फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Lampy : 50% milk capacity decreased in sick cows

लंपी का कहर : बीमार गायों में घटी 50 फीसदी दूध की क्षमता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2022 12:24 AM IST
विज्ञापन
Lampy : 50% milk capacity decreased in sick cows
हिसार/अग्रोहा। सामान्य बुखार से शुरू हो रही लंपी बीमारी का गोवंश पर गहरा असर पड़ रहा है। सबसे अधिक तकलीफ दूध देने वाली गाय को झेलनी पड़ रही है। बीमारी से उबरने के बाद गाय पहले की अपेक्षा आधा दूध ही दे पा रही हैं। उसे सामान्य स्थिति में आने में कम से कम एक माह का समय लग रहा है। गायों में फैली इस बीमारी से पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है।
विज्ञापन

हिसार जिले में करीब एक लाख 75 हजार गोवंश हैं। इनमें से 782 गोवंश लंपी से ग्रसित हैं। बीमार 15 गोवंश की अब तक मौत भी हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्र में अधिक तेजी से फैली यह बीमारी गायों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है। इलाज में जरा सी लापरवाही न केवल पशु की जान के लिए खतरा बन रही है, बल्कि उसके दूध देने की क्षमता को भी असर डाल रही है।
विज्ञापन

अग्रोहा गोशाला में गोवंश की देखरेख में लगे डॉ. सुमित भुकर की मानें तो बीमारी की चपेट में आने से पशु बेहद कमजोर हो जा रहा है। जितनी गांठ शरीर के बाहर दिखती है, उतना ही अंदर वह पशु को तकलीफ देती है। दर्द व बुखार से कराहते पशु को राहत देने के लिए एंटी बॉयोटिक दिया जाता है। वह खाना-पीना छोड़ देता है। इससे कई गायों की स्थिति तो ऐसी हो जाती है कि वह अपने बछड़े को पीने भर का दूध भी नहीं दे पाती।
विज्ञापन
विज्ञापन

लंपी के 46 नए मामले आए, तीन हजार का हुआ टीकाकरण
जिले में शुक्रवार को भी 46 गोवंश लंपी से ग्रसित पाए गए। इनके साथ ही कुल संक्रमित पशुओं की संख्या 782 हो गई है। राहत की बात यह है कि पिछले पांच दिनों से गोशालाओं में नए केस नहीं मिले हैं। शुक्रवार को तीन हजार गोवंशों का टीकाकरण किया गया।
पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिले के 53 गांवों में लंपी के केस मिले हैं। शुक्रवार को जो 46 पशु संक्रमित मिले वह इन्हीं गांवों के हैं। कोई नया गांव संक्रमित नहीं हुआ है। इसके अलावा गोशालाओं में पिछले पांच दिन से कोई नया केस नहीं आया है। गोशालाओं में अभी केवल 140 केस हैं। गोशाला में 138 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी करीब 300 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। शुक्रवार को तीन हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया। अब तक 145700 पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। कुल एक लाख 75 हजार गोवंश का टीकाकरण किया जाना है।
लंपी का प्रभाव उन पशुओं में अधिक दिखता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) पहले से ही कमजोर होती है। बीमारी के चलते पशु और अधिक कमजोर पड़ जाता है। इसका असर दूध उत्पादन पर पड़ना स्वाभाविक है। पशुपालक बीमारी से स्वस्थ हुए पशु को भरपूर पौष्टिक आहार दें तो कुछ समय बाद पशु फिर पहले जैसा दुधारू हो जाएगा। - डॉ. नवीन कुमार, लंपी की वैक्सीन के खोजकर्ता
लंपी बीमारी की पहचान में जहां देरी हुई, दिक्कत भी वहीं अधिक है। गोशाला या ग्रामीण क्षेत्र में जिन लोगों ने पहले या दूसरे दिन रोग की पहचान कर पशु का उपचार शुरू कराया, वहां बीमारी नियंत्रित हो गई। जहां पशु को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा, साफ पानी और अन्य पौष्टिक आहार मिला वहां दूध उत्पादन पर कम असर पड़ा है। - श्रीभगवान बिश्नोई, उप निदेशक पशुपालन
पशुपालकों का छलका दर्द
एक गाय में लंपी के लक्षण थे। इलाज के बाद स्वस्थ हो गई, लेकिन अभी भी काफी कमजोर दिख रही है। चारा खाना कम कर दिया है। चिकित्सक की सलाह पर उसे हरा चारा, दलिया दे रहे हैं। केवल बछड़े को पिलाने भर का दूध दे रही है। शरीर के गांठों में सुधार आया है। - कृष्ण कुमार, अग्रोहा

दुधारू गाय में पांच दिन पहले लंपी के लक्षण दिखे। शरीर पर गांठ के अलावा पैरों में सूजन है। चिकित्सक की निगरानी में उपचार चल रहा है। बीमारी के चलते गाय ने दूध देना बहुत कम कर दिया है। कई अन्य पशुपालकों ने भी बताया है कि बीमारी के चलते दूध कम हो गया है।
- बलबीर सिंह, अग्रोहा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed