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परिजन करने रहे विनती नहीं देखने दिया कोरोना संक्रमित बेटी के शव का चेहरा
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हिसार। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शुक्रवार को एक 20 वर्षीय युवती की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। इस युवती का शुक्रवार दोपहर हिसार ऋषिनगर स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार से पहले युवती के परिजन अपनी बेटी के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए।
दुखी परिजनों ने अंतिम संस्कार करने वाली टीम से अपनी बेटी का आखिरी बार चेहरा देखने की काफी देर तक विनती की, लेकिन उन्हें चेहरा नहीं देखने दिया। इस बारे में जब अंतिम संस्कार करने वाली टीम से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि कोरोनाग्रस्त मृतका के शव की सही से पेकिंग नहीं की गई थी। पेकिंग ऐसी थी कि उसमें मृतका का चेहरा नहीं दिख रहा था। उन्होंने बताया कि अगर हम परिजनों को मृतका का चेहरा दिखाते तो हमें पूरी पेकिंग खोलनी पड़ती। इस वजह से हम परिजनों को चेहरा नहीं दिखा पाए।
वहीं मृतका के पिता ने कहा कि मेरी बेटी को किसी प्रकार की कोरोना की बीमारी नहीं थी। वह जीबीएस बीमारी से ग्रस्त थी। पिछले काफी दिनों से वह शहर के एक नामी निजी अस्पताल में दाखिल थी। धीरे-धीर उसकी हालात में सुधार भी हो रहा था। शुक्रवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। डॉक्टरों ने उसको अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां डॉक्टरों ने एक ही दिन में उसको कोरोना संक्रमित भी घोषित कर दिया व उसकी मौत भी हो गई।
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सही से शव की पेकिंग करने की मांग
अंतिम संस्कार करने वाली टीम ने मांग की है कि कोरोना संक्रमित के शव को इस प्रकार पैक करना चाहिए की उसका चेहरा आराम देखा जा सके। शव को पैक करते समय उसके चेहरे पर पारदर्शी पॉलीथिन लगाना चाहिए। ताकि शव के परिजन आसानी से उसका चेहरा देख सकें।
पैक कर भेजें शव
कोरोना संक्रमित के शव को इस प्रकार पैक किया गया था कि उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। इस कारण हम परिजनों को मृतका का चेहरा नहीं दिखा पाए। हमने डॉक्टरों से मांग की है कि शव को इस प्रकार से पैक करके भेजें कि उसका चेहरा दिखता रहे। ताकि परिजन मृतक का चेहरा देख पाएं व हमें भी दिक्कत न हो।
- राजेश बागड़ी, अध्यक्ष, नगर निगम हिसार, इंचार्ज अंतिम संस्कार टीम।
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दुखी परिजनों ने अंतिम संस्कार करने वाली टीम से अपनी बेटी का आखिरी बार चेहरा देखने की काफी देर तक विनती की, लेकिन उन्हें चेहरा नहीं देखने दिया। इस बारे में जब अंतिम संस्कार करने वाली टीम से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि कोरोनाग्रस्त मृतका के शव की सही से पेकिंग नहीं की गई थी। पेकिंग ऐसी थी कि उसमें मृतका का चेहरा नहीं दिख रहा था। उन्होंने बताया कि अगर हम परिजनों को मृतका का चेहरा दिखाते तो हमें पूरी पेकिंग खोलनी पड़ती। इस वजह से हम परिजनों को चेहरा नहीं दिखा पाए।
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वहीं मृतका के पिता ने कहा कि मेरी बेटी को किसी प्रकार की कोरोना की बीमारी नहीं थी। वह जीबीएस बीमारी से ग्रस्त थी। पिछले काफी दिनों से वह शहर के एक नामी निजी अस्पताल में दाखिल थी। धीरे-धीर उसकी हालात में सुधार भी हो रहा था। शुक्रवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। डॉक्टरों ने उसको अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां डॉक्टरों ने एक ही दिन में उसको कोरोना संक्रमित भी घोषित कर दिया व उसकी मौत भी हो गई।
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सही से शव की पेकिंग करने की मांग
अंतिम संस्कार करने वाली टीम ने मांग की है कि कोरोना संक्रमित के शव को इस प्रकार पैक करना चाहिए की उसका चेहरा आराम देखा जा सके। शव को पैक करते समय उसके चेहरे पर पारदर्शी पॉलीथिन लगाना चाहिए। ताकि शव के परिजन आसानी से उसका चेहरा देख सकें।
पैक कर भेजें शव
कोरोना संक्रमित के शव को इस प्रकार पैक किया गया था कि उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। इस कारण हम परिजनों को मृतका का चेहरा नहीं दिखा पाए। हमने डॉक्टरों से मांग की है कि शव को इस प्रकार से पैक करके भेजें कि उसका चेहरा दिखता रहे। ताकि परिजन मृतक का चेहरा देख पाएं व हमें भी दिक्कत न हो।
- राजेश बागड़ी, अध्यक्ष, नगर निगम हिसार, इंचार्ज अंतिम संस्कार टीम।