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Hisar News: राजस्थान व उत्तराखंड में लंपी के केस मिलने के बाद पशु अस्पतालों में बढ़ाई सतर्कता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 May 2023 12:18 AM IST
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Vigilance increased in animal hospitals after getting Lumpy cases in Rajasthan and Uttarakhand
हिसार। गोवंश के लिए जानलेवा बीमारी लंपी का असर पड़ोसी राज्य राजस्थान के अलावा उत्तराखंड में भी शुरू हो गया है। दोनों राज्यों में मिलाकर अब तक 100 से अधिक केस मिल चुके हैं। इसको देखते हुए हरियाणा में भी पशुपालन विभाग ने सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। सभी पशु अस्पतालों को बीमारी की सूचना तत्काल देने व आवश्यक इंतजाम रखने को कहा गया है। पशुपालकों के लिए भी एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है।
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पिछले साल हिसार जिले में 3000 से अधिक पशु लंपी बीमारी की चपेट में आए थे, जिनमें से 100 से अधिक पशुओं की मौत हो गई थी। अप्रैल से सितंबर तक फैली इस बीमारी के चलते पशुओं का दूध उत्पादन भी आधा रह गया था। पशुपालकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। पशुपालन विभाग ने आनन-फानन गोट पॉक्स वैक्सीन ही गाय-भैंसों को लगवा दिया था। हालांकि, लंपी बीमारी का वैक्सीन बन चुका है, लेकिन अभी उसे व्यासायिक उपयोग की अनुमति नहीं मिल पाई है।
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पशुपालकों ने बताया कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में पड़ोसी राज्य राजस्थान के कुछ हिस्सों में लंपी के केस मिले थे। इसके बाद मई के पहले सप्ताह में उत्तराखंड में भी इस बीमारी की चपेट में करीब 40 पशु आए हैं। बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजस्थान व उत्तराखंड में पशुपालन विभाग ने पशुओं की निगरानी शुरू करा दी है। इसके बाद हरियाणा में भी पशुपालन विभाग ने हिदायत जारी कर दी है।
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पिछली बार राजस्थान से फैला था संक्रमण
लंपी संक्रामक रोग है, जिसकी रोकथाम के लिए पशुओं का संचरण रोकना होता है। पिछले साल राजस्थान में फैली बीमारी वहां के पशुओं के साथ हिसार, फतेहाबाद तक आ गई थी। जुलाई-अगस्त की बारिश व उमस भरी गर्मी में यह बीमारी पशुओं के लिए महामारी बन गई थी। इसके बाद जाकर पशुपालन विभाग ने पशुओं का संचरण रोकने के लिए प्रशासन की मदद ली थी। इस बार भी कुछ वैसे ही हालात बनते नजर आ रहे हैं। राजस्थान में केस मिलना शुरू हो चुका है, लेकिन अभी पशुओं पर निगरानी नहीं की जा रही है।


बीमारी का लक्षण दिखते ही दें अस्पतालों काे सूचना
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. सुभाष जांगड़ा ने बताया कि बीमारी की गंभीरता को देखते हुए सभी अस्पतालों को सतर्क कर दिया गया है। हर जगह जरूरी दवाइयां व स्टॉफ उपलब्ध हैं। पशुपालकों से अपील की जा रही है कि पशुओं में इस बीमारी का लक्षण दिखते ही तत्काल नजदीक के पशु अस्पताल पर इसकी सूचना दें, जिससे कि उस पशु के उपचार के साथ-साथ संक्रमण रोकने के लिए अन्य उपाय भी किए जा सकें। इसके अलावा पशुपालक अपने पशुओं को पर्याप्त हरा चारा-ताजा पानी व छायादार स्थान पर रखने की व्यवस्था करें।
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