधिकारियों ने कदम वापस खींच लिए, क्योंकि लाइटों को ठीक कराने की लागत की कीमत नई लाइटों की कीमत के करीब पहुंच रही थी।
रखरखाव के अभाव में खराब होती हैं लाइटें
ट्रैफिक लाइटों के खराब होने के पीछे मुख्य कारण रखरखाव का अभाव है। नपा अधिकारियों की मानें तो नपा केवल इंस्टाल ही करवाती है, इसके बाद रखरखाव की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को लेनी चाहिए। लेकिन इन लाइटों का रखरखाव अच्छे से नहीं किया जाता, जिसके चलते ये जल्द ही खराब हो जाती हैं। ऐसे में बार-बार नई लाइटें लगवाने का खर्च नपा को उठाना पड़ता है।
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लोग सड़क पर करते हैं गाड़ियां पार्क
बाजारों की मुख्य सड़कों पर गाड़ियां पार्क कर जाम लगवाने वाले लोगों के लिए भी पुलिस के पास कोई प्लान नहीं है। प्रशिक्षु आईपीएस शशांक कुमार सावन के पास जब झज्जर थाना का चार्ज था तो शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए उन्होंने नपा के साथ प्लानिंग की थी। लेकिन उनका ट्रेनिंग पीरियड पूरा होने के बाद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और शहर में अतिक्रमण का बुरा हाल हो गया है।
नपा करवाएगी लाइटें ठीक : दहिया
ट्रैफिक एसएचओ अशोक दहिया ने बताया कि ट्रैफिक लाइटें ठीक करवाने के लिए पिछले दिनों डीसी के साथ मीटिंग में नपा को जिम्मा सौंपा गया था। नपा जैसे ही लाइटें ठीक करवा देगा तो ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए लाइटों को चला दिया जाएगा।
एसडीएम के साथ हो चुकी है बैठक : सैनी
ट्रैफिक लाइटें ठीक करवाने में ज्यादा खर्च आ रहा है। एसडीएम रोहित यादव ने गुड़गांव से कम रेट पर इंजीनियर बुलाने की बात कही है। जैसे ही इंजीनियर आ जाएंगे तो एस्टिमेट बनवाकर लाइटें ठीक करवा दी जाएंगी। लाईटों का रखरखाव सही तरीके से नहीं हो पाता, जिसके चलते जल्दी खराब हो जाती हैं।
- नरेंद्र सैनी, नपा सचिव झज्जर।
- कहीं लाइट टूटी पड़ी हैं तो कहीं लाइट पर टंगे हैं कृषि मंत्री और अन्य के होर्डिंग
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झज्जर।
शहर की ठप ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए इस समय पुलिस विभाग और नगर पालिका के पास कोई प्लान नहीं है। इसका उदाहरण है कि शहर की ठप पड़ी ट्रैफिक लाइटों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। बिना ट्रैफिक लाइटों के शहर में ट्रैफिक बेतरतीब सा रहता है। जिसे कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवानों को काफी जूझना पड़ता है। इसके बावजूद भी ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई रहती है। ट्रैफिक लाइटों के हालात कुछ ऐसे हैं कि कहीं तो ट्रैफिक लाइट खराब पड़ी हैं तो कहीं लाइट टूटी पड़ी हैं। वहीं कुछ जगह तो हालात ऐसे हैं कि इन पर नेताओं के ट्रैफिक लाइट होर्डिंग लग रहते हैं।
मेकेनिकों ने साढे़ तीन लाख खर्च बताया तो नपा ने पीछे खींचे कदम
शहर के ट्रैफिक को संभालने के लिए पिछले दिनों जब डीसी ने मीटिंग ली तो नपा अधिकारियों ने ट्रैफिक लाइटों को ठीक करवाने के लिए प्लानिंग बनाई थी। अधिकारियों ने मेकेनिक बुलाकर जब एस्टिमेट बनवाया तो इन पर करीब साढे़ तीन लाख रुपये की अनुमानित लागत बताई गई। इतनी लागत की सुनते ही नपा अधिकारियों ने कदम वापस खींच लिए, क्योंकि लाइटों को ठीक कराने की लागत की कीमत नई लाइटों की कीमत के करीब पहुंच रही थी।
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रखरखाव के अभाव में खराब होती हैं लाइटें
ट्रैफिक लाइटों के खराब होने के पीछे मुख्य कारण रखरखाव का अभाव है। नपा अधिकारियों की मानें तो नपा केवल इंस्टाल ही करवाती है, इसके बाद रखरखाव की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को लेनी चाहिए। लेकिन इन लाइटों का रखरखाव अच्छे से नहीं किया जाता, जिसके चलते ये जल्द ही खराब हो जाती हैं। ऐसे में बार-बार नई लाइटें लगवाने का खर्च नपा को उठाना पड़ता है।
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लोग सड़क पर करते हैं गाड़ियां पार्क
बाजारों की मुख्य सड़कों पर गाड़ियां पार्क कर जाम लगवाने वाले लोगों के लिए भी पुलिस के पास कोई प्लान नहीं है। प्रशिक्षु आईपीएस शशांक कुमार सावन के पास जब झज्जर थाना का चार्ज था तो शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए उन्होंने नपा के साथ प्लानिंग की थी। लेकिन उनका ट्रेनिंग पीरियड पूरा होने के बाद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और शहर में अतिक्रमण का बुरा हाल हो गया है।
नपा करवाएगी लाइटें ठीक : दहिया
ट्रैफिक एसएचओ अशोक दहिया ने बताया कि ट्रैफिक लाइटें ठीक करवाने के लिए पिछले दिनों डीसी के साथ मीटिंग में नपा को जिम्मा सौंपा गया था। नपा जैसे ही लाइटें ठीक करवा देगा तो ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए लाइटों को चला दिया जाएगा।
एसडीएम के साथ हो चुकी है बैठक : सैनी
ट्रैफिक लाइटें ठीक करवाने में ज्यादा खर्च आ रहा है। एसडीएम रोहित यादव ने गुड़गांव से कम रेट पर इंजीनियर बुलाने की बात कही है। जैसे ही इंजीनियर आ जाएंगे तो एस्टिमेट बनवाकर लाइटें ठीक करवा दी जाएंगी। लाईटों का रखरखाव सही तरीके से नहीं हो पाता, जिसके चलते जल्दी खराब हो जाती हैं।
- नरेंद्र सैनी, नपा सचिव झज्जर।
- कहीं लाइट टूटी पड़ी हैं तो कहीं लाइट पर टंगे हैं कृषि मंत्री और अन्य के होर्डिंग