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Hisar News: उम्मीदों की नहर सूखी, बूंद-बूंद को जिंदगी तरसी
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गांव किरतान के जलघर की टूटी दीवार
बालसमंद। गर्मी की शुरुआत के साथ जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। वीरवार से नहर बंद होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। अब करीब 15 दिन बाद नहर में पानी आने की संभावना है। ऐसे में गांवों में पहले से चल रही अनियमित पेयजल सप्लाई ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती गर्मी के बीच लोगों को पीने, पशुओं और घरेलू जरूरतों के लिए पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार जिले के अधिकांश गांवों में तीन से पांच दिन के अंतराल में पानी की सप्लाई दी जा रही है। कई जगह सप्लाई का समय केवल 25 से 30 मिनट तक सीमित है। लंबे अंतराल के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में पानी स्टॉक करना पड़ रहा है लेकिन छोटे घरों और सीमित संसाधनों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा।
भिवानी रोहिल्ला गांव में तीन दिन में एक बार पानी सप्लाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी में तीन दिन तक पानी का इंतजार करना मुश्किल हो रहा है। जेई धूप सिंह ने बताया कि गांवों में बने छोटे-छोटे टैंकों में उपलब्ध स्टॉक के हिसाब से पानी की सप्लाई दी जा रही है। गांवों में पानी की वेस्टेज अधिक होने के कारण सप्लाई प्रभावित हो रही है।
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बुड़ाक गांव के कुलदीप ने बताया कि गांव में चार दिन में एक बार पानी की सप्लाई दी जाती है और वह भी केवल 25-30 मिनट तक चलती है। डोभी निवासी कृष्ण ने कहा कि गांव को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग दिन और समय पर पानी छोड़ा जाता है। यहां भी तीन दिन में एक बार ही पानी मिलता है। सीसवाला गांव के मुकेश ने बताया कि वहां दो दिन में एक बार पानी की सप्लाई दी जा रही है।
लीकेज और अवैध कनेक्शन बढ़ा रहे परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार गांवों में जगह-जगह पाइपलाइन में लीकेज है जिससे बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह रहा है। इसके अलावा मुख्य लाइन में कई लोगों ने अवैध कनेक्शन कर रखे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कनेक्शन के कारण कुछ घरों में बिना मोटर के भी पानी पहुंच रहा है, जबकि कई घरों में मोटर लगाने के बावजूद पानी नहीं आता। उन्होंने मांग की कि अवैध कनेक्शन हटाए जाएं और लीकेज तुरंत ठीक किया जाए ताकि सभी घरों तक बराबर पानी पहुंच सके।
दो किलोमीटर दूर का टैंक भी नहीं भर रहा गांवों की प्यास
क्षेत्र की पेयजल समस्या दूर करने के लिए सरकार ने करीब 25.62 करोड़ रुपये खर्च कर प्रोजेक्ट तैयार किया था। वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने सीसवाला हेड से वाटर टैंक बनाकर क्षेत्र के छह गांवों की पेयजल समस्या दूर करने का निर्णय लिया था। लाइन बिछाने का कार्य मार्च 2023 में पूरा हो चुका है। इसमें किरतान, बुड़ाक, बालसमंद, गोरछी, सरसाना और बासड़ा गांव शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब दो किलोमीटर दूर स्थित किरतान गांव के टैंक तक भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा, तो बालसमंद जैसे 12 किलोमीटर दूर बसे गांवों तक पानी पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि कई दिनों बाद मिलने वाली पानी सप्लाई के कारण घरों में पर्याप्त स्टॉक नहीं हो पाता। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। गांवों में रोजाना 15 से 20 टैंकर बिक रहे हैं। एक टैंकर की कीमत 500 रुपये से 1500 रुपये तक है। गर्मी बढ़ने के साथ पानी पर खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
गांव में तीन दिन बाद पानी आता है। इतने लंबे समय तक पानी स्टॉक रखना आसान नहीं है। पशुओं और बच्चों के लिए अलग से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। गांव के काफी लोग पानी खरीदकर लाते हैं।
