फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Only two rupees will be spent on artificial insemination of a goat

एक बकरी के कृत्रिम गर्भाधान पर आएगा सिर्फ दो रुपये खर्च

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 12:21 AM IST
विज्ञापन
Only two rupees will be spent on artificial insemination of a goat
सुरेंद्र दलाल
विज्ञापन

हिसार। केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म अब भेड़-बकरियों की देसी नस्ल को संरक्षित करेगा। देश भर में बकरी की 26 देसी नस्ल हैं। इन नस्ल को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (एआई) यानी कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। एक बकरी के कृत्रिम गर्भाधान पर महज एक से दो रुपये का खर्च आएगा। एक बकरे के एक बार के सीमन से 100 बकरियों को गर्भ धारण कराया जा सकता है।
केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म (सीएसबीएफ) ने पिछले वर्ष कृत्रिम गर्भाधान को शुरू किया था। इसके बेहतर परिणाम मिलने पर इसे देश भर में प्रसारित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। केंद्रीय भेड़ प्रजनन केंद्र ने कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए उच्च नस्ल के बकरे और मेढ़े तैयार किए हैं। जिनका उपयोग एआई तकनीक के लिए ही किया जाएगा। फार्म ने अपनी देसी नस्लों विस्तार देने के लिए इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है।
विज्ञापन

कुल पशुधन में 27.8 फीसदी बकरी और 13.8 प्रतिशत भेड़
देसी नस्लों का सीमन ही देश भर में कृत्रिम गर्भाधान के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्रीय भेड़ अनुसंधान केंद्र में भी देसी नस्लों की भेड़-बकरियों को ही रखा जाएगा। संकर किस्म की नस्लों को धीरे धीरे केंद्र से हटाया जाएगा। दरअसल भारतीय नस्लों की गुणवत्ता के चलते उन्हें बढ़ावा देने का फैसला लिया है। देसी किस्म की 26 नस्लों को संरक्षित किया जाएगा। इस समय देश में 14.9 करोड़ बकरी और 7.4 करोड़ भेड़ हैं। वर्ष 2019 की पशुगणना के अनुसार कुल पशुधन में 27.8 प्रतिशत बकरी और 13.8 प्रतिशत भेड़ हैं। देश में सबसे अधिक भेड़ तेलंगाना और बकरी राजस्थान में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन 26 नस्लों को बढ़ाने का लिया फैसला
बीटल, बरबरी, जमुनापारी, मेहसाना, गद्दी, चियांगथागी, चेगू, सिरोही, मारवाड़ी, जखराना, गोहिलवाड़ी, झालावाड़ी, कच्छी, सूरती, संगमनेरी, उस्मानावादी, मालावारी, गंजम, बंगाल, कनी आडू, टेरेसा, कोडी आडू, अट्टा पाड़ी, कोंकानयाल, बेरारी, पंतजा
देशभर में उपलब्ध कराया जाएगा मेढे़-बकरे का सीमन
केंद्र की ओर से अब तक 32415 उत्तम नस्ल के मेढे़, 4446 भेड़, 1373 उत्तम नस्ल के बकरे देश के विभिन्न संस्थानों को दिए गए हैं। 2022 से केंद्र देसी नस्ल की भेड़-बकरियों का सीमन भी उपलब्ध कराएगा। इसके लिए हिमाचल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर प्राथमिक राज्यों के तौर पर चुने गए हैं।

देसी नस्ल की भेड़-बकरियों को कृत्रिम गर्भाधान के जरिये संरक्षित किया जाएगा। इन नस्ल का सीमन देश भर में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए काम शुरू हो चुका है। एक बकरी पर कृत्रिम गर्भाधान में केवल एक से दो रुपये का खर्च ही आएगा। एक दवा का उपयोग कर सभी बकरियों-भेड़ों को एक ही समय में एक साथ गर्भाधान के लिए हीट में लाया जा सकता है।
- डॉ. एके मल्होत्रा, निदेेशक, केंद्रीय भेड़ अनुसंधान केंद्र ,हिसार।
भेड़ पालने वाले टॉप टेन स्टेट
राज्य भेड़
तेलंगाना 1.91 करोड़
आंध्रप्रदेश 1.76 करोड़
कर्नाटक 1.11 करोड़
राजस्थान 79 लाख
तमिलनाडू 40.50 लाख
जेएंडके 30.20 लाख
महाराष्ट्र 20.70 लाख
गुजरात 10.80 लाख
ओड़िशा 10.60 लाख
उत्तरप्रदेश 10 लाख
बकरी पालने वाले टॉप टेन स्टेट
राजस्थान 2.8 करोड़
पश्चिम बंगाल 1.63 करोड़
उत्तरप्रदेश 1.45 करोड़
बिहार 1.28 करोड़
मध्यप्रदेश 1.11 करोड़
महाराष्ट्र 1.60 करोड़
तमिलनाड़ू 90.90 लाख
झारखंड 9.10 लाख
ओड़िशा 60.40 लाख
कर्नाटक 60.20 लाख
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed