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धर्म-जाति का जहर निकालने के लिए युवाओं को अपनी सोच बदलनी होगी : प्रो. जगमोहन सिंह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:21 AM IST
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To remove the poison of religion and caste, youth will have to change their thinking: Prof. Jagmohan Singh
हिसार- अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में पहुंचे प्रो. जगमोहन ,उनके साथ निगम आयुक्त अशोक ? - फोटो : Hisar
हिसार। हमें शहीद भगत सिंह से प्रेरित होकर वैज्ञानिक सोच रखनी होगी। विज्ञान का सीधा सा मतलब जो हो रहा है उसका कारण जानना चाहिए। ऐसा करेंगे तो हमें हर एक चीज समझ आ जाएगी। जात-पात, धर्म, क्षेत्र का जहर लोगों के मन से निकालने के लिए युवाओं को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। आज देश में भगत सिंह के समय जैसे हालात हो गए हैं। सामाजिक असमानता की खाई बढ़ती जा रही है। इसलिए आज फिर से भगत सिंह जैसे सपूत की जरूरत महसूस की जा रही है। ये बातें शहीद भगत सिंह के भांजे प्रो. जगमोहन ने अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहीं।
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प्रो. जगमोहन ने भगत सिंह के जीवन से जुड़े कई अनछुए पहुलओं से अवगत कराया। उन्होंने उनके जीवन-दर्शन, विचारों, उनकी सोच के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि अगर हम युवाओं की ऊर्जा को सृजनात्मकता में नहीं लगाएंगे तो वह उसको विनाश राह पर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि भगत सिंह को अकेले में नहीं देखना चाहिए वह अपने दोस्तों, साथियों के बिना अधूरे हैं। पंजाब के खटकड़ कलां में उनकी स्मृति में बनाए म्यूजियम में तीनों की प्रतिमाएं एक साथ लगाई हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भगत सिंह तथा महात्मा गांधी की विचारधारा अलग अलग थी इसके बावजूद दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते थे। महात्मा गांधी ने वायसराय को भगत सिंह की सजा में रियायत के बारे में 23 मार्च 1931 को पत्र भी लिखा था। अंग्रेजी सरकार ने तय समय से 24 घंटे पहले 23 मार्च को ही भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फांसी दे दी थी। संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर निगम आयुक्त अशोक गर्ग व वरिष्ठ एडवोकेट पीके संधीर ने की। संचालन साहित्यकार कमलेश भारतीय ने किया।
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भगत सिंह भैंस को कहते थे मौसी
भगत सिंह बचपन में मजाक खूब करते थे। वह भैंस का दूध सीधे थन से धार लेते हुए पीते थे, जिसे हरियाणवी-पंजाबी में डोके लेना कहते हैं। भगत सिंह मजाक में कहते थे कि यह मेरी मौसी है। जब मां नहीं होती तो यह मुझे दूध पिला देती है।
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जब भगत सिंह ने मुजारे का हिसाब कर दिया था माफ...
प्रो. जगमोहन बताते हैं कि एक बार भगत सिंह के पिता ने उन्हें मुजारे का हिसाब-किताब करने के लिए लगा दिया। भगत सिंह जब हिसाब-किताब देखने लगे तो पता लगा कि मुजारे ने काफी पैसे पहले ही उधार ले लिए थे। भगत सिंह ने पूछा कि यह पैसे क्यों लिए तो मुजारे ने बताया कि मेरी पत्नी बीमार हो गई थी। इस पर भगत सिंह बोले कि जब तुम हमारे लिए काम कर रहे थे तो तुम्हारा दुुख-सुख भी हमारा था। ऐसे में तुम्हारी पत्नी पर खर्च हुआ पैसा उधार क्यों माना जाए? उन्होंने वह सारा पैसा हिसाब से काट दिया। बाद में भगत सिंह के पिता को यह बात पता लगी तो उन्होंने भी भगत सिंह के तर्क को सही मानते हुए पैसे छोड़ दिए।
अच्छी ड्राइंग करते थे, गतका के चैंपियन थे...
बेहद सरल और रोचक अंदाज में प्रो. जगमोहन ने बताया कि भगत सिंह सृजनात्मक थे। वह अच्छी ड्राइंग करते थे। गतका के चैंपियन भी थे। उन्होंने नौजवान सभा खड़ी की। वह दलील का जवाब दलील से देना चाहते थे। हर एक विषय पर पुस्तक पढ़ते थे। दूसरे लोगों को भी अच्छी पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे, साथ ही उन्हें अच्छी पुस्तकों के नाम भी सुझाते थे।
नगर निगम आयुक्त अशोक गर्ग ने कहा कि आज भी भगत सिंह के विचारों की जरूरत है। युुवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए । उनके बारे में अध्ययन करना चाहिए। उनके जीवन के तमाम पहलुओं से रूबरू होना चाहिए। आज के समय में हमें भगत सिंह प्रेरणा दे सकते हैं।
वरिष्ठ एडवोकेट पीके संधीर ने कहा अब तक हम प्रो. जगमोहन को भगत सिंह के भांजे के तौर पर ही पहचानते थे। आज उनसे रूबरू होकर भगत सिंह पर किए गए अध्ययन के बारे में जानकारी मिली तो पता लगा कि वे भगत सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कितना काम कर रहे हैं। उनका यह काम खून के रिश्ते से भी महान है। सौ साल बाद आज फिर से भगत सिंह के विचारों की जरूरत है ,जो युवाओं में लहर पैदा कर सके।

इस मौके पर रिटायर्ड प्रिंसिपल भगवान दत्त, बिजली निगम के रिटायर्ड एसई सत्यपाल शर्मा, जीजेयू से प्रो. सरोज, प्रो. मिहिर रंजन पात्र, एसडीओ राकेश मलिक, सौरभ ठकराल, अतर सिंह,छात्र देवांश, त्रिलोक बंसल, दिनेश सिवाच, नेहरू युवा केंद्र के उप निदेशक नरेंद्र यादव, जीजेयू से अजीत सिंह, रश्मि, त्रिभुवन बख्शी, एडवोकेट विक्रम मित्तल, रवि बिरला, कपूर सिंह, नीलम भारती, बनी सिंह ने अपनी सहभागिता निभाई। त्रिभुवन बख्शी ने भगत सिंह की प्रिय नज्म सरफरोशी की तमन्ना गाकर समा बांध दिया।
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