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Hisar News: सिंचित क्षेत्रों के लिए सरसों की उन्नत किस्म आरएच 1975 विकसित
Mon, 25 Sep 2023 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 25 Sep 2023 11:37 PM IST
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) ने सिंचित क्षेत्रों के लिए सरसों की एक और उन्नत किस्म आरएच 1975 विकसित की है। यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए एक उत्तम किस्म है, जो मौजूदा किस्म आरएच 749 से लगभग 12 प्रतिशत अधिक पैदावार देगी। आरएच 749 किस्म एचएयू ने वर्ष 2013 में विकसित की थी।किसानों को इस किस्म का बीज अगले साल तक उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि जम्मू में आयोजित 30वीं वार्षिक सरसों व राई कार्यशाला में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक (फसल) डॉ. टीआर शर्मा की अध्यक्षता में गठित पहचान कमेटी की ओर से हाल में आरएच 1975 किस्म को सिंचित परिस्थिति में समय पर बिजाई के लिए चिह्नित किया गया है। कुलपति ने कहा कि 11-12 क्विंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन तथा 14-15 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता रखने वाली आरएच 1975 किस्म में लगभग 39.5 फीसदी तेल की मात्रा है। इससे तिलहन उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को बल मिलेगा। आरएच 1975 किस्म हरियाणा सहित पंजाब, दिल्ली, जम्मू व उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों में बीजाई के लिए चिन्हित की गई है, इसलिए इन राज्यों के किसानों को इस किस्म का लाभ मिलेगा। किसानों को इस किस्म का बीज अगले साल तक उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
बीते वर्ष भी की थीं दो उन्नत किस्में
अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा के अनुसार इस किस्म को एचएयू के सरसों वैज्ञानिकों डॉ. राम अवतार, डॉ. नीरज, डॉ. मंजीत व डॉ. अशोक कुमार की टीम ने डॉ. राकेश पूनिया, डॉ. निशा कुमारी, डॉ. विनोद गोयल, डॉ. महावीर एवं डॉ. राजबीर सिंह के सहयोग से तैयार किया है। उन्होंने बताया कि टीम ने गत वर्ष भी सरसों की दो किस्में आरएच 1424 व आरएच 1706 विकसित की थीं। सरसों अनुसंधान में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए इस टीम को हाल ही में जम्मू में आयोजित कार्यशाला में सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवाॅर्ड से भी नवाजा गया है।
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आरएच 725 किस्म सबसे अधिक लोकप्रिय
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने बताया कि एचएयू के सरसों केंद्र की देश के सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान केंद्रों में गिनती होती है। उपरोक्त किस्मों से पहले वर्ष 2018 में विकसित की गई सरसों की किस्म आरएच 725 आज के दिन किसानों के बीच सबसे अधिक प्रचलित व लोकप्रिय बन चुकी है, जोकि हरियाणा के अलावा यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश में लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्रों में अकेली उगाई जाने वाली किस्म है।
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कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि जम्मू में आयोजित 30वीं वार्षिक सरसों व राई कार्यशाला में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक (फसल) डॉ. टीआर शर्मा की अध्यक्षता में गठित पहचान कमेटी की ओर से हाल में आरएच 1975 किस्म को सिंचित परिस्थिति में समय पर बिजाई के लिए चिह्नित किया गया है। कुलपति ने कहा कि 11-12 क्विंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन तथा 14-15 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता रखने वाली आरएच 1975 किस्म में लगभग 39.5 फीसदी तेल की मात्रा है। इससे तिलहन उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को बल मिलेगा। आरएच 1975 किस्म हरियाणा सहित पंजाब, दिल्ली, जम्मू व उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों में बीजाई के लिए चिन्हित की गई है, इसलिए इन राज्यों के किसानों को इस किस्म का लाभ मिलेगा। किसानों को इस किस्म का बीज अगले साल तक उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
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बीते वर्ष भी की थीं दो उन्नत किस्में
अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा के अनुसार इस किस्म को एचएयू के सरसों वैज्ञानिकों डॉ. राम अवतार, डॉ. नीरज, डॉ. मंजीत व डॉ. अशोक कुमार की टीम ने डॉ. राकेश पूनिया, डॉ. निशा कुमारी, डॉ. विनोद गोयल, डॉ. महावीर एवं डॉ. राजबीर सिंह के सहयोग से तैयार किया है। उन्होंने बताया कि टीम ने गत वर्ष भी सरसों की दो किस्में आरएच 1424 व आरएच 1706 विकसित की थीं। सरसों अनुसंधान में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए इस टीम को हाल ही में जम्मू में आयोजित कार्यशाला में सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवाॅर्ड से भी नवाजा गया है।
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आरएच 725 किस्म सबसे अधिक लोकप्रिय
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने बताया कि एचएयू के सरसों केंद्र की देश के सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान केंद्रों में गिनती होती है। उपरोक्त किस्मों से पहले वर्ष 2018 में विकसित की गई सरसों की किस्म आरएच 725 आज के दिन किसानों के बीच सबसे अधिक प्रचलित व लोकप्रिय बन चुकी है, जोकि हरियाणा के अलावा यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश में लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्रों में अकेली उगाई जाने वाली किस्म है।