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ज्योति मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट का खटखटाएगी दरवाजा: हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत; जासूसी का आरोप, जेल में है बंद

Fri, 08 May 2026 12:51 PM IST
Naveen माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा) Published by: Naveen Updated Fri, 08 May 2026 12:51 PM IST
सार

पुलिस और जांच एजेंसियों का आरोप है कि ज्योति अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी 'एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश' के संपर्क में आई थीं। इस दौरान मोबाइल के माध्यम से दोनों के बीच निरंतर संपर्क बना रहा।

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Jyoti Malhotra to Move Supreme Court: Denied Bail by High Court; Accused of Espionage, Currently Jailed
ज्योति मल्होत्रा - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के गंभीर आरोपों में घिरीं यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा अब जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। हिसार की सेंट्रल जेल-2 में करीब एक साल से बंद ज्योति की जमानत याचिका को स्थानीय अदालत और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुके हैं।

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केस की पृष्ठभूमि
'ट्रैवल-विद-जो' नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाली ज्योति मल्होत्रा को 16 मई 2025 को हिसार के सिविल लाइन थाना में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस और जांच एजेंसियों का आरोप है कि ज्योति अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी 'एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश' के संपर्क में आई थीं। इस दौरान मोबाइल के माध्यम से दोनों के बीच निरंतर संपर्क बना रहा। इसके साथ ही एजेंसियों को आशंका है कि इस संपर्क के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया है।
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समानता के आधार पर जमानत की मांग
ज्योति मल्होत्रा के वकील, एडवोकेट रविंद्र सिंह ढुल ने बताया कि वे अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। उनके बचाव का मुख्य आधार 'समानता' होगा। हरियाणा और पंजाब के दो अन्य युवकों को, जिन पर समान रूप से जासूसी और सीक्रेट एक्ट की धाराएं लगी थीं, उन्हें जमानत मिल चुकी है। ज्योति के मामले में भी इसी तथ्य को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग की जाएगी। -एडवोकेट रविंद्र सिंह ढुल।
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हाईकोर्ट में क्यों खारिज हुई थी याचिका
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं को देखते हुए ज्योति को राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए उन साक्ष्यों को संज्ञान में लिया था, जो यह संकेत देते हैं कि याचिकाकर्ता का संपर्क पड़ोसी देश के संदिग्ध अधिकारियों से था।

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