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इसै आश्वासन पै उठणा था तो फेर यो दंगल क्यूं ठाया
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Mon, 15 Feb 2016 01:30 AM IST
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जाट संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के आंदोलन खत्म करने की घोषणा के बाद भी रेलवे ट्रैक पर बैठे प्रदेशाध्यक्ष हवासिंह सांगवान के खिलाफ नारेबाजी करने वाले लोगों ने कहा कि इस तरह के आश्वासन तो उन्हें हर बार मिलते रहे हैं।
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इसै ही आश्वासन पै धरना उठणा था तो फेर यो दंगल क्यूूं ठाया। हाम्नै तो आरक्षण के हल के बाद ही उठाना चाहिए था।
उन्होंने सांगवान पर आरोप लगाया कि वे अपनी बात पर खरे नहीं उतरे, जब कोई दो मंत्री यहां बुलाकर आश्वासन दिलवाने की बात हुई तो वे यहां क्यों नहीं आए।
यह बोले ग्रामीण
मिर्जापुर से ट्रैक पर पहुंचे बदन सिंह ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत में क्या फैसला हुआ, उन्हें पता ही नहीं। हम तो फैसला सुनने आए थे, लेकिन निर्धारित समय से पहले ही सांगवान फैसला सुनाकर चले गए। इसी तरह रायुपर, लाडवा और अन्य गांवों के लोग 11 बजे के बाद धरनास्थल पर पहुंचे। मगर जब तक जिला अध्यक्ष दलजीत पंघाल और प्रदेशाध्यक्ष सांगवान जा चुके थे।
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यू बात रात नै ही बता देते तो...
सुबह साढ़े दस बजे जब हवासिंह सांगवान ने ट्रैक पर सार्वजनिक फैसला सुनाया तो लोग असंतुष्ट नजर आए। धरनारत लोगों ने कहा कि ये फैसला तो रात को भी सुना सकते थे। हमें अखबारों में पढ़कर पता चला। अगर सरकार से बातचीत हो चुकी थी तो हमें रात को ही बता देते कम से कम रात को ही हम अपने अपने घर तो चले जाते।
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पांच साल की रिकॉर्डिंग है मेरे पास...
विरोध के दौरान भगाणा के विजयपाल ने कहा कि हमें आरक्षण चाहिए, यह हमारा हक है। मैं आरक्षण के लिए काम कर रहा हूं। मुझे पता है कौन-कौन जाट नेता राजनेताओं से किस-किस तरह की बातें करते हैं। पांच साल की रिकॉर्डिंग है एक-एक जाट नेता की। ये सामने कुछ और होते हैं और पीछे से समाज के लिए क्या बात करते हैं, हमें सब पता है।
खाना बनकर हुआ तैयार, देना पड़ा ढाबे पर
फैसले से अंजान ट्रैक पर बैठे कुछ लोगों ने धरनारत लोगों के लिए खाना तैयार कर लिया। जब जाट नेताओं ने फैसला सुनाया तो धरना खत्म करने की बात कही गई। धरनास्थल पर तैयार खाना फिर उन्हें ढाबे पर भेजना पड़ा। विरोध में उतरे और धरने पर बैठे लोग बिना खाना खाए ही चले गए।