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नवरात्र कल से, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से 10:30 बजे तक
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हिसार। चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के लिए शहर के प्राचीन देवी भवन मंदिर को रंग-बिरंगी लड़ियों और लाइटों से सजाया गया है। मंदिर के बाहर पूजन सामग्री की स्टालों पर खरीदारी शुरू हो चुकी हैं। नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से सुबह 10:30 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुर्हूत दोपहर 12 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा।
ऋषि नगर स्थित विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी एवं राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था के पूर्व अध्यक्ष आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से पूजा और व्रत का विशेष फल मिलता है। नवरात्र में मां दुर्गा की अखंड ज्योत जलाने का और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का भी विशेष महत्व है। वहीं, पूजन सामग्री में रोली, मोली, चावल, लौंग, इलायची, सुपारी, पीली सरसों, हल्दी की गांठ, देसी घी, लाल कपड़ा, मां की लाल चुनरी, पानी वाला नारियल, दूध, दही, शहद, देसी खांड, गंगाजल, लाल आसन आदि चीजें प्रयोग होती हैं।
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इस बार 8 दिन के होंगे मां दुर्गा के नवरात्र
चैत्र नवरात्र 30 मार्च, चैत्र शुक्ल पक्ष रेवती नक्षत्र इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्ध योग में शुरू हो रहे हैं, जोकि काफी शुभ बताए जा रहे हैं। इस बार नवरात्र तृतीया तिथि क्षय होने के कारण 9 दिन के बजाय 8 दिन हाेंगे। 5 अप्रैल को अष्टमी तिथि को कन्या पूजन किया जाएगा और 6 अप्रैल को श्रीराम नवमीं मनाई जाएगी।
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हाथी पर सवार होकर आएंगी मां भगवती
आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में मां दुर्गा के इस रूप को भक्तों की समस्त इच्छाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। खास बात यह है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस समय में घटस्थापना करना लाभदायक और उन्नति कारक होगा। शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी और प्रस्थान भी हाथी पर बैठकर करेंगी। हाथी को सुख समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जा रहा है।
वीरवार को मंदिर के ट्रस्टी सुरेंद्र गुप्ता व अन्य सदस्य वैष्णो देवी से अखंड ज्योत लाने के लिए रवाना हुए थे। शनिवार को मंदिर में अखंड ज्योत पहुंच जाएगी। नवरात्र को लेकर मंदिर में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। - विपिन गोयल, सेक्रेटरी, देवी भवन मंदिर
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ऋषि नगर स्थित विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी एवं राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था के पूर्व अध्यक्ष आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से पूजा और व्रत का विशेष फल मिलता है। नवरात्र में मां दुर्गा की अखंड ज्योत जलाने का और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का भी विशेष महत्व है। वहीं, पूजन सामग्री में रोली, मोली, चावल, लौंग, इलायची, सुपारी, पीली सरसों, हल्दी की गांठ, देसी घी, लाल कपड़ा, मां की लाल चुनरी, पानी वाला नारियल, दूध, दही, शहद, देसी खांड, गंगाजल, लाल आसन आदि चीजें प्रयोग होती हैं।
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इस बार 8 दिन के होंगे मां दुर्गा के नवरात्र
चैत्र नवरात्र 30 मार्च, चैत्र शुक्ल पक्ष रेवती नक्षत्र इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्ध योग में शुरू हो रहे हैं, जोकि काफी शुभ बताए जा रहे हैं। इस बार नवरात्र तृतीया तिथि क्षय होने के कारण 9 दिन के बजाय 8 दिन हाेंगे। 5 अप्रैल को अष्टमी तिथि को कन्या पूजन किया जाएगा और 6 अप्रैल को श्रीराम नवमीं मनाई जाएगी।
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हाथी पर सवार होकर आएंगी मां भगवती
आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में मां दुर्गा के इस रूप को भक्तों की समस्त इच्छाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। खास बात यह है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस समय में घटस्थापना करना लाभदायक और उन्नति कारक होगा। शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी और प्रस्थान भी हाथी पर बैठकर करेंगी। हाथी को सुख समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जा रहा है।
वीरवार को मंदिर के ट्रस्टी सुरेंद्र गुप्ता व अन्य सदस्य वैष्णो देवी से अखंड ज्योत लाने के लिए रवाना हुए थे। शनिवार को मंदिर में अखंड ज्योत पहुंच जाएगी। नवरात्र को लेकर मंदिर में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। - विपिन गोयल, सेक्रेटरी, देवी भवन मंदिर