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Hisar News: कमरे में पंखा था न रोशनदान, दम घुटने से हुई पिता की मौत
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हिसार मंगाली चौकी में मृतक संजय की बहन बिलखते हुए।
हिसार। गांव मंगाली की चौकी में पुलिस हिरासत में संजय की मौत के बाद ग्रामीणों ने बुधवार दोपहर करीब एक से दो बजे तक गेट पर ताला लगा दिया। मृतक के बेटे अमित का आरोप है कि जिस कमरे में उसके पिता संजय को बंद किया उसमें कोई रोशनदान नहीं है। कमरे में पंखा भी नहीं था। उनके पिता की मौत गर्मी में दम घुटने के कारण हुई है। पुलिस ने उन्हें पीने के लिए पानी तक नहीं रखा था।
मृतक की पत्नी सुमित्रा ने बताया कि सुबह 8 बजे पुलिसकर्मी गाड़ी में घर आए। उन्होंने बताया कि संजय की तबीयत बिगड़ गई है। चौकी में चलो। हमने चौकी में जाकर देखा तो पति संजय मृत हालत में था।
परिजनों का कहना था कि पुलिस कर्मचारियों की लापरवाही से संजय की मौत हुई है। मृतक संजय के बेटे अमित ने कहा कि रात को पुलिस कर्मी पिता संजय को लेकर गए थे। तब वह स्वस्थ थे। हमें बुधवार को सुबह पता चला कि पिता की चौकी में मौत हो गई है। मैं चौकी में गया तो देखा कि पिता मृत हालत में हैं। वहां मौजूद पुलिस कर्मचारी एक कागज पर मेरे साइन करवाना चाहते थे। तब मैंने मना कर दिया।
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परिजनों व ग्रामीणों ने चौकी में करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। गेट पर ताला लगाकर धरना देकर बैठ गए। पुलिस अधिकारियों व रविदास सभा के प्रधान एसपी चालिया के समझाने पर ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया। इस मौके पर डीएसपी कमलजीत, डीएसपी श्रद्धा सिंह, आजाद नगर थाना प्रभारी दलबीर पूनिया, अग्रोहा थाना प्रभारी रिसाल सिंह, मंगाली के सरपंच जोगिंद्र सिंह, गुरु रविदास सभा के प्रधान एसपी चालिया मौजूद थे।
रात को ही कराया अंतिम संस्कार
चिकित्सकों के बोर्ड ने किया संजय के शव का पोस्टमार्टम किया। अब विसरा जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा। परिजन बुधवार शाम करीब सात बजे शव लेकर गांव की ओर रवाना हुए। रात करीब 9 बजे गांव के श्मशान घाट में परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस कर्मी व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
एडवोकेट रजत कल्सन ने उठाए सवाल
नेशनल एलायंस फॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कल्सन ने कहा कि गणेश की मौत का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि बुधवार को मंगाली पुलिस चौकी में अनुसूचित वर्ग के व्यक्ति की मौत हो गई। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस की हिरासत में केवल अनुसूचित जाति से संबंधित लोगों की मौतें क्यों होती हैं? उन्हें ही अमानवीय तरीके से टॉर्चर क्यों किया जाता है? इस मामले में तुरंत मंगाली पुलिस चौकी के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाए।
मेडिकल क्यों नहीं कराया....
सीनियर एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के नए नियमों के तहत अब पुलिस किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लिया तो तो उसका मेडिकल क्यों नहीं कराया। बिना नोटिस दिए कस्टडी में नहीं रख सकती। अगर किसी को हिरासत में लेना है, तो उसके लिए पहले से सूचना देना जरूरी है या फिर पुलिस रिकॉर्ड में इसकी एंट्री करनी होती है। अगर थाना पुलिस उससे पूछताछ के लिए रोकती है तो उसके लिए भी तय प्रक्रिया और नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है। कई मामले में निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।
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मृतक की पत्नी सुमित्रा ने बताया कि सुबह 8 बजे पुलिसकर्मी गाड़ी में घर आए। उन्होंने बताया कि संजय की तबीयत बिगड़ गई है। चौकी में चलो। हमने चौकी में जाकर देखा तो पति संजय मृत हालत में था।
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परिजनों का कहना था कि पुलिस कर्मचारियों की लापरवाही से संजय की मौत हुई है। मृतक संजय के बेटे अमित ने कहा कि रात को पुलिस कर्मी पिता संजय को लेकर गए थे। तब वह स्वस्थ थे। हमें बुधवार को सुबह पता चला कि पिता की चौकी में मौत हो गई है। मैं चौकी में गया तो देखा कि पिता मृत हालत में हैं। वहां मौजूद पुलिस कर्मचारी एक कागज पर मेरे साइन करवाना चाहते थे। तब मैंने मना कर दिया।
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परिजनों व ग्रामीणों ने चौकी में करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। गेट पर ताला लगाकर धरना देकर बैठ गए। पुलिस अधिकारियों व रविदास सभा के प्रधान एसपी चालिया के समझाने पर ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया। इस मौके पर डीएसपी कमलजीत, डीएसपी श्रद्धा सिंह, आजाद नगर थाना प्रभारी दलबीर पूनिया, अग्रोहा थाना प्रभारी रिसाल सिंह, मंगाली के सरपंच जोगिंद्र सिंह, गुरु रविदास सभा के प्रधान एसपी चालिया मौजूद थे।
रात को ही कराया अंतिम संस्कार
चिकित्सकों के बोर्ड ने किया संजय के शव का पोस्टमार्टम किया। अब विसरा जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा। परिजन बुधवार शाम करीब सात बजे शव लेकर गांव की ओर रवाना हुए। रात करीब 9 बजे गांव के श्मशान घाट में परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस कर्मी व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
एडवोकेट रजत कल्सन ने उठाए सवाल
नेशनल एलायंस फॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कल्सन ने कहा कि गणेश की मौत का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि बुधवार को मंगाली पुलिस चौकी में अनुसूचित वर्ग के व्यक्ति की मौत हो गई। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस की हिरासत में केवल अनुसूचित जाति से संबंधित लोगों की मौतें क्यों होती हैं? उन्हें ही अमानवीय तरीके से टॉर्चर क्यों किया जाता है? इस मामले में तुरंत मंगाली पुलिस चौकी के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाए।
मेडिकल क्यों नहीं कराया....
सीनियर एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के नए नियमों के तहत अब पुलिस किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लिया तो तो उसका मेडिकल क्यों नहीं कराया। बिना नोटिस दिए कस्टडी में नहीं रख सकती। अगर किसी को हिरासत में लेना है, तो उसके लिए पहले से सूचना देना जरूरी है या फिर पुलिस रिकॉर्ड में इसकी एंट्री करनी होती है। अगर थाना पुलिस उससे पूछताछ के लिए रोकती है तो उसके लिए भी तय प्रक्रिया और नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है। कई मामले में निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।