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Hisar News: संसाधनों की कमी से जूझते रहे स्कूल, सुधर नहीं पाया शिक्षा का स्तर

Sat, 28 Dec 2024 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sat, 28 Dec 2024 11:18 PM IST
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The shortage of teachers in schools could not be met
प्रवीन चुघ, ​शिक्षक।
हिसार। नया साल दस्तक दे रहा है और बीते साल की विदाई का वक्त आ गया है। बावजूद इसके जिले में शिक्षा के ढांचे में उम्मीद के अनुरूप सुधार नहीं हो पाया। जर्जर भवन वाले स्कूलों को नया भवन उपलब्ध करवाने की कवायद कागजों से बाहर नहीं निकल सकी, वहीं बच्चों को न ड्यूल डेस्क मिल पाए न सर्दी की वर्दी। वर्ष 2022 के बाद से कंवरपाल गुर्जर, सीमा त्रिखा और इस सरकार में महिपाल ढांडा शिक्षा मंत्री हैं, लेकिन इनमें से कोई भी तबादला अभियान नहीं चला पाया। इस कारण सरकारी विद्यालयों में गुरुजी से लेकर बच्चों तक की पढ़ाई का गणित बिगड़ता रहा।
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शिक्षकों की सालभर कमी खली
सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी सालभर खली। इसका असर पढ़ाई से लेकर विद्यार्थियों की संख्या पर भी पड़ा। समायोजन में गड़बड़ी के कारण जिन विद्यालयों में चार शिक्षकों की जरूरत थी, वहां 10 तैनात कर दिए गए और जहां 10 की जरूरत थी, वहां दो ही शिक्षक काम के बोझ से जूझते रहे। हालांकि नई शिक्षा नीति को 2025 तक लागू करने का लक्ष्य है। इसके लिए जिले के अधिकारियों ने मई में ही कमर कसी। जुलाई में ही कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें भेजीं गईं। अच्छी बात यह रही कि निजी विद्यालयों को टक्कर देने के लिए जिले के 18 सरकारी विद्यालयों पर पीएमश्री का तमगा लगा, जिसमें सीबीएसई की तर्ज पर पाठ्यक्रम लागू कर विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम से जोड़ा गया।
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ये रहीं उपलब्धियां
- एक साल बाद शिक्षा-दीक्षा मुहिम को फिर से शुरू किया गया।
- जिले के 18 सरकारी विद्यालयों पर पीएमश्री स्कूलों का तमगा लगा।
- 200 से अधिक शिक्षक जेबीटी से टीजीटी और टीजीटी से पीजीटी पदोन्नति किए गए।
- उगालन स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्रा कुसुम को जापान जाने का अवसर मिला।
- कुंभाखेड़ा में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शुरू करने का फैसला लेकर बजट जारी किया।
- गांव तलवंडी डिग्गी के पास सरकारी स्कूल पर स्थायी स्कूल का तमगा लगा।
- जुलाई में पहली से आठवीं कक्षा के अधिकतर विषयों की पुस्तकें स्कूलों में भेज दी गईं।
- शिक्षा नीति में बदलाव कर पांचवीं और आठवीं में विद्यार्थियों को फेल करने का अधिकार मिला।
- किसी भी सरकारी स्कूल का विलय नहीं किया, जबकि आलाधिकारियों ने खराब परिणाम और कम विद्यार्थियों वाले विद्यालयों के विलय का फैसला लिया था।
- मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में प्रति विद्यार्थी लागत राशि में बढ़ोतरी की गई।

नहीं मिलीं ये सुविधाएं
- तबादला अभियान न चलने से अधिकतर स्कूलों में शिक्षक सरप्लस रहे।
- कई सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को ड्यूल डेस्क की कमी खल रही है।
- राजकीय प्राइमरी विद्यालयों में एक भी स्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की गई।
- एक से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को वर्दी, स्टेशनरी या अन्य फंड जारी नहीं किए गए।
- शिक्षकों के मेडिकल और एलटीसी अटके रहे, जिसमें शिक्षा और वित्त विभाग दोनों ही फिसड्डी साबित हुए।
- राजकीय उच्च विद्यालय व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में से आधे में स्थायी स्कूल मुखिया नहीं हैं।
- बालवाटिका प्रथम, द्वितीय, तृतीय कक्षा के विद्यार्थियों को आज तक पुस्तकें नहीं दी जा सकी।
- 12 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आरोही मॉडल स्कूलों की दशा दुरुस्त नहीं हो पाई।
- जिले के नौ खंडों में विद्यालय परिवहन योजना लागू करनी थी, लेकिन केवल एक ही खंड उकलाना में ही चल रही है।

2025 में ये मिल सकती है सौगात
- शेष 50 फीसदी सरकारी विद्यालयों को स्थायी स्कूल मुखिया मिलेंगे।
- समस्त खंडों में ड्यूल डेस्क की व्यवस्था सुचारू रूप से की जाएगी।
- कुंभाखेड़ा में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शुरू हो सकता है, जिसकी अंतिम तिथि मार्च 2025 है।
- 100 से अधिक सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा योजना (एनएसक्यूएफ) शुरू की जाएगी।

एसएमसी को मिले प्रशिक्षण
स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) को विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है। क्योंकि स्कूल के बजट मामले में एसएमसी की सहमति लेना अनिवार्य है। साथ ही एसएमसी के तर्कसंगत ढंग से पुनर्गठन की जरूरत है।
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- प्रवीन चुघ, शिक्षक

तबादलों पर विशेष ध्यान दें
सरकार को तबादला अभियान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि जब तक विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से शिक्षकों का रेशनलाइजेशन नहीं होगा तब तक पढ़ाई में सुधार असंभव है। - जयभगवान बडाला, शिक्षक

शिक्षकों की कमी दूर हो
शिक्षा विभाग को शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष जोर देने की जरूरत है। अक्सर देखा जाता है कि अधिकतर सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और कई में अतिरिक्त शिक्षक तैनात हैं। - विजय, अभिभावक

विद्यार्थियों को वर्दी, स्टेशनरी और अन्य भुगतान समय पर मिलना चाहिए। क्योंकि सरकारी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के विद्यार्थी दाखिला लेने आते हैं। - सुरेश, अभिभावक


जिले में काफी संख्या में शिक्षकों की पदोन्नति की है। इससे शिक्षकों की संख्या काफी हद तक पूरी हुई। मिड डे मील की राशि को बढ़ाया है। उम्मीद है नए साल में सभी स्कूलों में संसाधन पूरे होंगे। जर्जर भवन वाले स्कूलो को नए भवन मिल सकेंगे। - विजेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, हिसार प्रथम ब्लॉक
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