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समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी करने से राजनीतिक दलों का परहेज
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
Updated Tue, 05 Jan 2016 12:38 AM IST
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जिला परिषद के लिए राजनीतिक दल अपने समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं कर रही। चुनाव में विजेताओं को अपने पाले में दिखाने के लिए पार्टियां सूची से परहेज कर रही है। राजनीतिक दलों से जुड़े प्रत्याशी भी प्रचार के दौरान पार्टी के चुनाव चिन्ह का नाम का उपयोग नहीं कर रहे।
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जिला परिषद सदस्यों के लिए भाजपा, इनेलो और कांग्रेस के कार्यकर्ता पार्टी के निशान के बिना ही चुनावी मैदान में हैं। बीते सप्ताह भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने हिसार में खास पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें जिला परिषद के लिए पार्टी समर्थित प्रत्याशियों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया था।
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इसमें यह भी कहा गया था कि जहां दो प्रत्याशी हों, वहां एक प्रत्याशी को समझा बुझाकर नाम वापस कराएं। इसके लिए सीनियर लीडर श्रीनिवास गोयल को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष की ओर से भी पदाधिकारियों की बैठक ली गई थी, जिसमें समर्थित प्रत्याशियों को सहयोग करने का निर्देश दिया गया था। इनेलो की ओर से भी अब तक ऐसी कोई सूची तैयार नहीं की जा सकी। पदाधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
इसी तरह का हाल कांग्रेस का भी है। कांग्रेस की ओर से भी प्रत्याशियों की सूची नहीं दी गई है। कई गुटों में बंटी कांग्रेस के कई-कई कार्यकर्ता आमने-सामने चुनाव मैदान में हैं।
कांग्रेस का जिला स्तर का संगठन घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में जिला परिषद के समर्थित प्रत्याशियों की सूची तैयार कौन करेगा।
जीत के बाद देंगे अपने पार्षदों की जानकारी
राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारी चुनाव में अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह, पार्टी का झंडा, पार्टी का नाम उपयोग नहीं कर रहे। ऐसा होने से उन्हें फायदा होने की बजाय नुकसान होने का खतरा अधिक नजर आ रहा है। जीत के बाद पार्टियां अपने पार्षदों की जानकारी देंगी।
नेताओं का नाम तक नहीं ले रहे
जिला परिषद के चुनाव में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपनी पार्टी के सीनियर नेता का नाम तक नहीं ले रहे। पार्टी की नीतियों व उपलब्धियां गिनाना भी उचित नहीं मान रहे। भाईचारे की दुहाई देते हुए वोट की अपील कर रहे हैं। जातीय समीकरणों को साधने का प्रयास जरूर करते हैं।