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Hisar News: एयरपोर्ट की सुरक्षा में सुराख...परिसर में घूम रहे वन्य जीव, चहारदीवारी भी अधूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Apr 2025 12:51 AM IST
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There is a loophole in the security of the airport...wild animals are roaming in the premises, the boundary wall is also incomplete
एयरपोर्ट की चहारदीवारी के नीचे बना सुराख।  संवाद 
अमित भारद्वाज
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हिसार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट पहुंचेंगे। उनके दौरे में महज 11 दिन शेष हैं, लेकिन एयरपोर्ट परिसर में वन्य जीव घूम रहे हैं जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
इसके अलावा एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए बनाई गई चहारदीवारी भी अधूरी पड़ी है। उधर, उड़ान सेवा के लिए अभी तक न तो फ्लाइट का शेड्यूल तैयार किया गया है और न ही किराया फाइनल किया जा सका है।
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बता दें कि 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट से उड़ान सेवा शुरू करने के साथ ही नए टर्मिनल का शिलान्यास भी करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री यहां एक रैली को भी संबोधित करेंगे। 7200 एकड़ में फैले एयरपोर्ट परिसर से वन्य जीवों को पकड़ने के लिए वन्य जीव प्राणी विभाग की जिम्मदारी लगाई गई थी। मगर विभाग सिर्फ 2 से 3 नीलगाय ही पकड़ सका और फिर उसने अपने हाथ खड़े कर दिए।
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अधिकारी बोले, इतने बड़े एरिया से वह वन्य जीव नहीं पकड़ सकते। इस कार्य के लिए जिन संसाधनों की जरूरत होती है, वे संसाधन उनके पास नहीं हैं। यह कार्य किसी निजी एजेंसी से करवाया जाए। अगर उन्हें बजट उपलब्ध करवा दिया जाता है तो वह एयरपोर्ट परिसर से जंगली जानवरों को बाहर निकलवा देंगे। विभाग ने इस कार्य के लिए करीब 6 लाख रुपये बजट की मांग की है।
विभाग की मानें तो इस कार्य पर प्रतिदिन 50 से 60 हजार रुपये खर्च होंगे। विभाग के मुताबिक वह इस कार्य के लिए बावरिया समाज की मदद भी ले सकते हैं। विभाग के अनुसार एयरपोर्ट परिसर में नील गाय, जंगली सूअर, गीदड़ व कुत्ते मौजूद हैं। ये वन्य जीव न सिर्फ उड़ान सेवा में बाधा के साथ हादसे का कारण बन सकते हैं।
एयरपोर्ट की चहारदीवारी के नीचे से एयरपोर्ट में घुस रहे वन्य जीव

उधर एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर बनाई गई चहारदीवारी भी इन वन्य जीवों को एयरपोर्ट परिसर में घुसने से नहीं रोक पा रही है। ये वन्य जीव चहारदीवारी के नीचे मिट्टी खोदकर आसानी से परिसर में घुस रहे हैं। जब एयरपोर्ट अथॉरिटी को इस खामी का पता चला तो उसने तुरंत इस पर संज्ञान लिया। अब चहारदीवारी के नीचे ईंट लगाकर उस जगह को भरा जा रहा है ताकि वन्य जीव यहां से एयरपोर्ट परिसर में न घुस सकें। चूंकि यह चहारदीवारी करीब 14 किलोमीटर लंबी है तो ऐसे में इस कार्य को पूरा करने में कम से कम दो से तीन माह का समय लगेगा।

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न तो किराया तय हुआ न ही फ्लाइट शेड्यूल

एयरपोर्ट से उड़ान को लेकर अभी तक न तो किराया तय हुआ है और न ही फ्लाइट शेड्यूल फाइनल हुआ है। ऐसे में अभी तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि फ्लाइट की बुकिंग कैसे होगी और कितना किराया होगा। हालांकि प्रदेश सरकार की तरफ से प्रस्ताव तैयार किया गया है कि यहां से शुरू होने वाली उड़ान सेवाएं वीजीएफ (वायबल गैप फंडिंग) आधारित होंगी, जिससे यात्रियों को ज्यादा किराया नहीं देना पड़ेगा। फिलहाल हिसार से पहले चरण में अयोध्या, जम्मू, जयपुर, दिल्ली, अहमदाबाद व चंडीगढ़ के लिए हवाई सेवाएं शुरू की जाएंगी। बाद में नए रूट का विस्तार किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री की रैली की तैयारियां शुरू

उधर, एयरपोर्ट की पार्किंग में होने वाली प्रधानमंत्री की रैली को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। रैली स्थल की सफाई करवाई जा चुकी है। अब वहां पंडाल का सामान पहुंचना शुरू हो गया है। यहां पंडाल तैयार करने वालों के बैठने के लिए कुछ केबिन भी बनाए गए हैं। 12 अप्रैल तक रैली का पंडाल बनकर तैयार हो जाएगा और सुरक्षा एजेंसियां इसे अपने घेरे में ले लेंगी।




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चहारदीवारी के नीचे खाली पड़ी जगह में चिनाई जारी : एसई

बीएंडआर के अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि चहारदीवारी के निर्माण पर 20.56 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें प्रत्येक पोस्ट के नीचे दो पाइलों का सेट (हर पाइल की गहराई 3 मीटर) और एक पाइल कैप (300 मिमी मोटाई) शामिल है। इसके ऊपर 125 मिमी मोटाई के दो पैनल रखे गए हैं, जिनकी लंबाई 4.200 मीटर और चौड़ाई 1.50 मीटर है। यह कार्य पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ के वैध डिजाइनों के अनुसार किया गया है। भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) ने इस कार्य की जांच और सत्यापन भी किया है। डीजीसीए की तरफ से हर मापदंड पर जांच उपरांत खरा उतरने पर ही 13 मार्च को संचालन के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया। यहां जीएलएफ की जमीन होने और रिजर्व फॉरेस्ट के निकट होने के कारण चहारदीवारी के नीचे से जंगली जानवरों का आना-जाना सामान्य है, जिन्हें रोकने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार चहारदीवारी के नीचे खाली पड़ी जगह में दो फीट की ऊंचाई में चिनाई की जा रही है। जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा कर दिया जाएगा।
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