लुवास कुलपति बीजेपी के एजेंट : तंवर
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मंगलवार को अचानक लुवास पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने कुलपति को बीजेपी का एजेंट करार दिया है। तंवर ने आरोप लगाया कि कुलपति ने अपना संदेश भेजकर विद्यार्थियों से कहा कि तंवर से मिलने पर उन्हें डिग्री नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कुलपति कितना भी उन्हें रोकने की कोशिश कर लें। लेकिन वे अगली बार फिर आएंगे और देखेंगे कि विद्यार्थियों को कौन डिग्री नहीं देेगा। उन्होंने लुवास में विद्यार्थियों से हॉस्टल में न मिलने देने की इस घटना को शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। तंवर ने बताया कि वे मंगलवार को हॉस्टल के हालात देखने आए थे। उनका कर्तव्य है कि वे सामाजिक, राजनीतिक एवं नैतिक तौर पर सरकार को उसकी खामियों से अवगत कराएं। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की धमकी के बाद विद्यार्थी उनसे वेटरनिरी कैंटीन में मिले। कैंटीन के हालात देखकर उन्होंने सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की हकीकत पर भी सवाल उठाया।
यह हुआ मामला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को मंगलवार को लुवास के अरावली हॉस्टल में विद्यार्थियों से मिलने के लिए आना था। कांग्रेस के छात्र नेता नवदीप दलाल ने बताया कि उन्होंने हॉस्टल प्रशासन से बात की थी। लेकिन मौके पर विद्यार्थियों को उनसे नहीं मिलने की चेतावनी दी गई। इसके बाद विद्यार्थी विश्वविद्यालय की वेटरनिरी कैंटीन चले गए। कुछ समय बाद वहां पहुंचे अशोक तंवर ने कैंटीन में विद्यार्थियों के साथ नाश्ता किया। इस दौरान उनके साथ एनयूएसआई के पदाधिकारी बबलू बिश्नोई, नवदीप दलाल, मनोज टांक, आनंद रेड्डू, सियाराम रावतखेड़ा व एनएसयूूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कथनी करनी में अंतर
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार गीता ज्ञान और संस्कृति की बात करती है। लेकिन उसकी कथनी और करनी में बेहद अंतर है। उन्हें जिस तरह से विद्यार्थियों से मिलने से रोका गया। उससे लगता है कि जरूर कोई गड़बड़ है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्र संघ चुनाव करवाने की बात तो कर रही है। लेकिन छात्रों से नहीं मिलने देने से उनकी मंशा की पोल खुल गई है।
पहले सूचना नहीं दी गई कि कितने लोग आएंगे। 50-60 लोगों के आने से हॉस्टल में समस्या हो सकती थी। पांच-सात आते तो समस्या नहीं होती। हमने मना नहीं किया था। हॉस्टल की व्यवस्था बनी रहे इसलिए हमने उचित कदम उठाए थे। अशोक तंवर खुद ही हॉस्टल नहीं आए। कुलपति ने छात्रों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कुछ भी नहीं कहा।
- डॉ. अशोक मलिक, एपीआरओ, लुवास