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सर्विस नहीं दी तो हुडा अधिकारियों को होगी जेल

Thu, 06 Aug 2015 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार Updated Thu, 06 Aug 2015 01:21 AM IST
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सेक्टर 9-11 के 14 लोगों ने सुविधाओं को लेकर हुडा के खिलाफ डाली पिटीशन

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सेक्टर 9-11 में कांग्रेस घास, टूटी सड़कें, शॉपिंग कांप्लेक्स की सुविधा न देने, पार्कों के खस्ता हालात, खाली प्लॉटों में खड़ी झाड़ियों और सेक्टर से हैवी व्हीकल गुजरने और चेन स्नेचिंग की वारदात होने के मामले से परेशान जागरूक लोगों ने पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में हुडा और पुलिस के खिलाफ केस डाला है।

कोर्ट ने सेक्टरवासियों को हुडा और पुलिस द्वारा सर्विस उपलब्ध न करवाए जाने के मामले को बुधवार को लोकल कमीशन गठित कर जांच के लिए भेजा। कमीशन में एडवोकेट महेंद्र सिंह डूडी बुधवार को सेक्टर 9-11 में जांच के लिए पहुंचे। मामले की सूचना मिलते ही हुडा और पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
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मौके पर ही हुडा के एसडीओ अमित गोदारा, जेई धर्मबीर, हुडा का पैरोकार बृजमोहन जिंदल। पुलिस डिपार्टमेंट की तरफ से डीएसपी ओपी बिश्नोई, सिविल लाइन थाना इंस्पेक्टर देवेंद्र नैन और चौकी इंचार्ज पहुंचे। लोकल कमीशन की टीम ने पूरे सेक्टर का दौरा किया।
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जांच टीम ने मौके से फोटो भी लिए। पार्क, सड़क, कांग्रेस घास, फुटपाथ सहित कई तरह की समस्याएं मौके पर मिलीं। करीब एक घंटे के दौरे के बाद टीम रिपोर्ट तैयार कर अपने साथ ले गई।

आरब्ल्यूए प्रधान बीर सिंह बामल और एडवोकेट रत्न सिंह पानू ने बताया कि कोर्ट ने जांच के लिए तीन अगस्त को ऑर्डर किए। अब यह रिपोर्ट कोर्ट में 11 अगस्त तक जमा करवानी है।

इन लोगों ने डाली थी पिटीशन
पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में सेक्टर 9-11 की तरफ से केस लड़ रहे रत्न सिंह पानू ने बताया कि यह केस 14 लोगों ने मिलकर डाला है। सेक्टर की सभी ब्लॉकों से एक-एक व्यक्ति ने मिलकर पिटीशन डाली है, जिनमें रघुबीर, दयाराम मलिक, कुलबीर कुहाड़ सहित कई अन्य सेक्टरवासी शामिल हैं। 

यह बनाया आधार

एडवोकेट पानू ने बताया है कि सेक्टर 9-11 वर्ष 2002 में बना था। लोगों को 2003 में प्लॉट अलॉट हुए। आज तक इसमें शॉपिंग कांप्लेक्स नहीं हैं, लोगों को सेक्टर से बाहर जाकर सामान खरीदकर लाना पड़ रहा है।

न कम्यूनिटी सेंटर, ग्रीन बेल्ट टूटी हुई, पार्कों से हाई वोल्टेज तार गुजर रही हैं, लावारिस पशु, पार्कों में झूले नहीं हैं। इसके अलावा दीवारें कंडम, वाटर वर्क्स की दीवारें टूटी हुईं, जिनमें  लावारिस पशुओं का घूमना, कांग्रेस घास व खाली प्लॉटों में खड़ी झाड़ियां लोगों को परेशानी दे रही है।

सेक्टरों में लोग कुत्ते रख रहे हैं जिनका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं। इन सभी शिकायतों के बारे में हुडा को बार-बार शिकायत की जा रही है, मगर अधिकारी और कर्मचारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे।

पुलिस के लिए यह बनाया आधार
सेक्टरवासियों ने पिटीशन में डाला कि सेक्टर 9-11 से हैवी व्हीकल गुजारे जा रहे हैं। साउथ बाईपास न बनने के कारण ऐसा हो रहा है। पुलिस इन वाहनों के लिए रूट डायवर्ट नहीं कर रही। इसके अलावा बार-बार सेक्टर में चेन स्नेचिंग की घटनाएं हो रही हैं। आम नागरिक और महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

ये हैं पांच पार्टियां
- एडमिनिस्ट्रेटर
- इस्टेट ऑफिसर
-एसई हुडा कंस्ट्रक्शन
-एक्सईएन हॉर्टिकल्चर
-एसएसपी हिसार

समस्याएं दूर करवाने का दिया झूठा रिप्लाई
एडवोकेट रत्न सिंह पानू का कहना है कि यूटिलिटी कोर्ट में जनवरी महीने में पिटीशन डाली गई थी। इसके बाद दोनों विभागों के अधिकारियों ने कोर्ट में झूठा रिप्लाई दे दिया कि उन्होंने उनकी समस्याएं दूर करवा दी हैं।

कंस्ट्रक्शन का काम (शॉपिंग कांप्लेक्स व कम्यूनिटी सेंटर) भी शुरू कर दिया गया है। भारी वाहनों को डायवर्ट कर दिया गया है। इसके बाद पिटीशन डालने वालों की तरफ से एडवोकेट ने यह रिप्लाई झूठा होने का दावा किया और कोर्ट ने इसके आधार पर लोकल कमीशन नियुक्त कर जांच रिपोर्ट देने की बात कही।

पांच लाख मुआवजे की मांग
पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट ने दोनों विभागों से याचिका दायर करने वालों अथवा सेक्टरवासियों को पांच लाख रुपये की कंपन्सेशन (मुआवजे) की मांग भी रखी है, जिसके लिए उन्होंने आधार बनाया है कि वे सभी प्रकार के टैक्स इत्यादि भर रहे हैं। हुडा पूरी तरह सर्विस भी नहीं उपलब्ध करवा रहा, जिसके कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।


सर्विस और जन सुविधा संबंधित डाल सकते हैं पिटीशन
एडवोकेट पानू ने बताया है कि ट्रांसपोर्टेशन, कम्युनिकेशन, डाक विभाग, कंस्ट्रक्शन की शिकायत, 25 लाख तक का चेक बाउंस, एयर टिकट संबंधित, मालभाड़ा, टेलीफोन, दवाइयों से संबंधित कोई भी सर्विस और जनसुविधाओं से संबंधित सर्विस को लेकर केस डाला जा सकता है।

यूटिलिटी कोर्ट की पावर
आरडब्ल्यूए के प्रधान बीर सिंह बामल और एडवोकेट पानू का कहना है कि पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट को सिविल कोर्ट के समान पावर है। अगर कहीं वायलेशन हो तो यह कोर्ट सजा भी सुना सकती है और जुर्माना भी लगा सकती है। 

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