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Hisar News: पांच माह से रिसोल टायरों पर जोखिम भरा सफर कर रहे यात्री

Wed, 25 Dec 2024 08:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Wed, 25 Dec 2024 08:05 AM IST
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Passengers have been traveling risky journey on resol tires for last five months
हिसार। पांच माह से यात्रियों का सफर रिसोल टायरों पर चल रहा है। अगस्त के बाद हिसार डिपो में टायर नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। अब मुख्यालय पत्र लिखकर तत्काल 200 टायरों की मांग की है। हर माह हिसार डिपो को 65 टायर मिलते हैं। मगर पांच माह से एक भी टायर नहीं पहुंचा है।
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बता दें, कि टायर न होने से हिसार डिपो की एक बस सोमवार को खड़ी हो गई थी। उसके बाद केंद्रीय कर्मशाला से दो टायर लिए और बस को रूट पर भेजा गया। यदि डिपो में जल्द टायर नहीं पहुंचे तो और भी बसें खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में यात्रियों के सामने बसों का संकट खड़ा हो सकता है। हिसार डिपो में रोजाना बसों पर 15 से 20 रिसोल टायर चढ़ाए जा रहे हैं।
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अब दूसरे डिपो में भी टायरों का टोटा
अभी तक हिसार डिपो में टायर खत्म होने के बाद अन्य डिपो से उधार में टायर मंगवाकर काम चलाया जा रहा था। मगर अब तो अन्य डिपो में भी टायरों का टोटा हो चुका है। वहीं, बिजली का फॉल्ट आने से मंगलवार को रिसोल प्लांट बंद रहा। ऐसे में टायर रिसोल नहीं हो सके।
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हिसार के प्लांट के अन्य डिपो के टायर भी हो रहे रिसोल
हिसार के अलावा गुरुग्राम और करनाल में भी टायरों को रिसोल करने का प्लांट है। ऐसे में हिसार डिपो के प्लांट में सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, जींद के अलावा अन्य जिलों के डिपो से भी टायर रिसोल होने के लिए आते हैं। कर्मचारियों की मानें तो प्लांट में 24 घंटे में 24 टायर रिसोल होते हैं।
इतनी हैं टायरों की लाइफ
- मिनी बसों में लगने वाले टायर : 30 हजार किलोमीटर से 35 हजार किलोमीटर तक चलते है।
- बीएस-4 मॉडल की बसों में लगने वाले टायर : 45 हजार किलोमीटर से 55 हजार किलोमीटर तक चलते है।
- बीएस-6 मॉडल की बसों में लगने वाले टायर : 30 हजार किलोमीटर से 35 हजार किलोमीटर तक चलते है।
- रिसोल टायर 15 हजार किलोमीटर से 25 हजार किलोमीटर तक चलते है।
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