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अमरूत योजना के तहत पेयजल लाइन बिछा रही एजेंसी को थमाया क्लॉज थ्री का नोटिस
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अमरूत योजना के तहत बिछाई गई पेयजल लाइन से किया गया कनेक्शन।
- फोटो : Hisar
अमित भारद्वाज
हिसार। शहर में अमरूत योजना के तहत पेयजल लाइन बिछाने का काम कर रही एजेंसी को निगम प्रशासन ने क्लॉज थ्री (काम छीनना) का नोटिस थमा दिया है। नोटिस के माध्यम से निगम ने एजेंसी से पूछा कि क्यों न आपका टेंडर रद्द कर बाकी बचे काम को रिस्क एंड कॉस्ट के आधार पर करा लिया जाए। अब कंपनी को इस नोटिस का जवाब देना है। वहीं, एजेंसी का कहना है कि उसके जनवरी से बिल पेंडिंग पड़े हैं। निगम की तरफ से इस बिल को पास करवाने के लिए मुख्यालय नहीं भेजा रहा है।
बता दें कि इससे पहले एजेंसी को क्लॉस टू का नोटिस भी दिया जा चुका है। इस मामले में हुई सुनवाई में एजेंसी ने जवाब दिया था कि वह 12 अगस्त से काम शुरू कर देगी। मगर अभी तक एजेंसी ने काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में क्लॉज टू (काम न करने पर आखिरी चेतावनी) के तहत कुल बजट का दस प्रतिशत जुर्माना लगना भी तय माना जा रहा है। अमरूत योजना के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में 32 करोड़ की लागत से करीब 130 किलोमीटर की पेयजल लाइन बिछाई जानी थी। अक्टूबर 2018 में एजेंसी को काम का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था और उसे यह काम मार्च 2020 तक पूरा करना था। मगर निर्धारित समय अवधि में एजेंसी काम को पूरा नहीं कर सकी।
90-95 किलोमीटर की बिछाई पेयजल लाइन
अभी तक एजेंसी ने कुल 130 में से 90-95 किलोमीटर की ही पेयजल लाइन बिछाई है। इसमें से सबसे ज्यादा 35 किलोमीटर की लाइन वार्ड 11 में बिछाई जानी थी, जिसमें भी अभी तक 20 किलोमीटर की लाइन ही बिछाई गई है।
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12 अगस्त को काम शुरू करने को कहा था, अभी तक नहीं किया
क्लॉज टू के तहत हुई सुनवाई में एजेंसी ने मुख्यालय को जवाब दिया था कि वह हर हालत में 12 अगस्त से काम शुरू कर देगी और 30 अक्टूबर तक पूरा कर देगी, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं किया है। वार्ड-11 के सातरोड़ में मई से काम रुका हुआ है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल एजेंसी की तरफ से सातरोड़ में सिर्फ कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है और वह भी करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू किया गया है।
एजेंसी का तर्क : निगम नहीं भेज रहा पेंडिंग बिल
उधर, एजेंसी का कहना है कि उसके जनवरी से बिल पेंडिंग पड़े हैं। निगम की तरफ से इस बिलों को पास करवाने के लिए मुख्यालय नहीं भेजा रहा है। एजेंसी की मानें तो उसके करीब पांच करोड़ रुपये के बिल पेंडिंग पड़े हैं। उसके पास पाइप भी नहीं है। बिल पास होने पर मिलने वाले पैसे ही पाइप मंगवाए जाएंगे।
यह होगी क्लॉज थ्री के तहत कार्रवाई
क्लॉज थ्री के तहत एजेंसी का टेंडर रद्द कर बचे हुए काम का उसी लागत में दोबारा से टेंडर लगाया जा जाता है। अगर वह टेंडर निर्धारित लागत से ज्यादा में लगता है तो बढ़ी हुई लागत एजेंसी से ही वसूल की जाएगी। यही नहीं एजेंसी को ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है। क्लॉज थ्री के तहत हुई कार्रवाई को लेकर एजेंसी को विभाग में अपील करने का मौका भी नहीं दिया जाता है। वह सिर्फ कोर्ट में ही इसके खिलाफ अपील कर सकती है।
एजेंसी ने अपने वादे के अनुसार अभी तक काम शुरू नहीं किया है। काम शुरू न होने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। निगम की तरफ से एजेंसी को क्लॉज थ्री का नोटिस दिया जा चुका है। - गौतम सरदाना, मेयर
निगम ने काफी समय से बिल लटकाए हुए हैं। बिना एडवांस पैसे कंपनी पाइप नहीं दे रही है। निगम को नेशनल हाईवे व वन विभाग से परमिशन लेनी है, लेकिन अभी तक नहीं ली। इस कारण से नेशनल हाईवे के साथ-साथ लाइन बिछाने का काम पेंडिंग पड़ा है। मैंने निगम के क्लॉज थ्री का जवाब दे दिया है। निगम की यह कार्रवाई सरासर गलत है। - पीयूष आनंद, मैनेजर, केबीपीकेजेजेवी
