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Hisar News: अमेरिका-भारत कृषि समझौते पर जताया विरोध

Mon, 16 Feb 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Mon, 16 Feb 2026 01:17 AM IST
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Opposition expressed on US-India agricultural agreement
नारनौंद। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं के व्यापार समझौते को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। रविवार को हांसी रोड पर क्षेत्र के कई किसान एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि यह समझौता वापस नहीं लिया गया तो पहले हुए किसान आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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किसान बलवान लोहान, शीलू लोहान, बजे सिंह, शमशेर लोहान, जंगी लोहान, आदि ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ जो समझौता किया है, वह देश के किसानों के हितों के खिलाफ है। समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों और फसलों पर भारत ने जीरो टैरिफ किया है, जबकि अमेरिका ने भारत में बने उत्पादों पर 3 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ा दिया है। किसानों का कहना है कि इससे भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी और स्थानीय बाजार पर विदेशी उत्पादों का दबाव बढ़ेगा।
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उन्होंने कहा कि देशभर में इस समझौते पर रोष है और किसान संगठन जल्द ही व्यापक रणनीति बनाएंगे। यदि केंद्र सरकार ने समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया तो बंदरगाहों पर अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों को उतारने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने मांग उठाई कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कृषि केवल व्यापार का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है। वह अपने अधिकारों और खेती-किसानी के भविष्य की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार हैं। इस दौरान बलवान बैरागी, दिलबाग माजरा, इंद्र काजल आदि मौजूद रहे।
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अमेरिका का दूध भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं :
प्रदर्शनकारी किसानों ने डेयरी क्षेत्र पर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका का दूध भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं है और वहां की पशुपालन प्रणाली भारत से अलग है। लंबी दूरी से दूध का आयात संभव नहीं है, और यदि पहुंचेगा तो यह केमिकल युक्त या प्रोसेस्ड रूप में होगा, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे देश के डेयरी किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
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