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इंजन से कटकर दो की गई जान, रेलवे प्रशासन बोला, नहीं घटी कोई घटना
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महावीर कॉलोनी के पास सोमवार रात करीब 10 बजे इंजन से कटकर दो लोगों की जान चली गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं, रेलवे प्रशासन का कहना है कि ऐसी कोई घटना नहीं घटी।
हादसे में सिकंदर व बलवान की मौत के बाद मंगलवार को नागरिक अस्पताल में दोनों के शवों का पोस्टमार्टम किया गया। जीआरपी ने परिजनों को शव सौंपकर इत्तफाकिया कार्रवाई की है। वहीं हादसे में घायल गोगी का अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और सूरज का उपचार निजी अस्पताल में चल रहा है। उधर, मृतकों के परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के दौरान इंजन की लाइट नहीं जलने व इंजन चालक द्वारा हॉर्न नहीं बजाने पर हादसा हुआ। पटरियों के पास की दीवार भी टूटी पड़ी है।
सिकंदर का देखा था रिश्ता
सिकंदर के भाई प्रवीण ने बताया कि सिकंदर का रिश्ता देखा जा रहा था। सिकंदर मजदूरी करता था। वहीं बलवंत के भाई अजय ने बताया कि बलवंत बिजली फिटिंग का काम करता था। बलवंत की दो बेटियां हैं।
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पहले भी हो चुका हादसा
उल्लेखनीय है कि ये पहला मामला नहीं है जब रेलवे की पटरियों पर हादसा हुआ। ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले पटेल नगर में एक युवक रात के समय ट्रेन की चपेट में आ गया था। उस दौरान वह शौच के लिए गया था। दीवार न होने के कारण वह पटरियों पर पहुंचा था। वहीं कुछ महीने पहले सत्यनगर में दो-तीन बच्चे खेलते समय ट्रेन की पटरियों पर आ गए थे। वहां भी दीवार न होने के कारण वह ट्रेन की चपेट में आए थे। डबल फाटक भी पूरा दिन बंद रहने के कारण लोगों को पटरियों के किनारे चलना पड़ता है। हालांकि उच्चाधिकारियों के आदेश हैं कि ट्रेन के आने पर ही फाटक बंद किया जाए, लेकिन डबल फाटक पूरा दिन बंद रहता है।
रेलवे परिसर में किसी को आने की परमिशन नहीं है। इंजन यार्ड में शंटिंग कर रहा था। नियम के अनुसार शंटिंग के दौरान इंजन की लाइट जलाने की परमिशन नहीं है। जहां तक बात बिजली के पोल बंद रहने की है, उसके बारे में बिजली निगम ही बताएगा। हादसे के बाद इंजन चालक से बात भी हुई थी। उसने कहा था कि उसके साथ एक प्वॉइंटसमैन भी था। ऐसी कोई घटना नहीं घटी। - जितेंद्र कमल, मुख्य लोको निरीक्षक, हिसार
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हादसे में सिकंदर व बलवान की मौत के बाद मंगलवार को नागरिक अस्पताल में दोनों के शवों का पोस्टमार्टम किया गया। जीआरपी ने परिजनों को शव सौंपकर इत्तफाकिया कार्रवाई की है। वहीं हादसे में घायल गोगी का अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और सूरज का उपचार निजी अस्पताल में चल रहा है। उधर, मृतकों के परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के दौरान इंजन की लाइट नहीं जलने व इंजन चालक द्वारा हॉर्न नहीं बजाने पर हादसा हुआ। पटरियों के पास की दीवार भी टूटी पड़ी है।
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सिकंदर का देखा था रिश्ता
सिकंदर के भाई प्रवीण ने बताया कि सिकंदर का रिश्ता देखा जा रहा था। सिकंदर मजदूरी करता था। वहीं बलवंत के भाई अजय ने बताया कि बलवंत बिजली फिटिंग का काम करता था। बलवंत की दो बेटियां हैं।
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पहले भी हो चुका हादसा
उल्लेखनीय है कि ये पहला मामला नहीं है जब रेलवे की पटरियों पर हादसा हुआ। ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले पटेल नगर में एक युवक रात के समय ट्रेन की चपेट में आ गया था। उस दौरान वह शौच के लिए गया था। दीवार न होने के कारण वह पटरियों पर पहुंचा था। वहीं कुछ महीने पहले सत्यनगर में दो-तीन बच्चे खेलते समय ट्रेन की पटरियों पर आ गए थे। वहां भी दीवार न होने के कारण वह ट्रेन की चपेट में आए थे। डबल फाटक भी पूरा दिन बंद रहने के कारण लोगों को पटरियों के किनारे चलना पड़ता है। हालांकि उच्चाधिकारियों के आदेश हैं कि ट्रेन के आने पर ही फाटक बंद किया जाए, लेकिन डबल फाटक पूरा दिन बंद रहता है।
रेलवे परिसर में किसी को आने की परमिशन नहीं है। इंजन यार्ड में शंटिंग कर रहा था। नियम के अनुसार शंटिंग के दौरान इंजन की लाइट जलाने की परमिशन नहीं है। जहां तक बात बिजली के पोल बंद रहने की है, उसके बारे में बिजली निगम ही बताएगा। हादसे के बाद इंजन चालक से बात भी हुई थी। उसने कहा था कि उसके साथ एक प्वॉइंटसमैन भी था। ऐसी कोई घटना नहीं घटी। - जितेंद्र कमल, मुख्य लोको निरीक्षक, हिसार