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Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Mngali sandalwood sliced into the darkness of night, made Mnke

मंगाली-रात के अंधेरे में कटता चंदन, बनते मणके

Mon, 08 Jun 2015 01:27 AM IST
जितेंद्र सहार-राजेश सैनी/अमर उजाला हिसार
जितेंद्र सहार-राजेश सैनी/अमर उजाला हिसार Updated Mon, 08 Jun 2015 01:27 AM IST
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कैमरी रोड पर स्थित एक बड़ा गांव। चंदन की खुशबू यहां भले ही न महक रही हो, लेकिन लाल रंग की रंगत यहां छूट नहीं रही है। कुछ घरों में अब बेसमेंट बने हैं और इनमें रात के अंधेरे में तस्करी कर लाए गए लाल चंदन की लकड़ी से मणके काटने का काम धड़ल्ले से हो रहा है।
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इन घरों के आसपास कड़ी चौकसी है और एक में तो बाहर नजर रखने के लिए सीसीटीवी तक की व्यवस्था है। काम इस ढ़ंग से किया जा रहा है कि पड़ोस के लोगों को भी लाखों की कमाई वाले इस गोरखधंधे की खबर न हो।
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चंदन तस्करी में सामने आया था नाम

चंदन की तस्करी में मंगाली का नाम बार-बार आ रहा है। कुछ दिन पहले तो एक कारोबारी को ही चंदन की लकड़ी की खरीद मेें आंध्र प्रदेश पुलिस गिरफ्तार कर ले गई थी। गांव में इसके बाद कई दिन तक पुलिस के फेरे लगते रहे, लेकिन अब गांव का माहौल भले ही शांत सा दिखे पर मणकों पर चंदन की रंगत खूब चढ़ रही है। अमर उजाला की टीम ने गांव पहुंचकर पड़ताल की तो ग्रामीण काफी मशक्कत के बाद लाल चंदन के काले कारोबार के बारे में कुछ बताने को राजी हुए।
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ऐसे हो रहा काम

हिसार से करीब 13 किलोमीटर दूर कैमरी रोड स्थित गांव मंगाली में हम रात को करीब साढ़े 9 बजे पहुंचे। गांव में प्रवेश करते ही तिकोने चौक पर एक पुलिस चौकी है। गांव दो सड़कों के बीच फैला है।

गांव के तीन युवक, जिनको पहले ही तैयार कर लिया गया था कि वे गांव में चंदन के मणके बनाने के कारोबार का मुआयना कराएं। हमने गांव में मंदिर के साथ बने जलघर की ओर से प्रवेश किया। तब बिजली निगम की ओर से बिजली का कट लगा था।

बावजूद इसके गांव के घर, जो कि अब शहर की महंगी कोठियों जैसे हैं, पूरी तरह से रोशन दिखे। अधिकतर घरों में इन्वर्टर की रोशनी थी तो कई स्थानों पर जनरेटर भी चलते मिले।

युवक हमें गांव की कुछ गलियों से घुमाते हुए एक बड़े से मकान के पास ले गए। बाहर खड़ा कर एक युवक अंदर गया, करीब पांच मिनट बाद लौटा तो हमें लेकर घर में बने एक बेसमेंट में ले गया। यहां चंदन की लकड़ी के कुछ टुकड़े हमें दिखाए गए।

चार-पांच व्यक्ति अपने ऊपर लटकते बल्बों की रोशनी में मशीन से मणके बनाने में लगे थे। बहुत मिन्नत की और पहचान उजागर न करने का वादा किया तब जाकर वे एक फोटो खींचने देने के लिए राजी हुए।

दर्जनभर स्थानों पर चंदन का काम

मंगाली गांव में एक घर में बने बेसमेंट में चंदन की लकड़ी से मणके बनाने में जुटे ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग हर घर में लकड़ी से मणके बनाने का काम होता है। एक कोड़ी काटने पर 200 रुपये दिए जाते हैं।

फिलहाल करीब दर्जनभर व्यक्ति ही ऐसे हैं जो कि कहीं से चंदन की लाल लकड़ी का जुगाड़ करते हैं और इससे मणके बनाते हैं।

इसमें कुछ भरोसे के लोगों को ही शामिल किया गया है। कारोबार में दुश्मनी बढ़ी है और पुलिस को तुरंत सूचना पहुंच जाती है। इससे बचने के लिए काम कुछ इस प्रकार से किया जाता है कि पड़ोस के लोगों को भी चंदन के मणके बनाने की खबर न लगे। सारा काम रात के अंधेरे में ही किया जाता है।

चीनी हुए कम, ले गए मशीन

चंदन के लाल मणकों के सबसे बड़े खरीदार चीन के व्यापारी रहे हैं। महीने में किसी एक दिन गांव में इनका आगमन होता है और चोरी छिपे बोली के आधार पर इनको मणके थमाए जाते।

पैसों का भुगतान भी मौके पर ही होता। अब कारोबार से जुड़े ग्रामीण बताते हैं कि चीनी व्यापारी की संख्या घट रही है और इसका कारण वे कारोबार में बढ़ते रिस्क को मानते हैं।

साल भर पहले तक गांव में इनकी खुली मंडी लगती थी, लेकिन अब उंगलियों पर गिनने लायक चीनी ही यहां पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि चीनी यहां से मणके बनाने की विधि सीख कर इसके काम आने वाली मशीनों को भी साथ ले गए हैं।

खुशबू वाले चंदन से तौबा

मंगाली गांव में खुशबू वाले सफेद चंदन के मणके बनाने से ग्रामीण परहेज करते हैं। बताते हैं कि इस चंदन की खुशबू बहुत दूर तक जाती है और पता चल जाता है कि गड़बड़ है। ग्रामीणों की मानें तो आरंभ में कुछ लोग थोड़ा बहुत सफेद चंदन लेकर आए थे।


यह खुशबू देने के साथ काफी महंगा भी होता है। मगर इसके बाद कारोबारियों ने इससे तौबा कर लिया। गांव में लाल चंदन की खपत ज्यादा है। हर महीने यहां दो से तीन टन चंदन लकड़ी का इस्तेमाल आम बात है। लाल चंदन में ग्रामीण कई बार धोखा भी खाते हैं। क्योंकि लकड़ी के गट्ठे कई बार रंग हीन मिलते हैं।
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