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अनुसंधान: अच्छी देखभाल हो तो मुर्राह भैंस साढ़े चार साल नहीं 3 साल 3 माह में पैदा करेगी पहला बच्चा

Thu, 09 Feb 2023 02:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 09 Feb 2023 02:45 AM IST
सार

केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान में 100 भैसों की पहली ब्यांत एक साल पहले कराई गई है। ब्यांत की अवधि में एक साल की यह उल्लेखनीय कमी केवल पशुओं की उचित देखभाल व नियमित पौष्टिक चारा देने भर से ही संभव हो गया है। 

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Murrah buffalo will give birth to first child in 3 years and 3 months
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के हिसार स्थित केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) हिसार के वैज्ञानिकों ने 100 मुर्राह भैंसों की पहली ब्यांत साढ़े चार साल के बजाय तीन साल तीन माह में कराने में सफलता पाई है। सभी झोटे-झोटी व भैंस पूर्णत: स्वस्थ हैं। पहली ब्यांत की अवधि में एक साल की यह उल्लेखनीय कमी केवल पशुओं की उचित देखभाल व नियमित पौष्टिक चारा देने भर से ही संभव हो गया है। पहली ब्यांत की अवधि घटने पर एक भैंस अपने पूरे जीवन काल में 10-12 बार प्रजनन कर सकेगी, जबकि अभी 9-10 बार ही झोटे-झोटी को जन्म देती है।

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सीआईआरबी निदेशक डॉ. टीके दत्ता ने बताया कि भैंसों की मुख्य समस्या देरी से परिपक्वता है, जिसके कारण आमतौर पर भैंस की पहली ब्यांत साढ़े चार साल में होती है। इससे पशुपालकों को काफी आर्थिक क्षति होती है। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए सीआईआरबी के विशेषज्ञ भैंसों के पालन-पोषण विधि पर शोध कर रहे थे।

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शोध में यह बात सामने आई कि समुचित आहार नहीं मिल पाने की वजह से कटड़ी या भैंस में पहला गर्भाधान ही देर से होता है। इसके बाद मुर्राह नस्ल की 100 कटड़ी चयनित कर उन्हें नियमित संतुलित आहार दिया गया। समय पर सभी टीके लगे। गर्मी, सर्दी, बारिश में विशेष ख्याल रखा गया। इसका परिणाम सकारात्मक रहा और सभी 100 भैंसों ने 3 साल 3 माह में पहले झाेटे या झाेटी काे जन्म दिया।

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इनके अलावा पंजाब के नाभा सेंटर व राजस्थान के चूरू जिले की 100 भैसाें में भी इसी प्रकार समुचित पोषण देकर पहली ब्यांत की अवधि को एक साल कम करने में सफलता मिली। इस शोध कार्य में पशुधन फार्म इंचार्ज डॉ. अनुराग भारद्वाज, डॉ. आरके शर्मा, डॉ. सुशील फुलिया व डॉ. एके तोमर शामिल थे।

 

एक दिन में दें औसतन 15 किलो चारा : संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि एक भैंस को प्रतिदिन औसतन 15 किलोग्राम चारा दिया जाना चाहिए। इसमें 2-3 किलोग्राम दाना मिश्रण और शेष हरा व सूखा चारा दें। हरा चारा 7 से 8 किलोग्राम व सूखा चारा 5-6 किलोग्राम होना चाहिए। हरे चारा के साथ सूखा चारा भी जरूर दें। 100 किलोग्राम दाना मिश्रण में 30 प्रतिशत खल, 40 प्रतिशत अनाज, 25 प्रतिशत ब्रान, राइस पालिस, चने की चूरी, 1-2 प्रतिशत नमक व 1 प्रतिशत खनिज मिश्रण रखें।



सम्मानित किए जाएंगे शोधकर्ता
निदेशक डाॅ. टीके दत्ता ने बताया कि ब्यांत अवधि कम होने से दूध उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ पशुपालकाें की आमदनी भी बढ़ेगी। इस शोध को पूरा करने वाले वैज्ञानिकाें काे जल्दी ही सम्मानित भी किया जाएगा।

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