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श्रद्धालुओं ने की मां चंद्रघटा की पूजा
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:59 AM IST
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श्रद्धालुओं ने की मां चंद्रघटा की पूजा
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मंगलवार को नवरात्र पर्व पर मां चंद्रघटा देवी की पूजा की गई। मंदिरों में भक्तों ने पूजा की और मां की आरती उतारी। बालावाला मंदिर में विशेष आयोजन हुआ। बाबा सच्चनाथ ने भक्तों को आशीर्वाद दिया और प्रसाद वितरित किया। देवी ढाणी मंदिर में श्रद्धालुओं ने भी आरती की। बालावाला मंदिर में शतचंडी हवन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली।
आचार्य गौरव दीक्षित राधे-राधे महाराज ने बताया कि भगवती मां दुर्गा का तीसरा नाम चंद्रघटा है। बुधवार को मां कुष्मांडा देवी की पूजा की जाएगी। उनका वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति केवल मां कुष्मांडा में ही है। उन्होंने बताया कि देवी कुष्मांडा अष्ट भुजाओं से युक्त है। इसलिए इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। देवी अपने इन हाथों में कमंडल, धनुष, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा धारण किए है। देवी अपने भक्तों के सभी प्रकार के कष्टों, रोग, शोक का अंत करती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मंगलवार को नवरात्र पर्व पर मां चंद्रघटा देवी की पूजा की गई। मंदिरों में भक्तों ने पूजा की और मां की आरती उतारी। बालावाला मंदिर में विशेष आयोजन हुआ। बाबा सच्चनाथ ने भक्तों को आशीर्वाद दिया और प्रसाद वितरित किया। देवी ढाणी मंदिर में श्रद्धालुओं ने भी आरती की। बालावाला मंदिर में शतचंडी हवन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली।
आचार्य गौरव दीक्षित राधे-राधे महाराज ने बताया कि भगवती मां दुर्गा का तीसरा नाम चंद्रघटा है। बुधवार को मां कुष्मांडा देवी की पूजा की जाएगी। उनका वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति केवल मां कुष्मांडा में ही है। उन्होंने बताया कि देवी कुष्मांडा अष्ट भुजाओं से युक्त है। इसलिए इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। देवी अपने इन हाथों में कमंडल, धनुष, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा धारण किए है। देवी अपने भक्तों के सभी प्रकार के कष्टों, रोग, शोक का अंत करती है।
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