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पूर्व सीएमओ की पत्नी कागजात पूरे करवाने के लिए सीएमओ कार्यालय के लगा रही चक्कर, अधिकारी नहीं ले रहे संज्ञान
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संवाद न्यूज एजेंसी
हिसार। रिटायर्ड सीएमओ की बुजुर्ग पत्नी अपने पति की मौत के बाद उनको कोरोना योद्धा साबित कराने के लिए कागजात पूरे करवाने के लिए कई दिन से सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रही है। परिजनों का कहना है कि सीएमओ से लेकर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व सीएमओ रह चुके डॉ. एसके नवल के परिजनों को काम के लिए सीएमओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं तो आमजन का क्या हाल होता होगा।
पूर्व सीएमओ डॉ. एसके नवल के बेटे सचिंद्र नवल का कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी दूसरी लहर में प्रशासन द्वारा कोरोना कामकाज में ऑक्सीजन ऑडिट संबंधित ड्यूटी लगाई गई थी।10 दिन बाद ड्यूटी के समय वह संक्रमित हो गए। 22 मई को उनको गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में दाखिल कराया, जहां पर 7 जून को उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि पहले उनकी ड्यूटी लगा दी और अब स्वास्थ्य विभाग कोरोना योद्धा मानने को तैयार नहीं है।
घोषणा के अनुसार मिलनी है बीमा राशि
कोरोना के चलते प्रधानमंत्री द्वारा कोरोना से जान गंवाने वाले स्वास्थ्य कर्मवीर यानी कोरोना वारियर्स के परिजनों को स्वास्थ्य बीमा के तौर पर 50 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दिए जाने की घोषणा की थी। इसी अनुसार डॉ. एसके नवल के परिवार को बीमा राशि मिलनी है। मगर विभाग फाइल तैयारी के प्रति गंभीर नहीं है। इससे पहले अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. गोपाल सिंघल व जिला अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड कुलदीप सिंह की कोरोना से मौत हो चुकी है।
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ऐसी कोई बात नहीं है। हमारी ओर से फाइल बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी। पूर्व सीएमओ डॉ. एसके नवल की कोरोना में जिला प्रशासन द्वारा ड्यूटी लगाई गई थी। अब बीमा कंपनी तय करेगी कि उनको बीमा राशि मिलनी है या नहीं।
- डॉ. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार
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हिसार। रिटायर्ड सीएमओ की बुजुर्ग पत्नी अपने पति की मौत के बाद उनको कोरोना योद्धा साबित कराने के लिए कागजात पूरे करवाने के लिए कई दिन से सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रही है। परिजनों का कहना है कि सीएमओ से लेकर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व सीएमओ रह चुके डॉ. एसके नवल के परिजनों को काम के लिए सीएमओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं तो आमजन का क्या हाल होता होगा।
पूर्व सीएमओ डॉ. एसके नवल के बेटे सचिंद्र नवल का कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी दूसरी लहर में प्रशासन द्वारा कोरोना कामकाज में ऑक्सीजन ऑडिट संबंधित ड्यूटी लगाई गई थी।10 दिन बाद ड्यूटी के समय वह संक्रमित हो गए। 22 मई को उनको गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में दाखिल कराया, जहां पर 7 जून को उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि पहले उनकी ड्यूटी लगा दी और अब स्वास्थ्य विभाग कोरोना योद्धा मानने को तैयार नहीं है।
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घोषणा के अनुसार मिलनी है बीमा राशि
कोरोना के चलते प्रधानमंत्री द्वारा कोरोना से जान गंवाने वाले स्वास्थ्य कर्मवीर यानी कोरोना वारियर्स के परिजनों को स्वास्थ्य बीमा के तौर पर 50 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दिए जाने की घोषणा की थी। इसी अनुसार डॉ. एसके नवल के परिवार को बीमा राशि मिलनी है। मगर विभाग फाइल तैयारी के प्रति गंभीर नहीं है। इससे पहले अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. गोपाल सिंघल व जिला अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड कुलदीप सिंह की कोरोना से मौत हो चुकी है।
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ऐसी कोई बात नहीं है। हमारी ओर से फाइल बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी। पूर्व सीएमओ डॉ. एसके नवल की कोरोना में जिला प्रशासन द्वारा ड्यूटी लगाई गई थी। अब बीमा कंपनी तय करेगी कि उनको बीमा राशि मिलनी है या नहीं।
- डॉ. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार