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Hisar News: बीमा कंपनी को 27,043 रुपये अतिरिक्त क्लेम और ब्याज चुकाने का आदेश
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हिसार। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कम फसल बीमा क्लेम देने के मामले में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को किसान रघुबीर सिंह को 27,043 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया है। इस राशि पर एक दिसंबर 2021 से नौ फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा।
इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए छह हजार और मुकदमे के खर्च के चार हजार रुपये भी देने होंगे। कंपनी को आदेश की पालना 45 दिन के भीतर करनी होगी।
कुतुबपुर गांव निवासी रघुबीर सिंह ने खरीफ 2021 में अपनी 2.24 हेक्टेयर कपास की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। पंजाब नेशनल बैंक ने उनके खाते से 9,589 रुपये प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को जमा कराया था। फसल खराब होने पर किसान ने करीब दो लाख रुपये के नुकसान का दावा किया, लेकिन कंपनी ने केवल 11,821 रुपये का क्लेम दिया।
आयोग ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि सरकारी आकलन के अनुसार कपास की फसल का नुकसान 17,350 रुपये प्रति हेक्टेयर था। इस हिसाब से 2.24 हेक्टेयर फसल के नुकसान की कुल राशि 38,864 रुपये बनती है। किसान को 11,821 रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था, इसलिए आयोग ने शेष 27,043 रुपये देने का आदेश दिया।
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सेवा में कमी और लापरवाही
आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने क्लेम की गणना का पूरा विवरण पेश नहीं किया। निर्धारित समय में क्लेम का भुगतान भी नहीं किया गया। इसे सेवा में कमी और लापरवाही मानते हुए आयोग ने किसान की शिकायत स्वीकार कर ली। आयोग के अध्यक्ष जगदीप सिंह, सदस्य रजनी गोयत और डॉ. अमिता अग्रवाल की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
बैंक और कृषि विभाग को राहत
मामले में पंजाब नेशनल बैंक और कृषि विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया। आयोग को उनकी ओर से सेवा में कोई कमी नहीं मिली। यदि बीमा कंपनी 45 दिन में आदेश की पालना नहीं करती है तो डिफॉल्ट अवधि के लिए उसे 12 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा।
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इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए छह हजार और मुकदमे के खर्च के चार हजार रुपये भी देने होंगे। कंपनी को आदेश की पालना 45 दिन के भीतर करनी होगी।
कुतुबपुर गांव निवासी रघुबीर सिंह ने खरीफ 2021 में अपनी 2.24 हेक्टेयर कपास की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। पंजाब नेशनल बैंक ने उनके खाते से 9,589 रुपये प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को जमा कराया था। फसल खराब होने पर किसान ने करीब दो लाख रुपये के नुकसान का दावा किया, लेकिन कंपनी ने केवल 11,821 रुपये का क्लेम दिया।
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आयोग ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि सरकारी आकलन के अनुसार कपास की फसल का नुकसान 17,350 रुपये प्रति हेक्टेयर था। इस हिसाब से 2.24 हेक्टेयर फसल के नुकसान की कुल राशि 38,864 रुपये बनती है। किसान को 11,821 रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था, इसलिए आयोग ने शेष 27,043 रुपये देने का आदेश दिया।
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सेवा में कमी और लापरवाही
आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने क्लेम की गणना का पूरा विवरण पेश नहीं किया। निर्धारित समय में क्लेम का भुगतान भी नहीं किया गया। इसे सेवा में कमी और लापरवाही मानते हुए आयोग ने किसान की शिकायत स्वीकार कर ली। आयोग के अध्यक्ष जगदीप सिंह, सदस्य रजनी गोयत और डॉ. अमिता अग्रवाल की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
बैंक और कृषि विभाग को राहत
मामले में पंजाब नेशनल बैंक और कृषि विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया। आयोग को उनकी ओर से सेवा में कोई कमी नहीं मिली। यदि बीमा कंपनी 45 दिन में आदेश की पालना नहीं करती है तो डिफॉल्ट अवधि के लिए उसे 12 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा।