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पहले हीरा अब मोती किया दान
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Feb 2016 02:11 AM IST
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हिसार। केंद्रीय भैंस अनुसंधान में आयोजित भैंस मेला एवं प्रदर्शनी में आए दिल्ली के ढिचाऊ कलां के पशुपालक ओमप्रकाश ने तीन करोड़ रुपये का झोटा दान कर दिया। गांव चौधरीवास (हिसार) की पंचायत को मोती नाम का झोटा देते हुए ओमप्रकाश भावुक हो उठे।
दिल्ली के ढिचाऊ निवासी ओमप्रकाश मुर्राह नस्ल की भैंस व झोटे पालने के शौकीन हैं। मुर्राह नस्ल की भैंस रानी के पैदा हुए दो कटड़ों को अपने बच्चों की तरह से पाला। इन झोटों को हीरा-मोती नाम दिया। दोनों की तीन-तीन करोड़ रुपये कीमत आंकी गई थी। ओमप्रकाश ने अपने झोटे बेचने से इनकार कर दिया था। पिछले वर्ष उन्होंने झज्जर के गांव डाबोदा को हीरा नाम का झोटा दान दिया था।
इस बार उन्होंने अपना तीन करोड़ी झोटा मोती चौधरीवास की पंचायत को दान कर दिया। सीआईआरबी के अधिकारियों की मौजूदगी में मंच के सामने ले जाकर गांव चौधरीवास के सरपंच को झोटा दिया गया। अपने मोती को विदा करने से पहले उन्होंने उसके माथे पर चूमा और उसका एक दिन का खर्च 2000 रुपये भी पंचायत को दिए। चौधरीवास के सरपंच ने आश्वासन दिया दान किए गए मोती का गांव की पंचायत अपने बेटे की तरह ख्याल रखेगी।
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बेटे की तरह पालते हैं पशु : ओमप्रकाश ने कहा कि वह पत्नी सरोज के साथ मिलकर पशुओं को अपने बेटे की तरह पालते हैं। हीरा-मोती की मां रानी की मौत पर काज किया था। झोटों को पालकर दान देने की उनकी पुश्तैनी परंपरा रही है। किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे झोटों को बेचने की बजाय पंचायतों को दान कर दें ताकि अच्छी नस्लें तैयार की जा सकें।
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दिल्ली के ढिचाऊ निवासी ओमप्रकाश मुर्राह नस्ल की भैंस व झोटे पालने के शौकीन हैं। मुर्राह नस्ल की भैंस रानी के पैदा हुए दो कटड़ों को अपने बच्चों की तरह से पाला। इन झोटों को हीरा-मोती नाम दिया। दोनों की तीन-तीन करोड़ रुपये कीमत आंकी गई थी। ओमप्रकाश ने अपने झोटे बेचने से इनकार कर दिया था। पिछले वर्ष उन्होंने झज्जर के गांव डाबोदा को हीरा नाम का झोटा दान दिया था।
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इस बार उन्होंने अपना तीन करोड़ी झोटा मोती चौधरीवास की पंचायत को दान कर दिया। सीआईआरबी के अधिकारियों की मौजूदगी में मंच के सामने ले जाकर गांव चौधरीवास के सरपंच को झोटा दिया गया। अपने मोती को विदा करने से पहले उन्होंने उसके माथे पर चूमा और उसका एक दिन का खर्च 2000 रुपये भी पंचायत को दिए। चौधरीवास के सरपंच ने आश्वासन दिया दान किए गए मोती का गांव की पंचायत अपने बेटे की तरह ख्याल रखेगी।
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बेटे की तरह पालते हैं पशु : ओमप्रकाश ने कहा कि वह पत्नी सरोज के साथ मिलकर पशुओं को अपने बेटे की तरह पालते हैं। हीरा-मोती की मां रानी की मौत पर काज किया था। झोटों को पालकर दान देने की उनकी पुश्तैनी परंपरा रही है। किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे झोटों को बेचने की बजाय पंचायतों को दान कर दें ताकि अच्छी नस्लें तैयार की जा सकें।