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आठवीं की परीक्षा चिंतन का विषय, बचपन पर हावी तनाव और बोझ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 12:36 AM IST
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The subject of contemplation of the eighth examination, the stress and burden dominating the childhood
हिसार। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से सीबीएसई के स्कूलों की आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा लेने के फैसले के बाद विद्यार्थी तनाव में हैं। नागरिक अस्पताल में रोजाना 2 से 3 अभिभावक फोन पर मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श ले रहे हैं। मनो चिकित्सकों का कहना है कि अचानक से पैटर्न बदल जाने के कारण विद्यार्थियों के सामने इस तरह की स्थिति पैदा हो रही है। कोरोना के कारण विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाएं लगा रहे हैं। ऐसे में सीबीएसई के विद्यार्थियों पर हरियाणा बोर्ड की ओर से परीक्षा लेने का फैसला मानसिक दबाव बना रहा है।
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केस 1
जब से बेटे को पता चला है कि आठवीं की परीक्षा बोर्ड से होगी, तब से उसे बेचैनी हो रही है। बच्चा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रहा है। बार-बार पूछ रहा है क्या होगा, कैसे पेपर होंगे। हम समझा रहे हैं कि जितना पढ़ा जाए उतना आराम से पढ़ो। समझाने पर वह एक बार पढ़ने तो बैठ जाता है लेकिन उस समय भी उसके दिमाग में सवाल चलते रहते हैं। अगर शुरू से ही ऐसा होता तो परेशानी नहीं होती। हम मनोरोग विशेषज्ञ से सलाह ले रहे हैं कि बच्चे को कैसे इस तरह की परेशान से बाहर निकालें। - अशोक कुमार, नवदीप कॉलोनी, हिसार
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केस 2
विद्यार्थी ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे, उनके दिमाग में काफी सारे सवाल उठ रहे हैं। विद्यार्थी डिप्रेशन में जा रहे हैं। अभी तक तो हमें खुद समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। किस तरह से बच्चों को पढ़ाने में ध्यान लगाने के लिए प्रेरित करें। बच्चों ने सीबीएसई का पाठयक्रम पढ़ा है तो हरियाणा बोर्ड की परीक्षा कैसे देंगे। बच्चों का तनाव में आना स्वभाविक है। - रमेश कुमार, लितानी
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केस 3
कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई अच्छे से नहीं हो पा रही। अब अचानक से आठवीं की परीक्षा बोर्ड से लेने की बात ने बच्चे परेशान हैं। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रही। हम अपनी तरफ से बच्चे को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। हम मनोरोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर बच्चे की काउंसिलिंग करवा रहे हैं। इससे बच्चा तनाव से बाहर आ सके। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे को पढ़ाने की और समझाने की कोशिश करें। - अनूप कुमार, तायल बाग कॉलोनी, हिसार

अभिभावक ध्यान रखें कि बच्चों पर पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव ना बनाएं। बच्चों को पढ़ाई के बीच-बीच में पॉजिटिव तरीके से मोटिवेट करें। अगर बच्चे में घबराहट, चिड़चिड़ापन दिखे तो तुरंत चिकित्सकों से परामर्श लें। बच्चों की समय पर काउंसिलिंग करवा लें। पूरी नींद लें, पढ़ाई के बीच ब्रेक लें। हल्की फुल्की एक्सरसाइज करें। बच्चों को पौष्टिक आहार दें, पानी ज्यादा पिलाएं। बच्चों को टाइम टेबल बना कर दें। बोर्ड के पैटर्न को लेकर किसी तरह का दबाव न लें। - डॉ. पूनम दहिया, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, हिसार
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