{"_id":"9bc59c004f309c01d1a95eaec92e786a","slug":"lady-sarpanch-s-family-will-run-the-panchayat-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पढ़ी लिखी महिला सरपंचों की चौधर भी परिवार ही चलाएंगे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पढ़ी लिखी महिला सरपंचों की चौधर भी परिवार ही चलाएंगे
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2016 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नियमों और शर्तों की आधार पर इस बार पढ़ी-लिखी आधी दुनिया को भले ही सरपंची का अधिकार मिल गया, लेकिन बागडोर परिवार के हाथों में है। पहले चरण के चुनाव के बाद नवनिर्वाचित महिला सरपंचों से अमर उजाला ने बातचीत की तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।
विज्ञापन
अमर उजाला ने चयनित 10 महिला सरपंचों से टेलीफोन पर बात की तो किसी ने फोन नहीं उठाया। फोन पति या फिर भाई या बेटे ने उठाया। इससे जाहिर है कि पति, ससुर, भाई या बेटा सरपंची की बागडोर को संभालने की हसरत पाले हुए हैं। हालांकि पहले की अपेक्षा महिलाएं मुखर हुई हैं, लेकिन पंचायत चुनाव में सरपंची की चौधर की चौधराहट में समूचा परिवार रंगा हुआ नजर आ रहा है।
विज्ञापन
पहले चरण में 45 महिला सरपंच
पंचायत चुनाव के पहले दौर में हिसार जिले में 118 सरपंच हैं। इनमें से 45 महिला सरपंच है। चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीट यानि 39 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गईं थी। इस हिसाब से रिजर्व सीटों से अधिक सीट महिला सरंपचों के हाथों में आई।
विज्ञापन
महिलाओं ने छह सीटों पर पुरुष प्रत्याशियों को शिकस्त देते हुए सीटों पर कब्जा जमाया है। यह सुखद स्थिति है, लेकिन आगे सरपंची की बागडोर कौन संभालेगा इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ साक्षर महिला सरपंचों से अमर उजाला ने बात करके उनकी कार्यप्रणाली के बारे में जाना।
बातचीत के अंश
सरंपच ज्योति को फोन किया तो उनके पति ने कहा कि वो बात नहीं कर सकती। उनके पति से पूछने पर उन्होंने कहा कि सरपंच का काम तो हमें ही करना है या फिर घर के किसी पुरूष को।
सरपंच अंजू कुमारी को फोन करने पर उनके पति ने ही जवाब दिया और कहा कि महिला कहां इतना आती-जाती हैं। गांव के काम तो हम ही करते हैं। शुरुआत में थोड़ी परेशानी आएगी। बाद में वो ही सारा काम संभालेंगी।
सरपंच सुषमा देवी को फोन करने पर भी उनके पति ने कहा कि गांम कै हिसाब सै ही काम करांगे, सरपंची तो घरवाले ही चला सकै सै। लुगाईया कै बस की बात कोन्या।
सरपंच रेखा को फोन करने पर उनके पति ने फोन उठाया। उन्होंने जवाब दिया कि घरवालों के साथ के बिना कुछ ना कर सकै सै। सरपंची का सारा काम हाम नै ही करना पड़ सै।
सरपंच सावित्री देवी को फोन करने पर किसी परिवारजन ने फोन उठाया तो उन्होंने कहा कि अभी नई-नई सरपंच बनी हैं। वैसे भी महिलाएं कहां इतना आती-जाती हैं। घरवालों के सहारे ही महिलाओं को सरपंची करनी पड़ती है। हालांकि भविष्य में वो ही सरपंची करेंगी।
सरपंच सुमन देवी को फोन करने पर उनके पति ने ही फोन उठाया और कहा कि महिलाएं अकेले दम पर काम ना कर सकै सै, घरवालों के साथ के बिना काम ना कर सके है।
सरपंच एकता को फोन करने पर उनके पति ने ही फोन उठाया और सरपंच से बात करवाने से इनकार करते हुए कहा कि महिलाएं सरपंची के काम नहीं करती। ये काम तो हम ही करते हैं।
दिलचस्प बात
- 10 में से एक भी महिला सरपंच ने फोन रिसीव नहीं किया, उनके पतियों ने फोन उठाया और बात की। अमर उजाला संवाददाता ने महिला सरपंच से बात करने की बात कही तो अधिकांश ने कहा हम ही सरपंच हैं। बताओ क्या बात है।
- बातचीत में दूसरी बात ये सामने आई कि कोई भी महिला सरपंच अकेले अपने दम पर सरपंच का दायित्व नहीं निभा रही। लगभग सभी महिला सरंपच अपने कार्यों के लिए अपने पति, ससुर या फिर पुत्रों पर ही निर्भर हैं।