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Hisar News: मासूम की उखड़ती सांसों को बचाने के लिए रात भर हाथ से एंबू बैग से ऑक्सीजन देते रहे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 01:23 AM IST
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They spent the entire night manually administering oxygen using an Ambu bag to save the innocent child's failing breath.
पत्नी पूजा व परिजनों के साथ जिला नागरिक अस्पताल पहुंचा राकेश।
हिसार। एक दिन के नवजात की उखड़ती सांसों को बचाने के लिए उसके माता-पिता रात भर जूझते रहे। पीजीआई रोहतक में वेंटिलेटर नहीं मिलने पर दंपती के पैरों तले जमीन खिसक गई। मां का यह सोचकर कलेजा बैठा जा रहा था कि सुबह तक इंतजार करते-करते कहीं बेटे की जिंदगी न चली जाए। उन्होंने पीजीआई स्टाफ से बार-बार मिन्नत की तो हाथ से संचालित ऑक्सिजन पंप (एंबू बैग) दे दिया।
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राकेश ने बताया कि वे रात भर बच्चे को एंबू बैग से ऑक्सीजन देते रहे ताकि उनका बच्चा इस दुनिया को देख सके पर नियति को कुछ और मंजूर था। सुबह भी वेंटिलेटर नहीं मिला तो वे वापस हिसार रवाना हुए। आरोप है कि हिसार आने के लिए सरकारी एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं करवाई गई। उन्हें निजी एंबुलेंस से आना पड़ा। राकेश ने सीएमओ को शिकायत देकर जांच करवाने और दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि चिकित्सकों ने बिना पुष्टि किए ही बच्चे को रोहतक रेफर कर दिया जबकि वहां वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं था। सीएमओ ने आश्वासन दिया कि इस मामले में टीम गठित कर सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसमें कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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10 साल से एक ही वेंटिलेटर के सहारे चल रहा नीकू वार्ड

वेंटिलेटर के अभाव में नवजात की मौत के मामले ने एक बार फिर जिला नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सच्चाई यह है कि पिछले 10 वर्षों से नीकू वार्ड केवल एक ही वेंटिलेटर के भरोसे चल रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ जाती है तो उन्हें अग्रोहा या रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में हिसार जैसे मेडिकल हब में जिला नागरिक अस्पताल एक रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। दस वर्ष पहले जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन की औसत ओपीडी 600 के आसपास रहती थी जो अब बढ़कर करीब दो हजार तक पहुंच गई है। इस मुकाबले संसाधनों में इजाफा नहीं हुआ।
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20 वेंटिलेटर कमरे में पड़े धूल फांक रहे

करीब 20 वेंटिलेटर अस्पताल के एक कमरे में धूल फांक रहे हैं। अस्पताल प्रशासन इनका इस्तेमाल नहीं कर रहा है। ये वेंटिलेटर कोरोना काल में अस्पताल को मिले थे। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इन वेंटिलेटर की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इनमें से कई खराब हैं।

ये सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं
जिला नागरिक अस्पताल में एमआरआई की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। मरीजों को इसके लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। नागरिक अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर भी नहीं है जिस वजह से गंभीर मरीजों को अग्रोहा या रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है।


दो और वेंटिलेटर की मांग भेज रखी है
नीकू वार्ड में एक ही वेंटिलेटर है। दो और वेंटिलेटर की मांग मुख्यालय भेज रखी है। अब तक नहीं मिली है। ऐसे में दोबारा पत्र लिखा जाएगा। - डॉ. रीना जैन, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल
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