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यूक्रेन से वतन लौटा बरवाला निवासी छात्र सागर
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घर लौटने पर माता पिता व परिजनों के साथ मौजूद सागर।
- फोटो : Hisar
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बरवाला। यूक्रेन में छिड़े युद्ध के बाद वार्ड नंबर 1 के छात्र सागर की घर वापसी हुई है। उसके लौटने से परिजन बहुत खुश हैं।
यूक्रेन से बरवाला पहुंचने तक के सफर के दौरान आई दिक्कतों का जिक्र करते हुए सागर ने बताया कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी में कर रहा है। यह उसका तीसरा साल था। यूक्रेन और रूस के बीच जंग शुरू होने के बाद से ही उसने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन हर बार कोई न कोई समस्या आ जाती थी। इस दौरान सागर अपने अन्य साथियों के साथ खारकीव में एक होटल के बेसमेंट में रहा। मिसाइलों के धमाकों से उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे।
सागर ने 28 फरवरी को दूतावास के अनुसार बताए रास्ते पर चलना शुरू कर दिया। उसने बताया कि लवीव से लेकर पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचने के लिए उसने 30 हजार रुपये टैक्सी चालक को दिए। 3 मार्च को पोलैंड बॉर्डर से भारत आने के लिए रवाना हुआ व रविवार को सुबह 9 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा। घर पहुंचने पर सागर की माता ने कहा कि उसके सकुशल वापसी पर उन्हें काफी खुशी महसूस हो रही है।
सागर ने बताया कि यदि दो सगे भाई हैं तो उनमें से एक को ही भेजा जा रहा था तथा दूसरे के कागजातों में कोई न कोई कमी निकालकर उसे वहां रोक लिया जाता था। फिर घंटों इंतजार के बाद वही कागजात पूरे होने की बात कहकर उन्हें विमान में बिठाया जाता था।
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यूक्रेन से बरवाला पहुंचने तक के सफर के दौरान आई दिक्कतों का जिक्र करते हुए सागर ने बताया कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी में कर रहा है। यह उसका तीसरा साल था। यूक्रेन और रूस के बीच जंग शुरू होने के बाद से ही उसने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन हर बार कोई न कोई समस्या आ जाती थी। इस दौरान सागर अपने अन्य साथियों के साथ खारकीव में एक होटल के बेसमेंट में रहा। मिसाइलों के धमाकों से उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे।
सागर ने 28 फरवरी को दूतावास के अनुसार बताए रास्ते पर चलना शुरू कर दिया। उसने बताया कि लवीव से लेकर पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचने के लिए उसने 30 हजार रुपये टैक्सी चालक को दिए। 3 मार्च को पोलैंड बॉर्डर से भारत आने के लिए रवाना हुआ व रविवार को सुबह 9 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा। घर पहुंचने पर सागर की माता ने कहा कि उसके सकुशल वापसी पर उन्हें काफी खुशी महसूस हो रही है।
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सागर ने बताया कि यदि दो सगे भाई हैं तो उनमें से एक को ही भेजा जा रहा था तथा दूसरे के कागजातों में कोई न कोई कमी निकालकर उसे वहां रोक लिया जाता था। फिर घंटों इंतजार के बाद वही कागजात पूरे होने की बात कहकर उन्हें विमान में बिठाया जाता था।
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