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अब किताबों से आगे पढ़ाई: कक्षा 3 से 8 तक सीटी और एआई अनिवार्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:04 AM IST
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Now beyond textbooks: CT and AI compulsory from Classes 3 to 8
हिसार। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा में बड़े बदलाव करते हुए कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अनिवार्य कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य विद्यार्थियों को 2030 तक एआई-लिटरेट बनाना और उन्हें तकनीक आधारित भविष्य के लिए तैयार करना है। यह कदम शिक्षा को और अधिक व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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सीबीएसई की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अब बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं से ही तार्किक सोच, समस्या समाधान, पैटर्न पहचान और डिजिटल समझ जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों को खेल-आधारित और गतिविधि-आधारित तरीकों से इन अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा जबकि कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को एआई के मूल सिद्धांत, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग की बुनियादी जानकारी और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों से अवगत कराया जाएगा।
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नई व्यवस्था के तहत पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग, केस स्टडी और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान पर आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी। इस पद्धति से छात्रों में रचनात्मकता, नवाचार और विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल विद्यार्थियों को न केवल परीक्षा के लिए बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करेगी।
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सीबीएसई ने इस निर्णय के तहत पारंपरिक पाठ्यपुस्तकों की भूमिका को कम करते हुए डिजिटल कंटेंट, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और सपोर्ट बुक्स का अधिक उपयोग करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही, विद्यार्थियों को इंटरएक्टिव माध्यमों से पढ़ाया जाएगा जिससे वे विषयों को बेहतर तरीके से समझ सकें। शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि वे नई तकनीकों और शिक्षण विधियों के अनुरूप खुद को अपडेट कर सकें और छात्रों को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।


आज के डिजिटल युग में एआई और तकनीकी ज्ञान का महत्व बढ़ता जा रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर पर इसकी शुरुआत करना एक दूरदर्शी कदम है, जिससे छात्रों में तकनीकी कौशल विकसित होंगे। इसके अलावा यह छात्रों की निर्णय लेने की क्षमता, तार्किक सोच और समस्या सुलझाने की योग्यता को भी मजबूत करेगा। भविष्य में यह कौशल उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर अवसर दिलाने में सहायक साबित होगा। सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन विषयों को बोझ के रूप में नहीं पढ़ाया जाएगा। इसे रोचक और सरल गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा, ताकि बच्चों में सीखने की रुचि बनी रहे और वे इसे सहजता से ग्रहण कर सकें।
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