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हिंडोल डेरे में मेला व कुश्ती दंगल 24 को
Updated Tue, 20 Feb 2018 02:24 AM IST
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हिंडोल डेरे में मेला और कुश्ती दंगल 24 को
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
हिंडोल में परमहंस संत शिरोमणि बाबा हरिहर की याद में 24 फरवरी को मेले का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान डेरा परिसर में सत्संग व कुश्ती दंगल भी आयोजित किया जाएगा। डेरा बाबा हरिहर के महंत चमचमदास ने बताया कि सौ वर्षों से गांव हिंडोल में हर साल फाल्गुुन शुक्ल पक्ष की नवमी को मेले का आयोजन किया जाता है। बाबा हरिहर ने इसी दिन नश्वर संसार से महाप्रयाण किया था।
उन्होंने बताया कि गांव हिंडोल की बणी में करीब 150 साल पहले बाबा ने तपस्या की थी और यहीं पर उनकी छोटी सी कुटिया बनी हुई थी, जिसका अब स्वरूप बदलकर बड़े डेरे का हो चुका है। बाबा हरिहर के शरीर छोड़ने के बाद परमहंस बाबा रामदास उन्हीं का स्वरूप लेकर यहां आए। डेरा सेवक दौलतराम ने बताया कि गद्दीनशीन संत की करनी-रहनी शुरू से ही यहां विलक्षण रहती आई है और आम धार्मिक बंधनों व रीति-रिवाजों से सर्वथा अलग है। जो कि कई बार यहां आने वाले दर्शनार्थियों को आश्चर्य में डाल देती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
हिंडोल में परमहंस संत शिरोमणि बाबा हरिहर की याद में 24 फरवरी को मेले का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान डेरा परिसर में सत्संग व कुश्ती दंगल भी आयोजित किया जाएगा। डेरा बाबा हरिहर के महंत चमचमदास ने बताया कि सौ वर्षों से गांव हिंडोल में हर साल फाल्गुुन शुक्ल पक्ष की नवमी को मेले का आयोजन किया जाता है। बाबा हरिहर ने इसी दिन नश्वर संसार से महाप्रयाण किया था।
उन्होंने बताया कि गांव हिंडोल की बणी में करीब 150 साल पहले बाबा ने तपस्या की थी और यहीं पर उनकी छोटी सी कुटिया बनी हुई थी, जिसका अब स्वरूप बदलकर बड़े डेरे का हो चुका है। बाबा हरिहर के शरीर छोड़ने के बाद परमहंस बाबा रामदास उन्हीं का स्वरूप लेकर यहां आए। डेरा सेवक दौलतराम ने बताया कि गद्दीनशीन संत की करनी-रहनी शुरू से ही यहां विलक्षण रहती आई है और आम धार्मिक बंधनों व रीति-रिवाजों से सर्वथा अलग है। जो कि कई बार यहां आने वाले दर्शनार्थियों को आश्चर्य में डाल देती है।
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