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हिसार। शहर में अमरूत योजना के तहत पेयजल लाइन बिछाने का काम कर रही एजेंसी को निगम प्रशासन ने क्लॉज थ्री (काम छीनना) का नोटिस थमा दिया है। नोटिस के माध्यम से निगम ने एजेंसी से पूछा कि क्यों न आपका टेंडर रद्द कर बाकी बचे काम को रिस्क एंड कॉस्ट के आधार पर करा लिया जाए। अब कंपनी को इस नोटिस का जवाब देना है। वहीं, एजेंसी का कहना है कि उसके जनवरी से बिल पेंडिंग पड़े हैं। निगम की तरफ से इस बिल को पास करवाने के लिए मुख्यालय नहीं भेजा रहा है।
बता दें कि इससे पहले एजेंसी को क्लॉस टू का नोटिस भी दिया जा चुका है। इस मामले में हुई सुनवाई में एजेंसी ने जवाब दिया था कि वह 12 अगस्त से काम शुरू कर देगी। मगर अभी तक एजेंसी ने काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में क्लॉज टू (काम न करने पर आखिरी चेतावनी) के तहत कुल बजट का दस प्रतिशत जुर्माना लगना भी तय माना जा रहा है। अमरूत योजना के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में 32 करोड़ की लागत से करीब 130 किलोमीटर की पेयजल लाइन बिछाई जानी थी। अक्टूबर 2018 में एजेंसी को काम का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था और उसे यह काम मार्च 2020 तक पूरा करना था। मगर निर्धारित समय अवधि में एजेंसी काम को पूरा नहीं कर सकी।
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90-95 किलोमीटर की बिछाई पेयजल लाइन
अभी तक एजेंसी ने कुल 130 में से 90-95 किलोमीटर की ही पेयजल लाइन बिछाई है। इसमें से सबसे ज्यादा 35 किलोमीटर की लाइन वार्ड 11 में बिछाई जानी थी, जिसमें भी अभी तक 20 किलोमीटर की लाइन ही बिछाई गई है।
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12 अगस्त को काम शुरू करने को कहा था, अभी तक नहीं किया
क्लॉज टू के तहत हुई सुनवाई में एजेंसी ने मुख्यालय को जवाब दिया था कि वह हर हालत में 12 अगस्त से काम शुरू कर देगी और 30 अक्टूबर तक पूरा कर देगी, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं किया है। वार्ड-11 के सातरोड़ में मई से काम रुका हुआ है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल एजेंसी की तरफ से सातरोड़ में सिर्फ कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है और वह भी करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू किया गया है।
एजेंसी का तर्क : निगम नहीं भेज रहा पेंडिंग बिल
उधर, एजेंसी का कहना है कि उसके जनवरी से बिल पेंडिंग पड़े हैं। निगम की तरफ से इस बिलों को पास करवाने के लिए मुख्यालय नहीं भेजा रहा है। एजेंसी की मानें तो उसके करीब पांच करोड़ रुपये के बिल पेंडिंग पड़े हैं। उसके पास पाइप भी नहीं है। बिल पास होने पर मिलने वाले पैसे ही पाइप मंगवाए जाएंगे।
यह होगी क्लॉज थ्री के तहत कार्रवाई
क्लॉज थ्री के तहत एजेंसी का टेंडर रद्द कर बचे हुए काम का उसी लागत में दोबारा से टेंडर लगाया जा जाता है। अगर वह टेंडर निर्धारित लागत से ज्यादा में लगता है तो बढ़ी हुई लागत एजेंसी से ही वसूल की जाएगी। यही नहीं एजेंसी को ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है। क्लॉज थ्री के तहत हुई कार्रवाई को लेकर एजेंसी को विभाग में अपील करने का मौका भी नहीं दिया जाता है। वह सिर्फ कोर्ट में ही इसके खिलाफ अपील कर सकती है।
एजेंसी ने अपने वादे के अनुसार अभी तक काम शुरू नहीं किया है। काम शुरू न होने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। निगम की तरफ से एजेंसी को क्लॉज थ्री का नोटिस दिया जा चुका है। - गौतम सरदाना, मेयर
निगम ने काफी समय से बिल लटकाए हुए हैं। बिना एडवांस पैसे कंपनी पाइप नहीं दे रही है। निगम को नेशनल हाईवे व वन विभाग से परमिशन लेनी है, लेकिन अभी तक नहीं ली। इस कारण से नेशनल हाईवे के साथ-साथ लाइन बिछाने का काम पेंडिंग पड़ा है। मैंने निगम के क्लॉज थ्री का जवाब दे दिया है। निगम की यह कार्रवाई सरासर गलत है। - पीयूष आनंद, मैनेजर, केबीपीकेजेजेवी