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जालसाजी से दूसरे को नौकरी दिलाने के आरोपी में दूसरा अरोपी गिरफ्तार
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हिसार। फर्जी दस्तावेज तैयार करके महिला के स्थान पर एक व्यक्ति को स्वीपर पद पर पक्की नौकरी लगवाने के करीब ढाई दशक पुराने मामले में पुलिस ने आर्य नगर निवासी गुलाब सिंह राजोतिया को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक अन्य आरोपी चंद्र को पुलिस ने दो अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। इसी मामले में लिपिक जगदीश की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार है। इस मामले का आरटीआई से मिले दस्तावेजों से खुलासा हुआ।
आर्य नगर निवासी विकास ने बताया कि उसकी मां शकुंतला देवी ने वर्ष 1986 से 1995 तक सरकारी स्कूल में स्वीपर पद पर कार्य किया। सरकार की नीति के अनुसार शकुंतला देवी को इसी पद पर पक्की नौकरी दी जानी थी, लेकिन आरोपियों ने मिलीभगत करके एक दिन पहले उसको नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इसकेे बाद आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके उसकी मां के स्थान पर बड़वा गांव निवासी चंद्र को पक्की नौकरी ज्वाइन करवा दी। इस बारे में जब उसने सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी, तो इस फर्जीवाड़े के मामले का खुलासा हुआ।
इसके बाद में पुलिस को शिकायत दी। आजाद नगर थाना पुलिस ने फरवरी, 2022 में चंद्र के अलावा लिपिक जगदीश, संतोष व स्नेह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। इस मामले की जांच तत्कालीन डीएसपी जोगेंद्र शर्मा ने की और आरोपियों ने मिलीभगत करके नकली गवाह पेश करके मामला खारिज करवा दिया। इसके बाद उन्होंने डीएसपी जोगेंद्र व आरोपियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत की, तो नकली गवाह पेश करने का खुलासा हुआ और पुलिस ने एक और मामला दर्ज किया।
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आर्य नगर निवासी विकास ने बताया कि उसकी मां शकुंतला देवी ने वर्ष 1986 से 1995 तक सरकारी स्कूल में स्वीपर पद पर कार्य किया। सरकार की नीति के अनुसार शकुंतला देवी को इसी पद पर पक्की नौकरी दी जानी थी, लेकिन आरोपियों ने मिलीभगत करके एक दिन पहले उसको नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इसकेे बाद आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके उसकी मां के स्थान पर बड़वा गांव निवासी चंद्र को पक्की नौकरी ज्वाइन करवा दी। इस बारे में जब उसने सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी, तो इस फर्जीवाड़े के मामले का खुलासा हुआ।
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इसके बाद में पुलिस को शिकायत दी। आजाद नगर थाना पुलिस ने फरवरी, 2022 में चंद्र के अलावा लिपिक जगदीश, संतोष व स्नेह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। इस मामले की जांच तत्कालीन डीएसपी जोगेंद्र शर्मा ने की और आरोपियों ने मिलीभगत करके नकली गवाह पेश करके मामला खारिज करवा दिया। इसके बाद उन्होंने डीएसपी जोगेंद्र व आरोपियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत की, तो नकली गवाह पेश करने का खुलासा हुआ और पुलिस ने एक और मामला दर्ज किया।
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