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Hisar: ग्लोबल वार्मिंग में प्राकृतिक खेती का कोई सानी नहीं, पद्मश्री अवाॅर्डी डॉक्टर आरसी सिहाग ने बताए फायदे

Sat, 03 Feb 2024 09:16 AM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 03 Feb 2024 09:16 AM IST
सार

पद्मश्री अवाॅर्डी डॉ. आरसी सिहाग ने बताया कि पिछले दिनों कृषि विभाग के उच्च अधिकारी ने मुझे बताया कि कुरुक्षेत्र के एक किसान ने 5 एकड़ में यूरिया के 50 बैग डाल दिए, लेकिन मुझे विश्वास नहीं हुआ। इस पर मैंने कई किसानों से इस बारे में पूछा तो यह बात सही निकली।

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no match for natural farming in global warming, Padmashree awardee Dr. RC Sihag in Hisar told benefits
प्राकृतिक खेती - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ग्लोबल वार्मिंग में प्राकृतिक खेती का कोई सानी नहीं है। प्राकृतिक खेती में यूरिया की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह बीमारी का कारण। यही जमीन के स्वास्थ्य को भी बिगाड़ता है। यह कहना है कि पद्मश्री अवाॅर्डी डॉ. आरसी सिहाग का। वे शुक्रवार को एचएयू के स्थापना दिवस समारोह में शिरकत कर रहे थे। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एचएयू प्रशासन की तरफ से पद्मश्री विजेताओं का सम्मान किया गया, जिनमें वह भी शामिल थे।

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डॉ. सिहाग ने बताया कि पिछले दिनों कृषि विभाग के उच्च अधिकारी ने मुझे बताया कि कुरुक्षेत्र के एक किसान ने 5 एकड़ में यूरिया के 50 बैग डाल दिए, लेकिन मुझे विश्वास नहीं हुआ। इस पर मैंने कई किसानों से इस बारे में पूछा तो यह बात सही निकली। आलू व गोभी में किसान यूरिया के 7 से 10 बैग डालने तक जा चुका है। वहीं एक अन्य किसान ने बताया कि वह 7 से 8 बैग यूरिया, 4 से 5 डीएपी और 2 से 3 एनओपी के डाल रहा है। क्या खा रहे हैं हम। हमें सोचना पड़ेगा और प्राकृतिक खेती की तरफ जाना पड़ेगा।
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मछली पालन के लिए मुझे लोगों की गालियां भी सुननी पड़ी
मछली पालन को बढ़ावा देने पर पद्मश्री अवॉर्ड पाने वाले प्रगतिशील किसान करनाल स्थित नीलोखेड़ी निवासी सुल्तान सिंह भुटाना ने बताया कि मछली पालन के लिए मुझे लोगों की गालियां भी सुननी पड़ी, क्योंकि उस समय इस काम को पाप समझा जाता था। प्रदेश भर में मेरे अलावा सिर्फ दो और किसान मछली पालन करते थे। मैंने गांव में एक तालाब से मछली पालन शुरू किया। मछली पालन से मेरी पहली आय एक लाख रुपये से ज्यादा की हुई, जिससे मेरा हौसला बढ़ा।
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इसके बाद मैंने आसपास के गांवों के तालाब पर मछली पालन के लिए ठेके पर ले लिए। इसके अलावा मैंने अपनी 5 एकड़ जमीन पर भी मछली पालन शुरू कर दिया। मैंने मछलियों की ब्रिडिंग शुरू की, जो कोई नहीं करता था। इसके बाद अन्य किसान भी मुझसे जुड़ने लगे। मछली पालन से पंचायतों को भी काफी फायदा हुआ, जो तालाब शुरुआत में 500 रुपये के ठेके पर मिलते थे, आज उनका रेट 50 लाख रुपये तक पहुंच गया है।


मैं धोती कुर्ता पहनकर लड़कियों की तरह नाचने वाला पहला लड़का था
हरियाणवी कलाकार व पद्मश्री अवाॅर्डी महाबीर गुड्डू ने बताया कि मैं प्रदेश का पहला लड़का था, जो धोती-कुर्ता पहनकर लड़कियों की तरह नाचा। इस पर मुझे लोगों के काफी ताने भी सुनने पड़े। मेरा पहला गाना वर्ष 1972 में काफी चला था, जिसके बोले थे देश के ऊपर जान झोंक दी, लिख चिट्ठी गेर दियो। उस समय माहौल नहीं था। लोगों ने मुझे क्या-क्या कहा, लेकिन मैंने परवाह नहीं की। इसके बाद मैंने युवा महोत्सवों में भाग लेना शुरू कर दिया, जहां से मेरी कला निखरने लगी और लोग मुझे जानने लगे। मगर आज उसका यह आउटपुट आया कि अगर आज आपको धोती कुर्ते में हरियाणवी डांस करने वाले एक हजार लड़के चाहिए तो आपको 1500 मिल जाएंगे।

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