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Hisar News: दो पंचायत पर एक खेल स्टेडियम को तरसे खिलाड़ी
Mon, 01 Jun 2026 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:34 AM IST
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गांव सीसवाल में बने अस्थायी मैदान में दौड़ लगाते युवा।
हिसार। गांव सीसवाल में यूं तो दो पंचायतें हैं लेकिन सुविधाओं की बात करें तो गांव में खेल स्टेडियम में व्यवस्था भी नहीं है। मजबूरी में प्रोफेशनल खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए आसपास के गांवों की रुख करना पड़ रहा है। आर्मी भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं ने अपने पैसों से वन विभाग की मलकियत वाली जमीन पर अस्थायी व्यवस्था की हुई है।
गांव सीसवाल को महाग्राम योजना में शामिल किया हुआ है। इन योजना में उन गांवों को शामिल किया जाता है जिनकी आबादी 10 हजार से ज्यादा है। इस गांव की दो पंचायतें हैं। एक पंचायत सीसवाल ढाणी तो दूसरी पंचायत सीसवाल की है। इतने बड़े गांव का खुद का खेल स्टेडियम भी नहीं है। इसका खामियाजा गांव की उभरती खेल प्रतिभाओं को भुगतना पड़ रहा है।
पंचायत का तर्क-स्टेडियम के लिए नहीं है पंचायती जमीन
पंचायत का तर्क है कि उनके पास स्टेडियम के लिए पंचायती जमीन नहीं है। पंचायत की खाली जमीन जोहड़ की है। नियमानुसार जोहड़ की जमीन का इस्तेमाल अन्य कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता। गांव के करीब 5 किलोमीटर दूर पंचायत की कुछ जमीन है लेकिन यह जमीन उपजाऊ है। इस पर खेल स्टेडियम नहीं बना सकते। पंचायत इस जमीन को हर साल ठेके पर देती है जो पंचायत की आय एक स्रोत भी है। हालांकि गांव के ग्राम सचिवालय के पास कुछ जमीन है जिस पर गांव के युवाओं की तरफ से मिनी स्टेडियम बनाने की मांग उठती रहती है।
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अस्थायी स्टेडियम में ट्रैक कच्चा
गांव के युवाओं ने शिव मंदिर के पास वन विभाग की जमीन करीब 5 एकड़ जमीन पर एक अस्थायी मैदान बना रखा है। इस जमीन पर एक फुटबाल मैदान और दौड़ के लिए कच्चा ट्रैक बना रखा है। इस ट्रैक पर सुबह-शाम आर्मी भर्ती की तैयारी करने वाले युवा अभ्यास करते हैं। इस मैदान के पास से पेयजल की लाइन गुजरती है। इस लाइन के कारण कई दफा पानी इस मैदान में भर जाता है जिस कारण से भर्ती की तैयारी करने वालों का अभ्यास प्रभावित होता है।
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- गांव में स्टेडियम नहीं है तो मजबूरी में इस अस्थायी मैदान में अभ्यास करना पड़ता है लेकिन इसमें भी बार-बार पानी भर जाता है। गांव में स्टेडियम बन जाए तो गांव के युवाओं को काफी फायदा होगा। - दयानंद, युवा
- कहने को तो गांव की दो पंचायत हैं लेकिन इतना बड़ा गांव होने के बावजूद गांव का खुद का स्टेडियम नहीं है। अगर स्टेडियम की व्यवस्था हो जाए तो उभरती खेल प्रतिभाओं को काफी लाभ होगा। - अमित, युवा
- स्टेडियम न होने की वजह से एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को मंडी आदमपुर या कोहली गांव में जाकर अभ्यास करना पड़ता है जिनकी दूरी करीब 8 से 10 किलोमीटर है। अगर स्टेडियम होगा तो वे अपने गांव में अभ्यास कर सकेंगे। - रोशन, खिलाड़ी
- अगर खेल स्टेडियम होगा तो ज्यादा से ज्यादा युवा खेलों को अपनाएगा। आज खेल के दम पर आप सरकारी नौकरी में जा सकते हो और अपने भविष्य को सुरक्षित बना सकते हो। - विष्णु, खिलाड़ी
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गांव सीसवाल को महाग्राम योजना में शामिल किया हुआ है। इन योजना में उन गांवों को शामिल किया जाता है जिनकी आबादी 10 हजार से ज्यादा है। इस गांव की दो पंचायतें हैं। एक पंचायत सीसवाल ढाणी तो दूसरी पंचायत सीसवाल की है। इतने बड़े गांव का खुद का खेल स्टेडियम भी नहीं है। इसका खामियाजा गांव की उभरती खेल प्रतिभाओं को भुगतना पड़ रहा है।
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पंचायत का तर्क-स्टेडियम के लिए नहीं है पंचायती जमीन
पंचायत का तर्क है कि उनके पास स्टेडियम के लिए पंचायती जमीन नहीं है। पंचायत की खाली जमीन जोहड़ की है। नियमानुसार जोहड़ की जमीन का इस्तेमाल अन्य कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता। गांव के करीब 5 किलोमीटर दूर पंचायत की कुछ जमीन है लेकिन यह जमीन उपजाऊ है। इस पर खेल स्टेडियम नहीं बना सकते। पंचायत इस जमीन को हर साल ठेके पर देती है जो पंचायत की आय एक स्रोत भी है। हालांकि गांव के ग्राम सचिवालय के पास कुछ जमीन है जिस पर गांव के युवाओं की तरफ से मिनी स्टेडियम बनाने की मांग उठती रहती है।
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अस्थायी स्टेडियम में ट्रैक कच्चा
गांव के युवाओं ने शिव मंदिर के पास वन विभाग की जमीन करीब 5 एकड़ जमीन पर एक अस्थायी मैदान बना रखा है। इस जमीन पर एक फुटबाल मैदान और दौड़ के लिए कच्चा ट्रैक बना रखा है। इस ट्रैक पर सुबह-शाम आर्मी भर्ती की तैयारी करने वाले युवा अभ्यास करते हैं। इस मैदान के पास से पेयजल की लाइन गुजरती है। इस लाइन के कारण कई दफा पानी इस मैदान में भर जाता है जिस कारण से भर्ती की तैयारी करने वालों का अभ्यास प्रभावित होता है।
- गांव में स्टेडियम नहीं है तो मजबूरी में इस अस्थायी मैदान में अभ्यास करना पड़ता है लेकिन इसमें भी बार-बार पानी भर जाता है। गांव में स्टेडियम बन जाए तो गांव के युवाओं को काफी फायदा होगा। - दयानंद, युवा
- कहने को तो गांव की दो पंचायत हैं लेकिन इतना बड़ा गांव होने के बावजूद गांव का खुद का स्टेडियम नहीं है। अगर स्टेडियम की व्यवस्था हो जाए तो उभरती खेल प्रतिभाओं को काफी लाभ होगा। - अमित, युवा
- स्टेडियम न होने की वजह से एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को मंडी आदमपुर या कोहली गांव में जाकर अभ्यास करना पड़ता है जिनकी दूरी करीब 8 से 10 किलोमीटर है। अगर स्टेडियम होगा तो वे अपने गांव में अभ्यास कर सकेंगे। - रोशन, खिलाड़ी
- अगर खेल स्टेडियम होगा तो ज्यादा से ज्यादा युवा खेलों को अपनाएगा। आज खेल के दम पर आप सरकारी नौकरी में जा सकते हो और अपने भविष्य को सुरक्षित बना सकते हो। - विष्णु, खिलाड़ी