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शहर में 300 से अधिक चल रहे पीजी, रजिस्ट्रेशन एक का भी नहीं

Sun, 23 Feb 2020 12:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 12:15 AM IST
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in hisar 300 pg run without registration
हिसार। शहर में नियमों को ताक पर रखकर 300 से अधिक पीजी (पेइंग गेस्ट) चल रहे हैं। इनमें से एक भी पीजी का नगर निगम कार्यालय में रजिस्ट्रेशन नहीं है। कॉमर्शियल नक्शे, 250 वर्ग गज जगह से लेकर फायर एनओसी लेने तक की शर्तें नगर निगम प्रशासन ने पीजी संचालकों के लिए लगाई हुई हैं। मगर इनमें से एक भी शर्त को पीजी संचालक पूरा नहीं कर रहे हैं। इसी के चलते निगम प्रशासन ने हाल ही में 20 से अधिक पीजी संचालकों को नोटिस जारी किए हैं।
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उल्लेखनीय है कि शनिवार को चंडीगढ़ में पीजी में आग लगने से हिसार के लक्ष्मी विहार निवासी छात्रा मुस्कान महता की मौत हो गई। मुस्कान चंडीगढ़ स्थित एसडी कॉलेज की छात्रा थी।
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कोचिंग संस्थानों के पास बनीं कॉलोनियों में पीजी की भरमार
शहर में सबसे अधिक पीजी कोचिंग संस्थानों के आसपास बनीं कॉलोनियों में चल रहे हैं। ऋषि नगर, जवाहर नगर, रामपुरा मोहल्ला, बैंक कॉलोनी, कृष्णा नगर, मॉडल टाउन, सेक्टर-13, ग्रीन पार्क आदि एरिया में धड़ल्ले से पीजी चल रहे हैं, जो निगम प्रशासन द्वारा तय नियमों को पूरा नहीं करते हैं। कई पीजी तो ऐसे संकरी गलियों में बने हुए हैं, जहां आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं जा सकती है।
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सेक्टरों में चल रहे पीजी की ईओ को दी थी जानकारी, फिर भी कार्रवाई नहीं
नगर निगम में हाउस की बैठक में पार्षद शालू दीवान, पार्षद अमित ग्रोवर, ज्योति महाजन, विनोद ढांडा सहित कई पार्षदों की ओर से अवैध रूप से चल रहे पीजी बंद करवाने की मांग उठाई गई थी। सेक्टरों में चल रहे पीजी की तो बैठक में उपस्थित हुडा के ईओ को जगह तक बताई गई। मगर फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पीजी को लेकर जवाहर नगर में पिछले दिनों हुआ था बवाल
दिसंबर के पहले सप्ताह में पीजी विवाद को लेकर ही जवाहर नगर की गली नंबर-4 स्थित एक आवास में घुसकर करीब 20 युवकों ने दंपती पर हमला कर दिया था। दंपति संतरा देवी व महेंद्र सिंह का आरोप था कि डंडों व तेजधार हथियारों से लैस होकर युवकों ने उनके साथ मारपीट की। परिवार के अन्य सदस्यों को इकट्ठा होता देखकर हमलावर ईंटें बरसाकर वहां से भाग गए। घटना से गुस्साए आसपास की गली में रहने वाले बाशिंदों ने रोष प्रदर्शन किया। इस मामले में यह बात सामने आई थी कि पीजी में रहने वालों ने एक व्यक्ति को थप्पड़ मारा था, जिसके बाद रात को लोगों ने उन्हें गली में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। इसके बाद उन्होंने पीजी में घुसकर जान बचाई थी।
एक बार उठा था मुद्दा, फिर चला गया ठंडे बस्ते में
यूं तो पीजी में रहने वाले युवकों की वजह से आए दिन लोगों को परेशानी होती है। इन युवकों के समूहों की लड़ाई मोहल्ला वासियों तक को चपेट में ले लेती है। जवाहर नगर का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन पीजी संचालकों के प्रति सख्त हो गया था। निगम प्रशासन ने भी नियम बनाकर पीजी संचालकों को नोटिस देने शुरू कर दिए थे। मगर फिर डीसी का तबादला होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
ये हैं पीजी के लिए मुख्य नियम
- पीजी का नगर निगम में पंजीकरण होना चाहिए।
- कॉमर्शियल नक्शा पास होना चाहिए।
- 250 वर्ग गज से कम जगह में पीजी नहीं बन सकता।
- पीजी जहां बना है, वहां पीजी संचालक अपनी फैमिली के साथ रहना चाहिए।
- पीजी में रहने वाले एक व्यक्ति को कम से कम 50 वर्ग फुट जगह मिलनी चाहिए।
- पीजी में सीसीटीवी व फायर एनओसी होनी जरूरी।
- पीजी में रहने वाले प्रत्येक गेस्ट की पुलिस वेरिफिकेशन होनी चाहिए।
- पीजी में नया सदस्य रहने आएगा तो उसकी तीन दिन में जानकारी पुलिस को देनी होती है।
- पीजी संचालक को आसपास की आरडब्ल्यूए और वार्ड के पार्षद की सहमति लेनी होगी।
- पीजी में रहने वालों की पूरी डिटेल के साथ रजिस्टर लगाना जरूरी है।
धारा 392(बी) के तहत हो सकती है कार्रवाई
अवैध रूप से पीजी चलाने वालों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन नगर निगम अधिनियम की धारा 392 (बी) के तहत कार्रवाई कर सकता है। इसमें पहले नोटिस दिया जाता है। फिर बिल्डिंग को सील किया जा सकता है। सील तोड़ने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी।

वर्जन
शहर में एक भी पीजी का हमारे पास रजिस्ट्रेेशन नहीं है। नियमों को पूरा नहीं करने वाले 11 पीजी संचालकों को मैंने नोटिस दिए हैं, जबकि 10-12 नोटिस बीआई धर्मेंद्र यादव ने भी दिए हैं। मेरी ओर से नौ और नोटिस तैयार हो चुके हैं। मॉडल टाउन की पीजी के लिए भी नोटिस तैयार किए जाएंगे।
- सुमित ढांडा, बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर निगम
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