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Hisar News: कैद में वेंटिलेटर, उखड़ रहीं सांसें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 12:53 AM IST
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Imprisoned on ventilator, gasping for breath
हिसार। गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक माने जाने वाले वेंटिलेटर जिला नागरिक अस्पताल के स्टोर रूम में धूल फांक रहे हैं। इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा। अब कोरोना मरीज तो नहीं आ रहे, लेकिन कई अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों को आईसीयू सुविधा के लिए भटकना पड़ रहा है। संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद समुचित उपयोग न होना स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े कर रहा है।
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कोरोनाकाल में गंभीर रोगियों की बढ़ती तादाद को देखते हुए वेंटिलेटर्स को प्राथमिकता के आधार पर वार्डों में स्थापित किया गया। मगर अब हालात बदल चुके हैं। महामारी खत्म होने के बाद से इनका उपयोग सीमित हो गया है। फिलहाल आईसीयू वार्ड में केवल तीन वेंटिलेटर संचालित हैं। गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बढ़ जाता है। कई बार मरीजों को पर्याप्त सुविधा न मिलने के कारण निजी अस्पतालों का रुख पड़ता है।
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जगह की कमी आ रही आड़े
कार्यकारी पीएमओ डॉ. प्रभु दयाल ने बताया कि मौजूदा अस्पताल में जगह की कमी सबसे बड़ी समस्या है। डीसीएम मिल रोड पर एयरपोर्ट के पास लगभग 300 बेड के नए अस्पताल के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग को जमीन हस्तांतरित होने के बाद ही परियोजना आगे बढ़ सकेगी। वर्तमान परिसर में आईसीयू का विस्तार संभव नहीं है। इसलिए अतिरिक्त वेंटिलेटर स्थापित नहीं किए जा पा रहे हैं। इसके साथ ही हमारे पास फिलहाल पर्याप्त तकनीकी स्टाफ भी नहीं है।
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वार्ड छह में बनेगा छह बेड का आईसीयू
डॉ. प्रभु दयाल ने बताया कि वार्ड नंबर छह में छह बेड का आईसीयू बनाने की योजना है, लेकिन बजट के अभाव में काम रुका है। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण शुरू किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज में कोई परेशानी नहीं है और इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर 24 घंटे तैनात रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग हो तो गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकता है।


वेंटिलेटर चालू करने के लिए केवल मशीन पर्याप्त नहीं होती, प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी स्टाफ की जरूरत होती है। आईसीयू में हर वेंटिलेटर के साथ 24 घंटे निगरानी के लिए विशेष प्रशिक्षित स्टाफ चाहिए होता है। फिलहाल अस्पताल में स्टाफ की कमी है, इसलिए सभी 35 वेंटिलेटर एक साथ शुरू करना संभव नहीं।
- डॉ. प्रभु दयाल, कार्यकारी पीएमओ, नागरिक अस्पताल।
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