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नागरिक अस्पताल में 20 मिनट तक दर्द से तड़पता रहा हादसे में घायल मरीज, नहीं मिला उपचार
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हिसार। शहर के सेक्टर 16-17 साउथ बाईपास पर शुक्रवार दोपहर एक ट्रक ने स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलने पर एंबुलेंस से घायल को तुरंत नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन करीब 20 मिनट तक घायल दर्द से तड़पता रहा लेकिन उसे उपचार नहीं मिला। इसके बाद उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
हादसे में घायल युवक को जब आपातकालीन वार्ड में लाया गया तो वहां अकेला एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद था। वार्ड में तैनात डॉ. दीपक ने कहा कि मरीज का सिर फटा हुआ था और सिर, पैर-हाथों पर काफी चोटें लगी थी। यहां इलाज दे पाना मुश्किल था, इसलिए मरीज को रेफर करना पड़ा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में ऑन कॉल स्पेशलिस्ट चिकित्सक को बुलाने की सुविधा दी गई है लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। चिकित्सक और वेंटिलेटर होने के बावजूद नागरिक अस्पताल रेफरल सिस्टम बनकर रह गया है। अस्पताल से औसतन रोजाना चार से पांच मरीज रेफर होते हैं। शुक्रवार को भी ऐसे में पांच मरीज रेेफर किए गए। हादसे में घायल मरीज के अलावा खरकड़ा निवासी दंपती अपने नवजात बच्चे को रेफर करने के बाद अग्रोहा लेकर गए।
जिलेभर से रेफर होकर आते हैं मरीज
बड़ा सवाल है कि जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल आज भी सुविधाओं एवं चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिलेभर से मरीज रेफर होकर यहां आते हैं, पर यहां से अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर होते हैं। कई बार अधिक समय लगने से मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। यह स्थिति कई सालों से बनी हुई है।
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चिकित्सकों के 23 पद पड़े खाली
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 55 पद स्वीकृत हैं। इनमेेें से करीब 23 पद खाली पड़े हैं। अस्पताल में न्यूरो सर्जन एवं स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की काफी कमी है। इस समय गायनी ओपीडी में भी महिला चिकित्सकों की कमी बनी हुई है और ओपीडी व डिलिवरी का काम अधिक है।
वेंटिलेटर है, पर चलाने वाला नहीं
अस्पताल में 28 वेंटिलेटर हैं।10 नए वेंटिलेटर आए थे। इनको चलाने के लिए पर्याप्त एनेस्थीसिया के चिकित्सक नहीं हैं, इस कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
आपातकालीन वार्ड में एमबीबीएस चिकित्स के अलावा एक स्पेशलिस्ट ऑन कॉल रहता है। जिसे जरूरत पड़ने पर फोन पर बुलाया जाता है। अगर ऐसी कोई बात है तो इसकी मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई। शिकायत आने के बाद जांच करवाई जाएगी। - डॉ. गोविंद गुप्ता, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार
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हादसे में घायल युवक को जब आपातकालीन वार्ड में लाया गया तो वहां अकेला एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद था। वार्ड में तैनात डॉ. दीपक ने कहा कि मरीज का सिर फटा हुआ था और सिर, पैर-हाथों पर काफी चोटें लगी थी। यहां इलाज दे पाना मुश्किल था, इसलिए मरीज को रेफर करना पड़ा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में ऑन कॉल स्पेशलिस्ट चिकित्सक को बुलाने की सुविधा दी गई है लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। चिकित्सक और वेंटिलेटर होने के बावजूद नागरिक अस्पताल रेफरल सिस्टम बनकर रह गया है। अस्पताल से औसतन रोजाना चार से पांच मरीज रेफर होते हैं। शुक्रवार को भी ऐसे में पांच मरीज रेेफर किए गए। हादसे में घायल मरीज के अलावा खरकड़ा निवासी दंपती अपने नवजात बच्चे को रेफर करने के बाद अग्रोहा लेकर गए।
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जिलेभर से रेफर होकर आते हैं मरीज
बड़ा सवाल है कि जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल आज भी सुविधाओं एवं चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिलेभर से मरीज रेफर होकर यहां आते हैं, पर यहां से अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर होते हैं। कई बार अधिक समय लगने से मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। यह स्थिति कई सालों से बनी हुई है।
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चिकित्सकों के 23 पद पड़े खाली
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 55 पद स्वीकृत हैं। इनमेेें से करीब 23 पद खाली पड़े हैं। अस्पताल में न्यूरो सर्जन एवं स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की काफी कमी है। इस समय गायनी ओपीडी में भी महिला चिकित्सकों की कमी बनी हुई है और ओपीडी व डिलिवरी का काम अधिक है।
वेंटिलेटर है, पर चलाने वाला नहीं
अस्पताल में 28 वेंटिलेटर हैं।10 नए वेंटिलेटर आए थे। इनको चलाने के लिए पर्याप्त एनेस्थीसिया के चिकित्सक नहीं हैं, इस कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
आपातकालीन वार्ड में एमबीबीएस चिकित्स के अलावा एक स्पेशलिस्ट ऑन कॉल रहता है। जिसे जरूरत पड़ने पर फोन पर बुलाया जाता है। अगर ऐसी कोई बात है तो इसकी मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई। शिकायत आने के बाद जांच करवाई जाएगी। - डॉ. गोविंद गुप्ता, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार