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Hisar News: 18 साल पुराने घटिया दवा मामले में तीन अधिकारियों को चार-चार साल कैद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:02 AM IST
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Three officials sentenced to four years in prison each in an 18-year-old substandard medicine case.
हिसार। दवा की गुणवत्ता से जुड़े करीब 18 साल पुराने मामले में अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने शुक्रवार को गुजरात की लिंकन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के तीन अधिकारियों मुकेश जी. पटेल, निलेश पटेल और महेशभाई एम. पटेल को चार-चार साल कैद की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 40 हजार रुपये और कंपनी पर भी 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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मामला 12 नवंबर 2007 का है। उस समय हिसार के मिल गेट स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी नंबर-1 के केंद्रीय भंडार से 10 प्रकार की दवाओं के नमूने लिए गए थे। इनमें कंपनी की एबिटोल टैबलेट (बैच नंबर टी-7514) भी शामिल थी।
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सरकारी प्रयोगशाला की जांच में प्रति टैबलेट साइप्रोहेप्टाडीन हाइड्रोक्लोराइड साल्ट की मात्रा निर्धारित 4 एमजी के बजाय 3 एमजी मिली। यानी घोषित मात्रा से 25 प्रतिशत कम साल्ट पाया गया। इसके बाद औषधि नियंत्रण विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी कर अभियोजन की कार्रवाई शुरू की।
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सात गवाहों के बयान दर्ज

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। इनमें औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारी, ईएसआई डिस्पेंसरी के फार्मासिस्ट जितेंद्र कुमार और तत्कालीन चिकित्सक डॉॅ. नीलिमा शामिल थे। दवा के निर्माण, उत्पादन और गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए।

दो धाराओं में सजा, कैद साथ-साथ चलेगी

अदालत ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 27(ए) के तहत प्रत्येक दोषी को चार साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 27(डी) के तहत एक साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए प्रभावी कैद चार साल रहेगी। जुर्माना नहीं भरने पर आदेशानुसार अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माना जमा कर दिया गया है। दोषियों की पहले से हिरासत में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित किया जाएगा।

बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों का दिया हवाला

सजा पर सुनवाई के दौरान तीनों दोषियों ने उम्र, बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर राहत मांगी। महेशभाई एम. पटेल ने हृदय रोग सहित कई बीमारियों से पीड़ित होने और मई 2026 में हृदय संबंधी प्रक्रिया कराए जाने की बात कही। अभियोजन पक्ष ने सजा में नरमी नहीं बरतने की दलील दी। अदालत ने अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई।


दो आरोपी पहले ही घोषित हो चुके हैं भगोड़े

मामले के दो अन्य आरोपी विशाल सी. पटेल और कौशल पटेल को क्रमशः 2 सितंबर 2015 और 28 मार्च 2018 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अदालत ने निर्देश दिया कि उनकी गिरफ्तारी होने पर मामले की फाइल दोबारा मंगवाई जाए।
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