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पॉलिथीन रोकथाम का जिम्मा 10 विभागों के 23 अधिकारियों पर, चालान काट रहा सिर्फ निगम प्रशासन
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बिजली निगम के एसई राजेंद्र सभ्रवाल के साथ बैठक करते विधायक डॉ.कमल गुप्ता।
- फोटो : Hisar
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हिसार। पर्यावरण के लिए नासूर बन चुके पॉलिथीन की रोकथाम के लिए जिन विभागों और अधिकारियों पर जिम्मेदारी डाली गई है, वह पूरी शिद्दत से अपना काम नहीं कर रहे हैं। राज्यपाल की ओर से हरियाणा नॉन बायो डिग्रेडेबल गारबेज (कंट्रोल) एक्ट 1998 के तहत पॉलिथीन रोकने और पॉलिथीन रखने वालों पर कार्रवाई के लिए 10 विभागों के 23 अधिकारियों को अधिकार दिए गए हैं। मगर हैरानी की बात है कि इनमें से सिर्फ नगर निगम के अधिकारी ही चालान काट रहे हैं जबकि अन्य विभागों की तरफ से कोई गतिविधि नहीं हो रही है। हालांकि निगम के अभियान के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी साथ रहकर खानापूर्ति कर लेते हैं।
शहर में रोजाना बिक रहे औसतन 6 हजार किलोग्राम पॉलिथीन को रोकना चुनौती
इन विभागों और उनके अधिकारियों के सामने शहर में रोजाना बिक रहे औसतन 6 हजार किलोग्राम पॉलिथीन को रोकना चुनौती बन गई है। नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर हर महीने उपायुक्त इन संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक जरूर करते हैं। मगर परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिल रहा है। नतीजन, लोग धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं। रेहड़ी से लेकर बड़ी-बड़ी दुकानों पर भी आसानी से पॉलिथीन मिल रहा है।
इन विभागों को किया गया है शामिल
पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए जिन विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है, उनमें जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, जनस्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं पूर्ति विभाग, टाउन एवं कंट्री प्लानिंग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और मार्केटिंग बोर्ड शामिल है।
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निगम प्रशासन ने भी तीन साल में काटे मात्र 146 चालान
नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई को भी संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। निगम की स्वच्छता शाखा के अधिकारियों ने हर बार एनजीटी की बैठक से पहले पॉलिथीन के चालान काटकर खानापूर्ति की है। यही कारण है कि 2017 से लेकर अब तक तीन साल में मात्र 146 चालान काटे गए हैं। यही कारण है कि शहर की अधिकतर दुकानों पर पॉलिथीन प्रयोग होता है। सिर्फ मिठाई और कपड़े की दुकानों पर ही कपड़े के बैग दिए जा रहे हैं।
इन अधिकारियों के पास है चालान काटने की पावर
उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, डीडीपीओ, एसडीएम, सीटीएम, नगर निगम के कमिश्नर, नगर निगम के असिस्टेंट कमिश्नर्स, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर्स, नगर परिषद के ईओ, नगरपालिका के सचिव, जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन, जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक, सहायक जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक, जिला टाउन प्लानर्स, एचएसवीपी के ईओ, सभी बीडीपीओ, सभी तहसीलदार, सभी नायब तहसीलदार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के असिस्टेंट इनवायरमेंटल इंजीनियर्स, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी बी श्रेणी के वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी जूनियर इंजीनियर्स, मार्केट कमेटी के सभी सचिव
इस तरह है जुर्माने का प्रावधान
पॉलिथीन की मात्रा -- जुर्माना राशि
100 ग्राम - 500 रुपये
101 से 500 ग्राम - 1500 रुपये
501 से 1 किलोग्राम - 3 हजार रुपये
1 से 5 किलोग्राम - 10 हजार रुपये
5 से 10 किलोग्राम - 20 हजार रुपये
10 किलो से ज्यादा - 25 हजार रुपये
अब तक 146 चालान काटे
नगर निगम प्रशासन समय-समय पर पॉलिथीन रखने वालों के खिलाफ अभियान चला रहा है। अब तक 146 चालान काट चुके हैं। भविष्य में भी अभियान चलता रहेगा।
डॉ. प्रदीप हुड्डा, डीएमसी, नगर निगम।
थैलों का करें प्रयोग
