{"_id":"6a9324612b09305db5034b8e","slug":"officials-visited-the-fields-to-assess-the-challenges-associated-with-the-digital-crop-survey-hisar-news-c-21-hsr1020-940939-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: खेतों में उतरकर अधिकारियों ने परखी डिजिटल क्रॉप सर्वे की दिक्कतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: खेतों में उतरकर अधिकारियों ने परखी डिजिटल क्रॉप सर्वे की दिक्कतें
विज्ञापन
हिसार के तहसीलदार मुकेश अपने साथ पटवारियों को लेकर फील्ड सर्वे रिपोर्ट लेते हुए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) के कार्य में आ रही दिक्कतों का पता लगाने के लिए शनिवार को जिला राजस्व अधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार पटवारियों को साथ लेकर खेतों में पहुंचे। अधिकारियों ने दो दिन में हर तहसील के चार-चार गांवों में फील्ड सर्वे किया। इस दौरान छह तरह की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं सामने आईं। अधिकारियों ने इनका ब्योरा तैयार कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है।
पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह ने बताया कि जिला राजस्व अधिकारी श्यामलाल के नेतृत्व में डीसीएस को लेकर जिले में विस्तृत फीडबैक लिया गया। शुक्रवार को हर तहसील के दो-दो गांवों में सर्वे किया गया था, जबकि शनिवार को भी दो-दो गांवों में फील्ड फीडबैक लिया गया।
आदमपुर तहसील के कोहली, कालीरावण, सदलपुर और खारा बरवाला, बालसमंद तहसील के भिवानी रोहिल्ला तथा हिसार तहसील के मंगाली और सिंघरान में सर्वे किया गया। अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को साक्ष्यों के साथ दर्ज करते हुए रिपोर्ट तैयार की है। प्रीतम सिंह ने कहा कि फीडबैक के आधार पर क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने की जरूरत है।
विज्ञापन
जिलों में जीआईएस लैब और डीआईटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के साथ पर्याप्त हार्डवेयर उपलब्ध कराया जाए। पटवारियों को डिजिटल कार्य में सुविधा देने के लिए स्थानीय स्तर पर तत्काल डिजिटल सहायता उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि खेत की केवल एक तस्वीर पर्याप्त होनी चाहिए और तीन अलग-अलग तस्वीरें लेना अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। सेटेलाइट क्रॉप सर्वे पहले से डीसीएस का हिस्सा है और उसका डाटा उपलब्ध है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर किसानों की ओर से दी गई जानकारी का इससे मिलान किया जा सकता है। डीसीएस केवल उन खेतों में किया जाए, जहां सेटेलाइट क्रॉप सर्वे के डाटा और एमएफएमबी की प्रविष्टि में मिसमैच नहीं है।
-- -- -- --
यह दिक्कतें आ रही सामने..
1 इस समय तेज धूप के चलते दोपहर में मोबाइल गर्म होकर बंद हो रहा है।
2 खेत के किनारे से मोबाइल पर खसरा नंबर की लोकेशन नहीं आ रही।
3 बाजरा, ज्वार, गन्ना और कपास जैसी लंबी फसलों में फसल के बीच जाकर फोटो खींचना संभव नहीं है।
4 खेत में पानी भरा होने या तार लगी होने की स्थिति में अंदर जाने में दिक्कत होती है।
5 खेतों में मोबाइल नेटवर्क और जीपीएस लोकेशन को लेकर परेशानी आ रही है।
6 एप पर प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लग रहा है। एक घंटे में केवल दो से तीन एकड़ का सर्वे हो पा रहा है।
-- --
आदमपुर, हिसार, बालसमंद, बरवाला और उकलाना तहसीलों में अधिकारियों ने खेतों में जाकर डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य किया है। आदमपुर के तहसीलदार रामनिवास भादु, हिसार के तहसीलदार मुकेश कुमार, नायब तहसीलदार राकेश, बरवाला के नायब तहसीलदार रवींद्र शर्मा और उकलाना के नायब तहसीलदार राकेश ने भी खेतों में जाकर सर्वे किया। बालसमंद में मैंने और नायब तहसीलदार धर्मसिंह ने फीडबैक लिया। कुछ तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस बारे में रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
- श्यामलाल, जिला राजस्व अधिकारी, हिसार।
विज्ञापन
पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह ने बताया कि जिला राजस्व अधिकारी श्यामलाल के नेतृत्व में डीसीएस को लेकर जिले में विस्तृत फीडबैक लिया गया। शुक्रवार को हर तहसील के दो-दो गांवों में सर्वे किया गया था, जबकि शनिवार को भी दो-दो गांवों में फील्ड फीडबैक लिया गया।
विज्ञापन
आदमपुर तहसील के कोहली, कालीरावण, सदलपुर और खारा बरवाला, बालसमंद तहसील के भिवानी रोहिल्ला तथा हिसार तहसील के मंगाली और सिंघरान में सर्वे किया गया। अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को साक्ष्यों के साथ दर्ज करते हुए रिपोर्ट तैयार की है। प्रीतम सिंह ने कहा कि फीडबैक के आधार पर क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने की जरूरत है।
विज्ञापन
जिलों में जीआईएस लैब और डीआईटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के साथ पर्याप्त हार्डवेयर उपलब्ध कराया जाए। पटवारियों को डिजिटल कार्य में सुविधा देने के लिए स्थानीय स्तर पर तत्काल डिजिटल सहायता उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि खेत की केवल एक तस्वीर पर्याप्त होनी चाहिए और तीन अलग-अलग तस्वीरें लेना अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। सेटेलाइट क्रॉप सर्वे पहले से डीसीएस का हिस्सा है और उसका डाटा उपलब्ध है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर किसानों की ओर से दी गई जानकारी का इससे मिलान किया जा सकता है। डीसीएस केवल उन खेतों में किया जाए, जहां सेटेलाइट क्रॉप सर्वे के डाटा और एमएफएमबी की प्रविष्टि में मिसमैच नहीं है।
यह दिक्कतें आ रही सामने..
1 इस समय तेज धूप के चलते दोपहर में मोबाइल गर्म होकर बंद हो रहा है।
2 खेत के किनारे से मोबाइल पर खसरा नंबर की लोकेशन नहीं आ रही।
3 बाजरा, ज्वार, गन्ना और कपास जैसी लंबी फसलों में फसल के बीच जाकर फोटो खींचना संभव नहीं है।
4 खेत में पानी भरा होने या तार लगी होने की स्थिति में अंदर जाने में दिक्कत होती है।
5 खेतों में मोबाइल नेटवर्क और जीपीएस लोकेशन को लेकर परेशानी आ रही है।
6 एप पर प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लग रहा है। एक घंटे में केवल दो से तीन एकड़ का सर्वे हो पा रहा है।
आदमपुर, हिसार, बालसमंद, बरवाला और उकलाना तहसीलों में अधिकारियों ने खेतों में जाकर डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य किया है। आदमपुर के तहसीलदार रामनिवास भादु, हिसार के तहसीलदार मुकेश कुमार, नायब तहसीलदार राकेश, बरवाला के नायब तहसीलदार रवींद्र शर्मा और उकलाना के नायब तहसीलदार राकेश ने भी खेतों में जाकर सर्वे किया। बालसमंद में मैंने और नायब तहसीलदार धर्मसिंह ने फीडबैक लिया। कुछ तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस बारे में रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
- श्यामलाल, जिला राजस्व अधिकारी, हिसार।