- मंजीत लौरा, बालसमंद।
यहां पांच दिन में एक बार पानी की सप्लाई आती है। करीब एक हजार घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता। लोगों को पेयजल के लिए इंतजार करना पड़ता है। पानी की सफाई की भी पूरी व्यवस्था नहीं है।
- रोहताश, गांव किरतान।
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ग्रामीणों के अनुसार जिले के अधिकांश गांवों में तीन से पांच दिन के अंतराल में पानी की सप्लाई दी जा रही है। कई जगह सप्लाई का समय केवल 25 से 30 मिनट तक सीमित है। लंबे अंतराल के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में पानी स्टॉक करना पड़ रहा है लेकिन छोटे घरों और सीमित संसाधनों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा।
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भिवानी रोहिल्ला गांव में तीन दिन में एक बार पानी सप्लाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी में तीन दिन तक पानी का इंतजार करना मुश्किल हो रहा है। जेई धूप सिंह ने बताया कि गांवों में बने छोटे-छोटे टैंकों में उपलब्ध स्टॉक के हिसाब से पानी की सप्लाई दी जा रही है। गांवों में पानी की वेस्टेज अधिक होने के कारण सप्लाई प्रभावित हो रही है।
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बुड़ाक गांव के कुलदीप ने बताया कि गांव में चार दिन में एक बार पानी की सप्लाई दी जाती है और वह भी केवल 25-30 मिनट तक चलती है। डोभी निवासी कृष्ण ने कहा कि गांव को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग दिन और समय पर पानी छोड़ा जाता है। यहां भी तीन दिन में एक बार ही पानी मिलता है। सीसवाला गांव के मुकेश ने बताया कि वहां दो दिन में एक बार पानी की सप्लाई दी जा रही है।
लीकेज और अवैध कनेक्शन बढ़ा रहे परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार गांवों में जगह-जगह पाइपलाइन में लीकेज है जिससे बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह रहा है। इसके अलावा मुख्य लाइन में कई लोगों ने अवैध कनेक्शन कर रखे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कनेक्शन के कारण कुछ घरों में बिना मोटर के भी पानी पहुंच रहा है, जबकि कई घरों में मोटर लगाने के बावजूद पानी नहीं आता। उन्होंने मांग की कि अवैध कनेक्शन हटाए जाएं और लीकेज तुरंत ठीक किया जाए ताकि सभी घरों तक बराबर पानी पहुंच सके।
दो किलोमीटर दूर का टैंक भी नहीं भर रहा गांवों की प्यास
क्षेत्र की पेयजल समस्या दूर करने के लिए सरकार ने करीब 25.62 करोड़ रुपये खर्च कर प्रोजेक्ट तैयार किया था। वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने सीसवाला हेड से वाटर टैंक बनाकर क्षेत्र के छह गांवों की पेयजल समस्या दूर करने का निर्णय लिया था। लाइन बिछाने का कार्य मार्च 2023 में पूरा हो चुका है। इसमें किरतान, बुड़ाक, बालसमंद, गोरछी, सरसाना और बासड़ा गांव शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब दो किलोमीटर दूर स्थित किरतान गांव के टैंक तक भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा, तो बालसमंद जैसे 12 किलोमीटर दूर बसे गांवों तक पानी पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि कई दिनों बाद मिलने वाली पानी सप्लाई के कारण घरों में पर्याप्त स्टॉक नहीं हो पाता। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। गांवों में रोजाना 15 से 20 टैंकर बिक रहे हैं। एक टैंकर की कीमत 500 रुपये से 1500 रुपये तक है। गर्मी बढ़ने के साथ पानी पर खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
गांव में तीन दिन बाद पानी आता है। इतने लंबे समय तक पानी स्टॉक रखना आसान नहीं है। पशुओं और बच्चों के लिए अलग से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। गांव के काफी लोग पानी खरीदकर लाते हैं।
- मंजीत लौरा, बालसमंद।
यहां पांच दिन में एक बार पानी की सप्लाई आती है। करीब एक हजार घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता। लोगों को पेयजल के लिए इंतजार करना पड़ता है। पानी की सफाई की भी पूरी व्यवस्था नहीं है।
- रोहताश, गांव किरतान।