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Hisar News: ओशिन ने 43.38 मीटर डिस्कस थ्रो कर जीता रजत पदक
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रजत पदक विजेता ओशिन जागलान।
हिसार। बहरीन में आयोजित एशियन यूथ गेम्स में डाटा गांव की बेटी ओशिन जागलान ने 43.38 मीटर डिस्कस थ्रो कर रजत पदक अपने नाम किया। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया पर ओशिन को बधाई देते हुए कहा कि उसने देश और हरियाणा का नाम गौरवान्वित किया है।
ओशिन फिलहाल रिलायंस मुंबई स्पोर्ट्स एकेडमी में कोच वीरेंद्र डबास से प्रशिक्षण ले रही हैं। उसके पिता धर्मेंद्र जागलान ने बताया कि पहले ओशिन महाबीर स्टेडियम में कोच संदीप रापड़िया से अभ्यास करती थीं और लगभग तीन माह तक जेएसडब्ल्यू कोच अरविंद्र कुमार के मार्गदर्शन में भी रहीं। पिछले तीन महीनों से वह मुंबई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
धर्मेंद्र ने बताया कि ओशिन ने सात साल की उम्र से खेलों में कदम रखा था। शुरुआत में वह सेक्टर 16-17 स्थित जयहिंद पार्क में पिता के साथ घूमने जाती थीं और वहीं दौड़ना शुरू किया। बाद में उसने एक्सरसाइज और रेस का अभ्यास किया, कुछ समय कबड्डी भी खेली, लेकिन अंततः एथलेटिक्स को ही अपना कॅरिअर चुना।
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उन्होंने बताया कि चार बार की ओलंपियन सीमा अंतिल के आशीर्वाद से ही ओशिन का चयन रिलायंस एकेडमी में हुआ। ओशिन की इस उपलब्धि पर उसके परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। गांव लौटने पर उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। पिता धर्मेंद्र ने कहा कि बेटी की मेहनत और समर्पण ने यह सफलता दिलाई है। वह पूरे गांव और देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बनी है।
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ओशिन फिलहाल रिलायंस मुंबई स्पोर्ट्स एकेडमी में कोच वीरेंद्र डबास से प्रशिक्षण ले रही हैं। उसके पिता धर्मेंद्र जागलान ने बताया कि पहले ओशिन महाबीर स्टेडियम में कोच संदीप रापड़िया से अभ्यास करती थीं और लगभग तीन माह तक जेएसडब्ल्यू कोच अरविंद्र कुमार के मार्गदर्शन में भी रहीं। पिछले तीन महीनों से वह मुंबई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
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धर्मेंद्र ने बताया कि ओशिन ने सात साल की उम्र से खेलों में कदम रखा था। शुरुआत में वह सेक्टर 16-17 स्थित जयहिंद पार्क में पिता के साथ घूमने जाती थीं और वहीं दौड़ना शुरू किया। बाद में उसने एक्सरसाइज और रेस का अभ्यास किया, कुछ समय कबड्डी भी खेली, लेकिन अंततः एथलेटिक्स को ही अपना कॅरिअर चुना।
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उन्होंने बताया कि चार बार की ओलंपियन सीमा अंतिल के आशीर्वाद से ही ओशिन का चयन रिलायंस एकेडमी में हुआ। ओशिन की इस उपलब्धि पर उसके परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। गांव लौटने पर उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। पिता धर्मेंद्र ने कहा कि बेटी की मेहनत और समर्पण ने यह सफलता दिलाई है। वह पूरे गांव और देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बनी है।