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दो गुमनाम शहीद सैनिकों का मिला रिकॉर्ड
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गुमनाम शहीदों के परिजन एसडीएम को ज्ञापन सौंपते ।
- फोटो : CharkhiDadri
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बाढड़ा (चरखी दादरी)। गांव गोपी निवासी दो गुमनाम शहीदों का रिकॉर्ड मिला है। गुमनाम शहीदों के परिजनों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर इस रिकॉर्ड की जांच करवाने व शहीद का दर्जा देने की मांग की।
गांव गोपी निवासी अजीत व बिजेंद्र ने बताया कि उनके दादा चंदगीराम व दयाराम फौज में भर्ती हुए थे। दोनो द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हो गए। अब 80 वर्ष बाद उनका रिकार्ड मिला है। राष्ट्रीय अभिलेखागार विभाग ने इनका रिकार्ड खंगाला और नाम व गांव की पहचान की गई। प्रशासन के पास भी इन दोनों का रिकार्ड है। परिजनों ने सरकार से इनको शहीद का दर्जा देनेे व गांव के गौरव पटल पर नाम लिखने की मांग की है। एसडीएम शंभू राठी का कहना है कि परिजनों की मांग व रिकॉर्ड उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए थे चंदगीराम व दयाराम
अजीत व बिजेंद्र ने बताया कि उनके दादा चंदगीराम व दयाराम ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए थे और अंग्रेजों की तरफ से जापान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। जापान ने सिपाहियों को बंधक बना कर जेलों में बंद कर दिया। बाद में नेताजी सुभाष चंद बोस के प्रयासों से जापान ने भारतीय सैनिकों को रिहा करवाया था तब वे रिहा हुए और आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। इसके बाद आजादी की लड़ाई में शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि आजाद हिंद फौज के सैंकड़ों सैनिक ऐसे रहे, जिनका अंग्रेजों ने पूरा रिकॉर्ड नहीं सौंपा। इसके कारण ऐसे शहीदों कीे आज तक पहचान नहीं मिल सकी है।
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गांव गोपी निवासी अजीत व बिजेंद्र ने बताया कि उनके दादा चंदगीराम व दयाराम फौज में भर्ती हुए थे। दोनो द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हो गए। अब 80 वर्ष बाद उनका रिकार्ड मिला है। राष्ट्रीय अभिलेखागार विभाग ने इनका रिकार्ड खंगाला और नाम व गांव की पहचान की गई। प्रशासन के पास भी इन दोनों का रिकार्ड है। परिजनों ने सरकार से इनको शहीद का दर्जा देनेे व गांव के गौरव पटल पर नाम लिखने की मांग की है। एसडीएम शंभू राठी का कहना है कि परिजनों की मांग व रिकॉर्ड उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
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ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए थे चंदगीराम व दयाराम
अजीत व बिजेंद्र ने बताया कि उनके दादा चंदगीराम व दयाराम ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए थे और अंग्रेजों की तरफ से जापान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। जापान ने सिपाहियों को बंधक बना कर जेलों में बंद कर दिया। बाद में नेताजी सुभाष चंद बोस के प्रयासों से जापान ने भारतीय सैनिकों को रिहा करवाया था तब वे रिहा हुए और आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। इसके बाद आजादी की लड़ाई में शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि आजाद हिंद फौज के सैंकड़ों सैनिक ऐसे रहे, जिनका अंग्रेजों ने पूरा रिकॉर्ड नहीं सौंपा। इसके कारण ऐसे शहीदों कीे आज तक पहचान नहीं मिल सकी है।
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