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Hisar News: खेतों की सेहत बचाने की पहल...प्रोत्साहन राशि और जागरूकता पर जोर
Sat, 10 Oct 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:51 AM IST
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हांसी। धान की पराली जलाने पर रोक लगाने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए शुक्रवार को जिला सचिवालय के वीसी सभागार में अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला नगर आयुक्त लक्षित सरीन की अध्यक्षता में बैठक हुई।
उन्होंने बताया कि पराली न जलाने वाले पात्र किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये की राशि देने की व्यवस्था है। उन्होंने अधिकारियों, सरपंचों और ग्राम सचिवों को गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
सरीन ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और भूमि की उर्वरता व फसल उत्पादकता प्रभावित होती है। धुएं से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने किसानों से कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों से पराली का प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने योजना की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
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अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित कृषि अभिलेखों में भी नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। पंचायत प्रतिनिधियों को किसानों से संवाद करने और घटनाओं की रोकथाम में सहयोग देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एसडीएम राजेश खोथ, नारनौंद के एसडीएम विकास यादव, डीडीपीओ संदीप भारद्वाज, एसडीओ डॉ. रविंद्र, एएलएई डॉ. सांगवान, बीडीपीओ अशोक मेहरा, राजसिंह सहित विभिन्न गांवों के सरपंच और ग्राम सचिव मौजूद रहे। किसान पराली प्रबंधन संबंधी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1663 पर संपर्क कर सकते हैं।
एक्स-सीटू और इन-सीटू तरीके अपनाएं
बैठक में बताया गया कि एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत डंडलर या बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर उसका उपयोग गोशालाओं, कंपोस्ट इकाइयों और अन्य कार्यों में किया जा सकता है। इन-सीटू प्रबंधन के तहत सुपर सीडर से पराली के बीच गेहूं की बिजाई की जा सकती है। स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम युक्त कंबाइन हार्वेस्टर से भी फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन संभव है। पराली को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है।
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उन्होंने बताया कि पराली न जलाने वाले पात्र किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये की राशि देने की व्यवस्था है। उन्होंने अधिकारियों, सरपंचों और ग्राम सचिवों को गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
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सरीन ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और भूमि की उर्वरता व फसल उत्पादकता प्रभावित होती है। धुएं से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने किसानों से कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों से पराली का प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने योजना की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
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अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित कृषि अभिलेखों में भी नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। पंचायत प्रतिनिधियों को किसानों से संवाद करने और घटनाओं की रोकथाम में सहयोग देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एसडीएम राजेश खोथ, नारनौंद के एसडीएम विकास यादव, डीडीपीओ संदीप भारद्वाज, एसडीओ डॉ. रविंद्र, एएलएई डॉ. सांगवान, बीडीपीओ अशोक मेहरा, राजसिंह सहित विभिन्न गांवों के सरपंच और ग्राम सचिव मौजूद रहे। किसान पराली प्रबंधन संबंधी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1663 पर संपर्क कर सकते हैं।
एक्स-सीटू और इन-सीटू तरीके अपनाएं
बैठक में बताया गया कि एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत डंडलर या बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर उसका उपयोग गोशालाओं, कंपोस्ट इकाइयों और अन्य कार्यों में किया जा सकता है। इन-सीटू प्रबंधन के तहत सुपर सीडर से पराली के बीच गेहूं की बिजाई की जा सकती है। स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम युक्त कंबाइन हार्वेस्टर से भी फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन संभव है। पराली को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है।