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ऑनलाइन कारोबार 73 प्रतिशत बढ़ा, दुकानदारों का काम घटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Sep 2021 12:32 AM IST
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Online business increased by 73 percent, the work of shopkeepers decreased
हिसार। ऑनलाइन कारोबार ने व्यापारियों को कड़ी चुनौती दी है। थोक व्यापारियों से लेकर खुदरा तक सभी के काम को बुरी तरह से प्रभावित किया है। लॉकडाउन के समय बंद हुई दुकानदारी के समय भी बिजली, पानी, कर्मचारियों का वेतन दुकानदारों को चुकाना पड़ा। इसके बदले सरकार से किसी तरह की छूट नहीं मिली। दुकानदारों ने कहा कि दुकान बंद होने के बाद भी हमारे मीटर चालू रहते हैं। व्यापारियों के कल्याण के नाम पर कई एलान किए गए लेकिन एक भी पूरा नहीं हो सका।
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व्यापारियों ने हाल ही में लगाए गए टैक्सों के प्रति रोष जाहिर किया। व्यापार कर यानी ट्रेड टैक्स को जजिया कर की संज्ञा दी। सरकार से तुरंत वापस लेने की मांग की। आयकर टैक्स, जीएसटी, मार्केट फीस, एक्साइज डयूटी, लाइसेंस फीस, प्रॉपर्टी टैक्स पहले ही चुका रहा है। सरकार व्यापारियों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। व्यापारियों ने कहा कि कोरोना में बुरी तरह से टूट चुके व्यापारियों को राहत का मरहम देने की बजाए सरकार उन पर नए टैक्स थोंप कर जख्मों को कुरेदने का काम कर रही है।
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सरकार ने हाल ही में धान की खरीद पर मार्केट फीस 1 प्रतिशत 4 प्रतिशत कर दी। जिससे व्यापारियों को अतिरिक्त भुगतान चुकाना होगा। सब्जी व फल पर भी दो प्रतिशत मार्केट फीस लगा दी। जिससे किसानों को भी नुकसान होगा। चाय की दुकान से लेकर बड़े से बड़े सभी उद्योगों पर ट्रेड टैक्स लगा दिया है। - बजरंग दास गर्ग, महासचिव, अखिल भारतीय व्यापार मंडल
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पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए। ऐसा हुआ तो आमजन को इससे फायदा मिलेगा। जब क्रूड ऑयल सस्ता हुआ तो लोगों को राहत नहीं दी गई। वैट व व टैक्स को दोगुना कर दिया गया। - आनंद गोयल, संरक्षक , पेट्रोल पंप एसोसिएशन
सरकार की ओर से व्यापारियों को सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता। नए टैक्स लगातार थोंप दिए जाते हैं। ऑनलाइन कारोबार पर कुछ लगाम होनी चाहिए। छोटे दुकानदारों को खत्म करने के लिए एक बड़ी साजिश चल रही है।
मंगल ढ़ालिया, प्रधान, हिसार युवा व्यापार मंडल
तीन नए कृषि कानूनों के बाद मंडी के अस्तित्व पर ही खतरा है। मंडी में खरीद होने पर टैक्स देना होगा। मंडी के गेट के बाहर ही सामान की खरीद फरोख्त होगी तो कुछ नहीं देना। ऐसे में मंडी में कौन सामान लाएगा। लाखों आढ़तियों के कारण करोड़ों परिवार प्रभावित होंगे।
सत्यप्रकाश आर्य, थोक व्यापारी ,मंडी एसोसिएशन
अनाज मंडी में करोड़ों रुपये खर्च कर दुकानें ली थी। अब दुकानों का कोई फायदा नहीं रह जाएगा। लोग टैक्स देकर सामान क्यों बेचेंगे। ऑनलाइन व्यापार से भी अधिक नुकसान आढ़तियों को होगा। सरकार व्यापारियों को सहयोग करे।
त्रिलोक चंद कंसल , प्रधान खल चूरी, एसोसिएशन
ऑटो मार्केट की दुकानों की समस्या का निदान होना चाहिए। यहां दुकानों को ट्रांसफर किए जाने पर लंबे समय से रोक लगी है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट निगम में मर्ज हो चुकी है। ऑटो मार्केट के दुकानदार सीवरेज, सफाई, स्ट्रीट लाइट के लिए भी चक्कर लगाते रहते हैं।
निरंजन गोयल, सचिव व्यापार मंडल, ऑटो मार्केट
ऑनलाइन बिजनेस ने रिटेलर मार्केट को बुरी तरह से प्रभावित किया है। करीब 30 प्रतिशत तक काम कम हुआ है। ऑनलाइन में डुप्लीकेट सामान भी खूब खपाया जाता है। ऑनलाइन व्यापार के कारण छोटे दुकानदार खत्म होते जा रहे हैं।
टीनू उर्फ शुभम आहूजा, प्रधान राजगुरु मार्केट वेलफेयर एसो.