पॉलिथीन और प्लास्टिक गांव से लेकर शहर तक लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। शहर का ड्रेनेज सिस्टम अक्सर पॉलिथीन से भरा मिलता है। नालियां और नाले जाम हो जाते हैं। 40 माइक्रॉन से कम पतली पॉलिथीन पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। पॉलिथीन की जगह हमें कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करना चाहिए।
-नरेंद्र यादव, जिला समन्वयक, नेहरू युवा केंद्र।
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शहर में रोजाना बिक रहे औसतन 6 हजार किलोग्राम पॉलिथीन को रोकना चुनौती
इन विभागों और उनके अधिकारियों के सामने शहर में रोजाना बिक रहे औसतन 6 हजार किलोग्राम पॉलिथीन को रोकना चुनौती बन गई है। नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर हर महीने उपायुक्त इन संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक जरूर करते हैं। मगर परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिल रहा है। नतीजन, लोग धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं। रेहड़ी से लेकर बड़ी-बड़ी दुकानों पर भी आसानी से पॉलिथीन मिल रहा है।
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इन विभागों को किया गया है शामिल
पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए जिन विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है, उनमें जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, जनस्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं पूर्ति विभाग, टाउन एवं कंट्री प्लानिंग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और मार्केटिंग बोर्ड शामिल है।
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निगम प्रशासन ने भी तीन साल में काटे मात्र 146 चालान
नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई को भी संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। निगम की स्वच्छता शाखा के अधिकारियों ने हर बार एनजीटी की बैठक से पहले पॉलिथीन के चालान काटकर खानापूर्ति की है। यही कारण है कि 2017 से लेकर अब तक तीन साल में मात्र 146 चालान काटे गए हैं। यही कारण है कि शहर की अधिकतर दुकानों पर पॉलिथीन प्रयोग होता है। सिर्फ मिठाई और कपड़े की दुकानों पर ही कपड़े के बैग दिए जा रहे हैं।
इन अधिकारियों के पास है चालान काटने की पावर
उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, डीडीपीओ, एसडीएम, सीटीएम, नगर निगम के कमिश्नर, नगर निगम के असिस्टेंट कमिश्नर्स, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर्स, नगर परिषद के ईओ, नगरपालिका के सचिव, जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन, जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक, सहायक जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक, जिला टाउन प्लानर्स, एचएसवीपी के ईओ, सभी बीडीपीओ, सभी तहसीलदार, सभी नायब तहसीलदार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के असिस्टेंट इनवायरमेंटल इंजीनियर्स, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी बी श्रेणी के वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी जूनियर इंजीनियर्स, मार्केट कमेटी के सभी सचिव
इस तरह है जुर्माने का प्रावधान
पॉलिथीन की मात्रा -- जुर्माना राशि
100 ग्राम - 500 रुपये
101 से 500 ग्राम - 1500 रुपये
501 से 1 किलोग्राम - 3 हजार रुपये
1 से 5 किलोग्राम - 10 हजार रुपये
5 से 10 किलोग्राम - 20 हजार रुपये
10 किलो से ज्यादा - 25 हजार रुपये
अब तक 146 चालान काटे
नगर निगम प्रशासन समय-समय पर पॉलिथीन रखने वालों के खिलाफ अभियान चला रहा है। अब तक 146 चालान काट चुके हैं। भविष्य में भी अभियान चलता रहेगा।
डॉ. प्रदीप हुड्डा, डीएमसी, नगर निगम।
थैलों का करें प्रयोग
पॉलिथीन और प्लास्टिक गांव से लेकर शहर तक लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। शहर का ड्रेनेज सिस्टम अक्सर पॉलिथीन से भरा मिलता है। नालियां और नाले जाम हो जाते हैं। 40 माइक्रॉन से कम पतली पॉलिथीन पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। पॉलिथीन की जगह हमें कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करना चाहिए।
-नरेंद्र यादव, जिला समन्वयक, नेहरू युवा केंद्र।