आंकड़ों के अनुसार ऑनलाइन कारोबार 73 प्रतिशत बढ़ा है। हमारी दुकानों में काम में बढ़ोतरी नहीं हुई। एक दुकान से चार से पांच परिवार पलते हैं। अगर खुदरा बाजार प्रभावित हुआ तो लाखों करोड़ों परिवार बेरोजगार होंगे।
सुरेंद्र बजाज, महासचिव राजगुरु मार्केट वेलफेयर एसो.
आग लगने की स्थिति में दुकानदार को दस लाख से अधिक का सामान होने पर कुछ नहीं मिलता। अगर 9 लाख 99 हजार 999 रुपये का सामान जला दिखाएं तो भी 30 प्रतिशत तक ही मिलता है। व्यापारियों के लिए बीमा सुविधा होनी चाहिए।
पंकज दीवान, होलसेल इलैक्ट्रिक ,मार्केट
सभी खाद्य पदार्थों से सभी तरह के टैक्स हटाए जाने चाहिए। जिससे गरीब आदमी को भोजन उपलब्ध कराने में आसानी हो। घरेलू व छोटे कुटीर करमुक्त होने चाहिए। उनको पैकिंग की बजाए खुले उत्पाद बेचने की अनुमति होनी चाहिए।
सत्यपाल अग्रवाल, प्रदेशाध्यक्ष सजग संस्था
एमआरपी और टैक्स स्लैब के कारण काफी दिक्कत आ रही है। एक जूता 1400 एमआरपी का हो वह होलसेल में 950 का हो तो हमें 1400 पर ही टैक्स देना होता है। जिसमें करीब 200 से अधिक टैक्स चला जाता है। हमें इनपुट 5 प्रतिशत के हिसाब से 50 रुपये ही मिलेगा।
प्रवीण गुप्ता ,प्रधान ग्रीन स्कवायर मार्केट, हिसार
कई प्रदेशों में मार्केट कमेटी नहीं है। वहां से आने वाले खल बिनौले को लेकर हमें जीएसटी में परेशानी आती है। जब जीएसटी लग गया तो मार्केट फीस क्यों ली जा रही है। डबल एल फार्म की अनिवार्यता खत्म होनी चाहिए।
अशोक गर्ग, अनाज मंडी पूर्व प्रधान,
सरसों के तेल में भी बड़ी कंपनियां आ चुकी हैं। ऐसे में छोटे मिल संचालकों का लंबे समय तक टिक पाना एक चुनौती है। बड़ी इंडस्ट्री लाखों टन की खरीद एक साथ करती है। उनका उत्पादन भी लाखों टन में होता है। छोटे व्यापारी को खर्च अधिक आता है।
विनोद गर्ग , प्रधान आयल मिल एसोसिएशन
इलेक्ट्रोनिक सामान पर जीएसटी कम किया जाना चाहिए। टीवी, फ्रिज, एसी आज हर परिवार की जरूरत हैं। उन पर 28 प्रतिशत टैक्स नहीं होना चाहिए। इसे कम करना चाहिए। इसके लिए सरकार को टैक्स कम होना चाहिए।
एनके गोयल, अर्बन एस्टेट अग्रवाल प्रधान
ऑटो मार्केट में भी बरामदे खाली कराए जाने चाहिए। जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सके। स्वच्छता, पेयजल की समस्या का भी निदान कराया जाए। ऑटो मार्केट में स्वच्छता के लिए अलग से कर्मी होने चाहिए।

हंसराज नारंग, आटो मार्केट विश्वकर्मा धर्मशाला इंचार्ज
जब कोई व्यापारी जीएसटी रिर्टन भरने में एक दिन लेट हो जाए तो उसे एक महीने बाद इनपुट मिलता है। देरी होने पर सरकार 18 प्रतिशत ब्याज लेती है। अगर किसी के इनपुट पर टैक्स देना हो तो 6 प्रतिशत देती है। लेने देने का ब्याज अलग अलग क्यों।
पवन गिरधर, सीए
बजरंग दास गर्ग, प्रधान व्यापार मंडल हरियाणा
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